वाराणसी: 19 जुलाई की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जांच पूरी होने तक मुकदमे वापस न हों — अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी

जंतर-मंतर धरने की SIT से जांच और मुकदमे वापस न लेने की मांग, कहा - राष्ट्रहित से समझौता नहीं

वाराणसी: 19 जुलाई की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जांच पूरी होने तक मुकदमे वापस न हों — अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी

INDIA NEWS REPORT

"19 जुलाई की शिकायत पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जांच पूरी होने तक मुकदमे वापस न हों —"

 अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी वाराणसी, 27 जुलाई 2026- दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं भाजपा विधि प्रकोष्ठ–काशी क्षेत्र के संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने जंतर-मंतर, नई दिल्ली में CJP द्वारा आयोजित धरना-प्रदर्शन के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने से पहले संबंधित किसी भी मुकदमे को वापस न लिया जाए।

त्रिपाठी ने कहा कि राष्ट्रहित, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

19 जुलाई को ही दी थी सूचना

अधिवक्ता ने बताया कि उन्होंने 19 जुलाई 2026 को ही माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली को विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजकर इस प्रकरण की गंभीरता से अवगत कराया था। पत्र में उन्होंने धरना-प्रदर्शन की वैधानिक अनुमति, अनुमति की शर्तों का पालन, आयोजकों की भूमिका, संगठन की विधिक स्थिति, वित्तीय स्रोत और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की मांग की थी। साथ ही यदि कोई विधि-विरुद्ध गतिविधि हुई हो तो उसकी उच्चस्तरीय जांच और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में SIT गठित करने का अनुरोध भी किया गया था।

त्रिपाठी के अनुसार उपलब्ध आधिकारिक ई-मेल अभिलेखों से स्पष्ट है कि उनके प्रार्थना-पत्र पर राजनिवास स्तर पर कार्रवाई हुई। यह पत्र उपराज्यपाल सचिवालय के विभिन्न अधिकारियों से होता हुआ *Deputy Secretary (Home/Police), LG Secretariat* द्वारा दिल्ली पुलिस आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई हेतु अग्रेषित किया गया।

"समय पर कार्रवाई होती तो क्या टल सकती थीं बाद की परिस्थितियां?"

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 19 जुलाई को दी गई सूचना पर तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो क्या बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों को टाला जा सकता था। यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय होना चाहिए और इसके लिए उत्तरदायित्व तय किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

27 जुलाई को राष्ट्रपति, गृह मंत्री को भेजा दूसरा पत्र अधिवक्ता त्रिपाठी ने बताया कि *27 जुलाई 2026* को उन्होंने एक और विस्तृत प्रार्थना-पत्र माननीय राष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, दिल्ली के उपराज्यपाल, दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजा है। इसमें उन्होंने स्पष्ट अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी मुकदमे को वापस न लिया जाए।

पत्र में पूरे घटनाक्रम, संभावित हिंसा, वित्तीय सहयोग, आयोजकों की भूमिका, डिजिटल साक्ष्यों और कथित भड़काऊ भाषणों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय से उन्हें सूचना मिली है कि इस प्रार्थना-पत्र को संबंधित विभाग के मंत्री *श्री आशीष सूद* के कार्यालय को परीक्षण एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु अग्रेषित किया गया है।

"शांतिपूर्ण विरोध अधिकार है, पर कानून उल्लंघन की जांच जरूरी" त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यदि किसी स्तर पर कानून का उल्लंघन हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। जांच में दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई हो और यदि कोई अनियमितता न मिले तो उसे भी अभिलेखित किया जाए।

उन्होंने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से आग्रह किया कि उपलब्ध *वीडियो, ऑडियो एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण* कराया जाए और दोषियों के विरुद्ध विधि के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

"राष्ट्रहित सर्वोपरि है। भारत की एकता, अखंडता, सार्वजनिक शांति और कानून के शासन से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता," त्रिपाठी ने कहा।