नगर निगम का तमगा मिला, पर विकास? लोहता की सड़कों पर नारकीय जीवन जीने को मजबूर जनता! ​"दावे स्मार्ट सिटी के, लेकिन ज़मीनी हकीकत ठेहुना तक भरे गंदे पानी और कचरे के ढेर में तब्दील!"

जनसमस्याओं पर INDIA NEWS REPORT की पैनी नज़र कुलदीप बरनवाल वाराणसी डेस्क

नगर निगम का तमगा मिला, पर विकास? लोहता की सड़कों पर नारकीय जीवन जीने को मजबूर जनता! ​"दावे स्मार्ट सिटी के, लेकिन ज़मीनी हकीकत ठेहुना तक भरे गंदे पानी और कचरे के ढेर में तब्दील!"
वाराणसी:लोहता -धमरिया वार्ड नम्बेड 52

INDIA NEWS REPORT

हर जनसमस्या पर पैनी नज़र 

डीएम साहब! इंसान लोहता में भी रहते हैं, जरा एक बार आकर देख लेते...

कुलदीप बरनवाल | वाराणसी। ये सच्चाई है भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र व  सपनों की स्मार्ट सिटी वाराणसी के वार्ड नंबर 52, लोहता के धमारिया मुख्य मार्ग की। एक ऐसी सड़क जो कागजों पर तो स्मार्ट सिटी का हिस्सा है, लेकिन हकीकत में आज भी किसी टापू से कम नहीं।

वाराणसी को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिले ज़माना हो गया। लोहता को नगर निगम में शामिल हुए भी 4 साल बीत गए। पर यहाँ के लोगों की किस्मत आज भी नहीं बदली।

4 साल पहले गांव ही सही था...

स्थानीय लोगों का दर्द सुनिए - "4 साल पहले हम गांव में थे, वो ही सही था। कम से कम सूखी जमीन पर तो चलते थे। अब तो बस नाम की लंबी-चौड़ी सड़क है, चमचमाती लाइटें हैं, और हम घुटने भर पानी में हैं!"

बारिश होते ही धमारिया मार्ग तालाब बन जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीज अस्पताल नहीं पहुँच पाते, दुकानदारों की दुकानों में पानी घुस जाता है।

हम तो न गांव के रहे, न शहर के!

लोगों का कहना है - "हम शहर से सिर्फ कागजों पर जुड़े हैं। सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं। हम तो न गांव के रहे, न शहर के!"

और तो और, इस दुर्दशा पर सबसे बड़ा तमाचा ये है कि लोगों की छोड़िए, यहाँ चुने हुए सभासद की भी नहीं सुनी जाती। सभासद ने क्षेत्र के लिए कई प्रस्ताव भेजे, पर नगर निगम ने एक पर भी काम नहीं किया। हालात ये हैं कि सभासद खुद आंदोलन में उतरने को मजबूर हैं।

तो फिर सवाल उठता है, जब काम आंदोलन से ही करवाना है तो सभासद, प्रधान का चुनाव ही क्यों? आंदोलन तो आम नागरिक भी कर सकता है।

डीएम साहब से गुहार -

लोहता की जनता हाथ जोड़कर जिलाधिकारी महोदय से गुहार लगा रही है - "डीएम साहब! इंसान लोहता में भी रहते हैं, ज़रा एक बार आकर देख लेते।"

क्या स्मार्ट सिटी का मतलब सिर् कैंट, गोदौलिया और अस्सी तक ही सीमित है? क्या लोहता वाराणसी का हिस्सा नहीं है?

जिम्मेदार मौन लेकिन है कौन?