नौतपा कल से शुरू: 9 दिन तपेगी धरती, 45° पार जाएगा पारा | किसान बोले- यही है फ्री कीटनाशक

ज्येष्ठ की तपती दोपहरी में कल से नौतपा शुरू। 9 दिन की भीषण गर्मी से घबराएं नहीं, ये किसान का फ्री ऑपरेशन थियेटर है। जानिए हर दिन का वैज्ञानिक और देसी हिसाब : विशेष रिपोर्ट

नौतपा कल से शुरू: 9 दिन तपेगी धरती, 45° पार जाएगा पारा | किसान बोले- यही है फ्री कीटनाशक

INDIA NEWS REPORT

 गांव की ठंडी चौपाल की रिपोर्ट

वाराणसी, 24 मई 2026: ज्येष्ठ की तपती दोपहरी में कल से नौतपा शुरू हो रहा है। 25 मई से 2 जून तक अगले 9 दिन धरती आग उगलेगी। मौसम विभाग का अलर्ट है कि पूर्वांचल में पारा 45-47 डिग्री तक जाएगा।

पर गांव की चौपाल पर डर नहीं, उम्मीद की चर्चा है। 80 साल के किसान रामलखन गमछा पोंछते बोले - "बेटा, घबरा मत। नौतपा तपे, तो धरती सोना उगले। जिस साल नौतपा नहीं तपा, उस साल धान में कल्ले भी नहीं फूटे"।

नौतपा हर साल 25 मई से 2 जून तक लगता है। खगोल के हिसाब से इन 9 दिनों सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहते हैं। किसानों की जुबान में ये साल के सबसे गर्म 9 दिन हैं। यही तय करते हैं कि सावन कैसा बीतेगा और खेत कैसा लहलहाएगा।

बुजुर्ग कहते हैं "तपे नौतपा, तो छप्पर फाड़ बरसे"। तपी धरती लो-प्रेशर एरिया बनाती है जो अरब सागर से मानसूनी हवाएं खींचता है। मतलब साफ है - नौतपा कमजोर तो सूखा पक्का। दूसरी बड़ी बात ये कि 45 डिग्री से ऊपर के तापमान में दीमक, सुंडी, फंगस और नेमाटोड के अंडे भुन जाते हैं। किसान इसे कुदरत का मुफ्त कीटनाशक कहते हैं। कहावत भी है - "नौतपा में खेत तपा नहीं, तो किसान साल भर पछताया"। इससे दवा का खर्च बचता है।

रोहिणी नक्षत्र का निवास समुद्र में माना गया है। कहते हैं नौतपा की गर्मी से समुद्र का पानी भाप बनकर उड़ता है और वही सावन में बादल बनकर बरसता है। इसलिए कहावत चली - "रोहिनी बरसे, मृग तपे, तो खेती करे जग"। आयुर्वेद के हिसाब से भी ये गर्मी जरूरी है। "नौतपा सह लो, साल भर निरोगी रहो" - इस दौरान दूषित पसीना निकलता है और वात-कफ बैलेंस होते हैं।

बनारस में मान्यता है कि "बाबा विश्वनाथ नौतपा में खुद तप करते हैं"। उनकी तपस्या से ही काशी और गंगा ठंडी रहती है। इसलिए यहां नौतपा को "बाबा का प्रसाद" कहते हैं। काशी का बेटा तपन से नहीं डरता, क्योंकि ये 9 दिन की तपन ही आगे राहत लाती है।

अब काम की बात - नौतपा का 9 दिनी हिसाब। बुजुर्ग कहते हैं "नौतपा की आग, खेत का वैद्य"। हर दिन की गर्मी अलग दुश्मन मारती है।

25 मई सोमवार को पहला दिन है। आज दीमक के अंडे और सफेद लट मरेंगे। खेत में मिट्टी पलटकर गहरी जुताई शुरू करो। पहले 6 इंच की परत तोड़ दो। गांव में कहते हैं - "पहले दिन हल चला, दीमक की जड़ हिला"।

