क्या दिल्ली में सक्रिय है किडनैपिंग गैंग? छात्राओं के अनुभवों ने खड़े किए सवाल

दिल्ली में पढ़ाई कर रही छात्राओं ने अपने खौफनाक अनुभव साझा किए हैं, जिनमें पीछा किए जाने, झांसा देकर फंसाने और दिनदहाड़े किडनैपिंग की कोशिश जैसी घटनाएं शामिल हैं। साउथ और नॉर्थ दिल्ली के कॉलेज इलाकों से सामने आई इन आपबीती ने राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक छात्रा ने मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई है, जबकि सुरक्षा कारणों से सभी पीड़िताओं की पहचान गुप्त रखी गई है।

क्या दिल्ली में सक्रिय है किडनैपिंग गैंग? छात्राओं के अनुभवों ने खड़े किए सवाल

दिल्ली में लड़कियां और महिलाएं बड़ी संख्या में गायब हो रही हैं. लापता लेडीज का सनसनीखेज आंकड़ा पेश करने के बाद भले ही दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार इसे सामान्य साबित करने की कोशिश करे और तमाम दलीलें दे, लेकिन दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही लड़कियों के इन खौफनाक अनुभवों को आप पढ़ेंगे तो आपका कलेजा कांप जाएगा. साउथ और नॉर्थ दिल्ली में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं ने एक कॉमन स्टूडेंट्स ग्रुप पर पिछले कुछ दिनों में उनके साथ हुई घटनाओं के एक्सपीरिएंस शेयर किए हैं, जो बेहद डरावने हैं. कई लड़कियों ने रोते हुए अपनी आपबीती की ऑडियो शेयर की हैं, जबकि दिल्ली यूनिवर्सिटी के कमला नेहरू कॉलेज में पढ़ने वाली एक छात्रा ने न केवल उसके साथ दिनदहाड़े की गई किडनेपिंग की कोशिश के बारे में बताया है बल्कि दिल्ली पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई है. सुरक्षा के लिहाज से इन सभी के नाम गुप्त रखे गए हैं. आइए पढ़िए..

  1. छात्रा1- मैं आज कॉलेज से बाहर कुछ खाने-पीने के लिए आई थी और दोपहर में धूप अच्छी थी तो मैंने सोचा थोड़ी देर सत्या पार्क में बैठ जाती हूं. मैं एक बैंच पर बैठी थी, तो कुछ दूरी पर एक और बैंच पड़ी थी, वहां अचानक एक लड़की हंसती-खेलती हुई आई और बैंच पर बैठते ही घुटनों के बीच में सिर रखकर रोने लगी. वह एकदम तेज-तेज आवाज में ऐसे रो रही थी जैसे फिल्मों में रोते हैं. मुझे कुछ समझ ही नहीं आया कि अभी तो ये हंस रही थी, रोने क्यों लगी. मैंने सोचा कि ये थोड़ा शांत हो जाए तो इसके पास जाकर पूछती हूं कि हुआ क्या है? तभी मैंने देखा पास से दो लड़के उस लड़की के पास से उसे देखते हुए गुजरे और मेरे पीछे से होकर निकल गए. उस लड़की ने उन्हें देखा और लड़की ने भी उन्हें देखा और फिर तीनों ने मेरी ओर देखा. कुछ मिनट के बाद वो लड़के फिर से उस लड़की को देख रहे और मेरी ओर देख रहे, और फिर लड़की ने मेरी ओर देखते हुए एक बार फिर रोना शुरू कर दिया. मुझे अब कुछ डर सा लगने लगा, पता नहीं कैसे मेरे सिक्स्थ सैंस ने काम किया और मैं उठी और लड़की के पास जाने के बजाय सीधे पार्क के गेट की तरफ भागी, लेकिन क्या देखती हूं कि जो लड़की मेरे से दूर थी वह पार्क के गेट पर मेरे सामने आ गई. मेरी घबराहट से जान निकलने लगी और मैं वहां से तेजी से भागी, मैंने पीछे मुड़ के देखा कि वह लड़की और वे दोनों लड़के आपस में बात कर रहे थे और वह लड़की इतनी अजीब तरह से मुस्कुराई, जैसे उसने मुझे ये बताया कि अच्छा तू समझ गई? मैं वहां से भागकर सीधे अपने रूम पर पहुंची, पर मैं बहुत घबरा रही थी.
  2. छात्रा. 2- कॉलेज के बाद मैं घर के लिए चल दी. शाम के पौने 4 बजे थे, काफी सुनसान था. ग्रीन पार्क मेट्रो के पास का एक बस स्टॉप पर पहुंची तो मैंने महसूस किया कि एक बहुत लंबा व्यक्ति मेरा पीछा कर रहा है, जैसे ही मैं रुकी, वह भी रुक गया. तभी मैंने देखा कि एक बाइक और एक ऑटो मेरे और उस आदमी के आगे पीछे-आगे पीछे होकर चल रहे थे. गाड़ियां तो सीधे जा रही थीं लेकिन वह ऑटो और बाइक धीमे धीमे चल रहे थे. मैं चलती रही, कुछ मिनट के बाद मैंने देखा कि ऑटो आगे हो गया और वह लंबा आदमी उस ऑटो के साइड में छुप गया. मैंने जब ये देखा तो मैं पीछे ही मुड़ गई और उल्टा मेट्रो की तरफ चलने लगी. जब मैंने मुड़कर देखा तो वे लोग उधर नहीं थे. मैंने सोचा चले गए तो मैं फिर मुड़कर अपने रूम की तरफ चलने लगी, लेकिन अचानक ही पीछे से वो आदमी निकलकर आया और उसने मुझे पीछे से बहुत बुरी तरह दबोच लिया. यहां तक कि मैं कुछ कर ही नहीं पा रही थी. हिल नहीं पा रही थी. मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था, तभी मेरे पास एक कार आकर रुकी, उसकी पकड़ ढीली हुई और कार वाले शख्स ने मुझे जोर से बोला कि बेटा आप भागो इससे मैं निपट लूंगा. मैंने नहीं देखा वो कौन थे और मैं अपने पीजी की तरफ भागी. मैंने अपनी ओनर को बताया कि प्लीज आप बाहर देखो क्या हो रहा है, कौन है. मैं बदहवास थी. ओनर ने बाहर देखा तो वहां कुछ नहीं था. मैंने इस घटना की एफआईआर करवाई है.
  3. छात्रा .3- कुछ दिन पहले मैं शाम के साढ़े 7 बजे अपने कॉलेज के आसपास थी, तभी मैंने वहां दो आदमी, एक औरत और एक बच्चे का ग्रुप वहां घूमते हुए देखा. वे चारों अचानक मेरे आसपास आए मुझसे पूछा कि आपको मराठी आती है? फिर वे अपनी परेशानी बताने लग गए कि उन्हें खाने और पैसे की जरूरत है ताकि वे अपने शहर लौट सकें. उनकी बातें और हरकतें मैं गौर से देख रही थी तो मुझे कुछ अजीब लगीं. मैंने सोचा कि इस बारे में पुलिस को बताऊं, मैंने आसपास नजर दौड़ाई लेकिन एक और खास बात थी कि उस दिन कॉलेज के पास पुलिस की पीसीआर वैन भी नहीं थी. किसी तरह मैं वहां से दौड़ी और अपने पीजी में पहुंची.