इलाहाबाद हाईकोर्ट से नवोदय के छात्र को बड़ी राहत, बीमारी के आधार पर निष्कासन रद्द; अधिवक्ता कौस्तुभ त्रिपाठी की दलीलों पर मिला न्याय

जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने JNV बुलंदशहर के प्रिंसिपल को 4 हफ्ते में पुनः प्रवेश और विशेष परीक्षा कराने का दिया आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट से नवोदय के छात्र को बड़ी राहत, बीमारी के आधार पर निष्कासन रद्द; अधिवक्ता कौस्तुभ त्रिपाठी की दलीलों पर मिला न्याय
हाईकोर्ट से छात्र को न्याय नवोदय का निष्कासन रद्द वकील कौस्तुभ त्रिपाठी ने जिताया केस

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द

 प्रयागराज।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जवाहर नवोदय विद्यालय के एक छात्र को बड़ी राहत देते हुए उसका प्रवेश निरस्त करने के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने विद्यालय प्रशासन को छात्र के मेडिकल दस्तावेजों का सत्यापन कर उसे कक्षा 10 में नियमित प्रवेश देने और कक्षा 9 के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता छात्र की याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया। इस फैसले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कौस्तुभ त्रिपाठी की प्रभावी और मानवीय पैरवी निर्णायक साबित हुई।

 क्या था मामला?

याचिकाकर्ता छात्र ने JNVST पास कर कक्षा 6 में जवाहर नवोदय विद्यालय, बुलंदशहर में प्रवेश लिया था। कक्षा 6 से 8 तक उसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। कक्षा 9 के दौरान वह गंभीर बीमारी - साइनस, नेजल ऑब्स्ट्रक्शन और सर्जरी के बाद की जटिलताओं से पीड़ित हो गया। लंबे समय तक उसका इलाज NCR इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और एम्स, नई दिल्ली में चला।

इसी बीच उपस्थिति केवल 7% रहने के कारण विद्यालय प्रशासन ने 2 अप्रैल 2026 को उसका नामांकन निरस्त कर दिया। छात्र के पिता द्वारा CPGRAMS पर की गई शिकायत भी 12 मई 2026 को खारिज कर दी गई।

कोर्ट में अधिवक्ता कौस्तुभ त्रिपाठी की दमदार दलील

सुनवाई के दौरान अधिवक्ता कौस्तुभ त्रिपाठी ने कोर्ट के समक्ष मेडिकल रिकॉर्ड, डिस्चार्ज समरी और विद्यालय को दिए गए अवकाश प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने तर्क दिया कि छात्र ने जानबूझकर कक्षा नहीं छोड़ी, बल्कि गंभीर बीमारी के कारण वह बिस्तर पर था। एक गरीब परिवार के मेधावी छात्र को उसकी बीमारी की सजा देकर शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। छात्र आज भी कक्षा 9 की परीक्षा देकर अपनी योग्यता साबित करने को तैयार है।

वहीं नवोदय विद्यालय समिति ने NVS के नियमों का हवाला दिया कि 40% से कम उपस्थिति किसी भी स्थिति में माफ नहीं की जा सकती।

अदालत ने अधिवक्ता त्रिपाठी के तर्कों और मेडिकल साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए प्रशासन के आदेश को कठोर और अमानवीय माना।

हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

कोर्ट ने 2 अप्रैल और 12 मई के दोनों आदेशों को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि:

  1. प्रिंसिपल, JNV बुलंदशहर छात्र के अस्पताल के रिकॉर्ड का सत्यापन करें।
  2. रिकॉर्ड सही मिलने पर छात्र को कक्षा 10 में नियमित छात्र के रूप में पुनः प्रवेश दिया जाए।
  3.  कक्षा 9 की औपचारिकता पूरी करने के लिए विशेष/पूरक परीक्षा आयोजित की जाए।
  4. यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 4 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।

इस आदेश के बाद छात्र के परिवार ने राहत की सांस ली है। कानूनी हलकों में अधिवक्ता कौस्तुभ त्रिपाठी की संवेदनशील और तार्किक पैरवी की जमकर सराहना हो रही है।