कोडीन कफ सिरप तस्करी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट से 57 को जमानत, 19 मुख्य आरोपियों की याचिका खारिज

मामला करोड़ो के अंतरराष्ट्रीय नशे के व्यापार का मास्टरमाइंड अब भी फरार

कोडीन कफ सिरप तस्करी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट से 57 को जमानत, 19 मुख्य आरोपियों की याचिका खारिज

प्रयागराज/वाराणसी: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बहुचर्चित कोडीन-आधारित कफ सिरप तस्करी मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 57 आरोपियों को जमानत दे दी है, जबकि रैकेट के मुख्य मास्टरमाइंड्स और सिंडिकेट से जुड़े 19 मुख्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

वाराणसी कनेक्शन

जमानत पाने वाले 57 लोगों में से 17 आरोपी अकेले वाराणसी जिले से हैं। न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकलपीठ ने जेलों में भीड़ और आरोपियों की कम गंभीर भूमिका को आधार बनाकर उन्हें राहत दी है।

किसे मिली राहत?

कोर्ट ने उन लोगों को जमानत दी है जो इस रैकेट में छोटी भूमिका में थे - जैसे ट्रक ड्राइवर, खलासी, गोदाम के छोटे कर्मचारी या बैंक स्टाफ। कोर्ट ने माना कि ये लोग केवल सीलबंद पार्सल ले जा रहे थे और उन्हें जानकारी नहीं थी कि कार्टन के अंदर अवैध कोडीन सिरप छिपाया गया है।

किसे नहीं मिली राहत?

इस सिंडिकेट को चलाने वाले बड़े सरगनाओं को कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 'दवा के नाम पर नशे का धंधा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा'।

मुख्य आरोपियों की स्थिति

मामले के मुख्य आरोपी भोला प्रसाद जायसवाल (शैली ट्रेडर्स/साईं ट्रेडर्स के प्रोप्राइटर) की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने पूरी तरह खारिज कर दी है। वहीं, इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड उसका बेटा शुभम जायसवाल लंबे समय से फरार है। उसे पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी है। इन दोनों सहित गिरोह के मुख्य सदस्यों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई चल रही है।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ किया कि चिकित्सा के लिए निर्धारित सीमा में कोडीन सिरप का इस्तेमाल NDPS एक्ट के दायरे में नहीं आता। लेकिन, जब फर्जी फर्में और नकली ई-वे बिल बनाकर लाखों बोतलें नशे के लिए खुले बाजार या बांग्लादेश जैसे देशों में तस्करी की जाती हैं, तो यह गंभीर अपराध है और इस पर NDPS एक्ट सख्ती से लागू होगा।