26 मई मंगलवार को दूसरा दिन फफूंद और जड़ सड़न को खत्म करेगा। खेत में गोबर खाद या कम्पोस्ट फैला दो। तेज धूप में सड़कर अमृत बन जाएगी। कहावत है - "दूजे दिन खाद पड़े, फफूंदी जड़ से जले"।

27 मई बुधवार तीसरे दिन व्हाइट ग्रब और कटुआ कीट का सफाया होगा। आज मेड़बंदी मजबूत करो ताकि बारिश का एक बूंद भी बाहर न जाए। "तीजे दिन मेड़ बांधो, लट का नाम मिटाओ"।

28 मई गुरुवार चौथे दिन नेमाटोड यानी सूत्रकृमि भाप बनेंगे। खेत को यूं ही तपने दो। इसे खेती की भाषा में सॉइल सोलराइजेशन कहते हैं। "चौथे दिन खेत तपे, नेमाटोड भाप बने"।

29 मई शुक्रवार पांचवें दिन खरपतवार के बीज और मोथा भुन जाएंगे। कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाओ। ऊपर आए बीज खत्म हो जाएंगे। "पांचवें दिन खर भुने, अगली फसल दूनी उगे"।

30 मई शनिवार छठे दिन तना छेदक के प्यूपा मरेंगे। आज ट्रैक्टर, पंप और बीज सब चेक कर लो। औजार सुधार लो ताकि बुवाई में दिक्कत न हो। "छठे दिन औजार संभालो, बुवाई में ना खाओ गालो"।

31 मई रविवार सातवें दिन माहू और थ्रिप्स के अंडे खत्म होंगे। खेत में नीम खली 2 क्विंटल प्रति एकड़ भुरक दो "सातवें दिन नीम पड़े, माहू का वंश मरे"।

1 जून सोमवार आठवें दिन बैक्टीरियल विल्ट और झुलसा रोग जाएगा। पानी की नाली साफ करो। रोग को निकलने का रास्ता दो "आठवें दिन नाली खोलो, रोग को रास्ता दो"।

2 जून मंगलवार नौवें और आखिरी दिन बचे-खुचे सभी कीट मरेंगे। खेत की पूजा करो, बीज को धूप दिखाओ और मानसून का इंतजार करो। "नौवें दिन पूजा-पाठ, अच्छी फसल की आस"।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार 9 दिन में मिट्टी का तापमान 60 डिग्री से ऊपर चला जाता है। इस प्रक्रिया को सॉइल सोलराइजेशन कहते हैं। इससे अगली फसल में रोगों का प्रकोप काफी कम हो जाता है।

लेकिन 3 काम भूलकर भी मत करना। बुजुर्ग चेताते हैं - "नौतपा में पानी दिया तो खेत पपड़ी खाया", मतलब अभी सिंचाई बिल्कुल नहीं। मिट्टी कड़ी हो जाएगी। दूसरा, "रोहिनी में बोया, मृग में रोया" - बुवाई अभी मत करना, बीज 50 डिग्री में झुलस जाएगा। तीसरा, दोपहर 12 से 4 बजे तक खेत या बाहर मत निकलो। लू लग जाएगी। काम सुबह 6 से 10 और शाम 5 से 7 बजे तक करो।

शहर वालों के लिए भी सलाह है - बेल का शरबत, सत्तू, प्याज, पानी पियो। सूती सफेद कपड़े पहनो। पशु-पक्षी के लिए छांव में पानी रखो, पुण्य मिलेगा। पेड़ मत काटो, छांव घटेगी तो अगले साल और तपेगा।

किसान रामलखन आखिर में बोले - "50 साल से खेती कर रहे हैं। जिसने नौतपा का हिसाब रखा, उसकी फसल भगवान ने रखी। ये 9 दिन खेत का ऑपरेशन थियेटर हैं। फ्री में इलाज हो रहा है"

डिस्क्लेमर:नौतपा के बारे में खोजी जानकारी सिर्फ लोगो के मान्यताओं के आधार पर है इंडिया न्यूज रिपोर्ट इसकी प्रमाणिकता की पुष्टि नही करता है, सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिखी गयी है लेख इसमें प्रयोग किये गए नाम काल्पनिक है।