'वंदे मातरम्' प्रकरण: अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी की शिकायत LG ऑफिस से होते हुए पहुंची दिल्ली पुलिस आयुक्त तक
कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम्' के कथित अपमान का मामला: 15 अगस्त की शिकायत पर आगे बढ़ी कार्रवाई, अब दिल्ली पुलिस करेगी जांच
INDIA NEWS REPORT
कुलदीप बरनवाल
वाराणसी/नई दिल्ली | 21 अगस्त 2026
भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक और दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा 'वंदे मातरम्' प्रकरण में की गई शिकायत पर प्रशासनिक कार्रवाई आगे बढ़ गई है।
अधिवक्ता त्रिपाठी ने 15 अगस्त 2026 को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगीत "वंदे मातरम्" के गायन में कथित व्यवधान / अपमान को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में मांग की गई थी कि उपलब्ध वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग, CCTV फुटेज, सोशल मीडिया पर मौजूद मूल वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराई जाए। साथ ही कहा गया था कि यदि जांच में संज्ञेय अपराध प्रथमदृष्टया प्रमाणित होता है तो विधि अनुसार FIR दर्ज कर कार्रवाई की जाए। शिकायत में यह भी उल्लेख था कि किसी भी व्यक्ति को केवल राजनीतिक पद या सामाजिक प्रतिष्ठा के आधार पर जांच से बाहर न रखा जाए।
शिकायत का सफर: 15 से 21 अगस्त तक
प्राप्त अभिलेखों के अनुसार यह शिकायत 15 अगस्त को ही दिल्ली पुलिस, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री एवं गृह विभाग, अपराध शाखा और राष्ट्रपति सचिवालय को भेजी गई थी।
इसके बाद इस पर प्रशासनिक स्तर पर पत्राचार आगे बढ़ा -
- 17 अगस्त 2026: मामला उपराज्यपाल कार्यालय के संबंधित स्तर से आगे भेजा गया।
- - 19 अगस्त 2026: इसे OSD to Hon’ble LG के माध्यम से Deputy Secretary, LG Secretariat / Home & Police को अग्रेषित किया गया।
- 21 अगस्त 2026: Deputy Secretary, LG Secretariat से प्रकरण Commissioner of Police, Delhi को भेजा गया। इस ई-मेल में शिकायतकर्ता को भी CC में रखा गया।
शशांक शेखर त्रिपाठी ने क्या कहा?
अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना नहीं है, बल्कि कानून के शासन, राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और समान रूप से कानून के अनुपालन को सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा, "यदि जांच में कोई अपराध सिद्ध नहीं होता है तो भी अपेक्षा है कि दिल्ली पुलिस शिकायतकर्ता को कारणों सहित लिखित रूप से अवगत कराए। यदि अपराध प्रमाणित होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।"
उन्होंने यह भी मांग की है कि पूरे मामले में मूल डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए, जरूरत पड़ने पर FSL / साइबर फॉरेंसिक जांच कराई जाए और जांच को निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्याधारित रखा जाए।
फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों में FIR दर्ज होने या किसी व्यक्ति के विरुद्ध अंतिम आपराधिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं है। अब निगाहें दिल्ली पुलिस की आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।


