वाराणसी: जैन मंदिर घाट पर 4 बोरियों में मिली 'फेयरडिल' कफ सिरप, जून 2026 की डेट ,कोडीन लिखे होने से नकली फार्मा नेटवर्क का शक
पुलिस और ड्रग डिपार्टमेंट की संयुक्त कार्रवाई, सैंपल लैब भेजे गए, बैच नंबर से सप्लाई चेन खंगाल रही पुलिस -कुलदीप की रिपोर्ट
INDIA NEWS REPORT
कुलदीप बरनवाल
वाराणसी के चौबेपुर थाना क्षेत्र के चंद्रावती गांव स्थित जैन मंदिर घाट के पास गंगा किनारे बोरियों में भारी मात्रा में 'फेयरडिल' कफ सिरप मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार घाट के पास 4 बोरियों में कफ सिरप की बोतलें रखी थीं। सबसे चौंकाने वाली बात ये कि बोतलों पर निर्माण तिथि जून 2026 और एक्सपायरी वर्ष 2028 अंकित है। इतनी नई दवा को इस तरह फेंके जाने से ग्रामीणों ने इसे नकली दवा रैकेट से जुड़ा होने की आशंका जताई है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पुलिस और औषधि विभाग की त्वरित कार्रवाई
सूचना मिलते ही चौबेपुर थाना पुलिस और औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
1.जब्ती और मुकदमा
पुलिस ने मौके से चारों बोरियों में भरी 'फेयरडिल' कफ सिरप की बोतलों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लिया है। अज्ञात वाहन चालकों और तस्करों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है जिन्होंने इसे चुपके से गंगा किनारे फेंका था।
2. लैब टेस्टिंग और जांच
औषधि निरीक्षक की देखरेख में दवाओं के सैंपल कलेक्ट कर सरकारी लैब भेजे गए हैं। लैब में रासायनिक संरचना की जांच के बाद ही पता चलेगा कि सिरप असली है या नकली।
“अभी तक दवा के असली या नकली होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है पुलिस मामले की जांच कर रही है, जिसके बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।"
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बोतलों पर फ्यूचर की तारीख होने के कारण इसके पूरी तरह नकली फार्मा नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।
3. सिंडिकेट की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
पुलिस सिरप के बैच नंबर और बारकोड के जरिए यह पता लगा रही है कि यह किस अवैध मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से तैयार होकर सप्लाई चेन में आया। साथ ही ये भी जांच की जा रही है कि कहीं ये खेप वाराणसी में पहले पकड़े गए कोडीन आधारित कफ सिरप तस्करी करने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट जैसे 'शुभम जायसवाल गिरोह' से तो नहीं जुड़ी है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से तफ्तीश कर रही है। लैब रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।


