बनारस में अपने सबसे खराब व्यवहार की वजह से जाना जाता है कई डायग्नोस्टिकस सेंटर ! क्यो है स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे?

बनारस में अपने सबसे खराब व्यवहार की वजह से जाना जाता है कई डायग्नोस्टिकस सेंटर ! क्यो है स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे?
बनारस में सबसे खराब व्यवहार से जाना जाता है कई डायग्नोस्टिकस !
बनारस में अपने सबसे खराब व्यवहार की वजह से जाना जाता है कई डायग्नोस्टिकस सेंटर ! क्यो है स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे?
बनारस में अपने सबसे खराब व्यवहार की वजह से जाना जाता है कई डायग्नोस्टिकस सेंटर ! क्यो है स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे?

नितिन रॉय (विशेष संवाददाता)

वाराणसी:खोदा पहाड़ निकली चुहिया या नाम बड़े दर्शन छोटे यह कहावत तो आपने अवश्य ही सुनी होगी कुछ ऐसे ही घटना हुई है बनारस के संकट मोचन स्थित करौली डायग्नोस्टिक्स का जहाँ दिनांक 14 जुलाई की दोपहर बनारस के जाने-माने और सबसे लोकप्रिय डॉक्टर के0के0 त्रिपाठी के द्वारा दो टेस्ट लिखा जाता है थायराइड और दूसरा टेस्ट लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) का हालांकी त्रिपाठी साहब तो काफी ईमानदार है इमानदार इस वजह से क्योंकि उन्होंने बोला कि आपको जहां उचित लगे वहां टेस्ट करवा लीजिए , ईमानदार इसलिए क्योंकि बाकी डॉक्टरों का कमीशन डायग्नोस्टिक सेंटर और मेडिकल स्टोर से फिक्स होता है जिससे एक गरीब व्यक्ति के लिए टेस्ट और उपचार कराना मुमकिन नही हो पाता है जहां भी आप टेस्ट कराएंगे वहां 50% या उससे भी अधिक कमीशन डॉक्टरो के पास जाता है लेकिन यहां स्थिति साफ और सीधी थी कि आप कहीं भी टेस्ट करा सकते हैं ।

पूरी घटना इंडिया न्यूज रिपोर्ट के विशेष संवाददाता नितिन रॉय के साथ घटी है दरअसल नितिन के पेट मे काफी दिनों से दर्द रह रहा था डॉ0 त्रिपाठी से टेस्ट लिखवाकर नितिन डायग्नोस्टिक सेंटर पहुंचा और साधारण सा अपना परिचय दिया ये भी नही बताया कि वो मीडिया से सम्बंध रखता है नितिन मुंबई का निवासी है और उसका खुद का एक यूट्यूब चैनल भी हैं।

अब हम बात करें डायग्नोस्टिक सेंटर की जो काफी देखने में साफ सुथरा है लेकिन उसके कुछ कर्मचारियों का व्यवहार अपमानजनक और असभ्य है हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि यहां काफी महंगी जांच की जाती है।

अब आपको मुख्य बातों की तरफ लाते हैं जब ब्लड सैंपल देने की बात होती है तो वहां कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं रहता है कुछ समय इंतजार करने के बाद वह व्यक्ति आता है और सैंपल लेता है और वहां के रिसेप्शन काउंटर पर बताया जाता है कि रिपोर्ट को तैयार होने में 4 घंटे से ज्यादा वक्त तक लग सकते हैं क्योंकि यह सारी चीजें मशीनरी के द्वारा किया जाता है, जब पेशेंट दिए हुए वक्त पर पहुंचता है तो पता चलता है टेस्ट सैंपल कहीं और भेज दिया गया है जिसको आने में कुछ टाइम लगेगा यानी कि उस सेंटर पर ब्लड टेस्ट की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है वहां सिर्फ सैंपल कलेक्ट किया जाता है और दूसरे जगहों पर भेज दिया जाता है अब सवाल ये भी उठता है कि किस तरीके के लोग से यह जांच कराया जाता है ,अगर आपको इस करौली डायग्नोस्टिक सेंटर में जाने का मौका मिला तो सोच समझ कर जाए वरना लेने के देने पड़ जाएंगे, अगर हमारी माने तो ना ही जाए तो बेहतर है बाकी आपकी मर्जी।

ऐसे तमाम डायग्नोस्टिक सेंटर बनारस और आसपास के क्षेत्रों में प्रायः देखा जा सकता है लेकिन ना जाने क्यों स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी, सीएमओ साहब ऐसे मामलों पर ध्यान नही देते है।

ये बात सच है की डॉक्टर जहा से टेस्ट कराने को बोलते है वहां से कमीशन कुछ न कुछ जाता ही है डॉक्टर के पास , परंतु साथ ही एक अच्छा डॉक्टर मरीज को वहीं भेजेगा जहा कम से कम अच्छे रेडियोलॉजिस्ट ,पैथोलॉजिस्ट , माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट , आपकी जांच को चेक करते हैं, अगर मरीज को ये सुविधा है की वो अपना टेस्ट कही से करा सकता है तो कम से कम पता कर ले की सेंटर चला कौन रहा है टेक्नीशियन या फिर डॉक्टर।

गूगल पर करौली डायग्नोस्टिक सेंटर सर्च करने पर एक से एक फोटो मिल सकती है जिससे लगेगा कि यह एक सुपरस्पेशलिटी वाला डायग्नोस्टिक सेंटर है लेकिन हकीकत कुछ और ही बया करती है ।