मनुस्मृति दहन और RSS की प्रतीकात्मक ड्रेस जलाने के मामले में बड़ी कार्रवाई, दिल्ली LG सचिवालय से CP तक पहुंची शिकायत

क्या है पूरा मामला? झंडेवालान में मनुस्मृति और RSS ड्रेस जलाने का आरोप, अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने LG को भेजा प्रार्थना-पत्र, ई-मेल से खुला पूरा ट्रेल: शिकायत कैसे पहुंची CP दिल्ली तक, FIR और गिरफ्तारी की मांग, उदय भानु चिब और उदित राज के नाम का जिक्र, CCTV, वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट की फॉरेंसिक जांच की मांग, अब आगे क्या होगा? दिल्ली पुलिस करेगी साक्ष्यों का परीक्षण

मनुस्मृति दहन और RSS की प्रतीकात्मक ड्रेस जलाने के मामले में बड़ी कार्रवाई, दिल्ली LG सचिवालय से CP तक पहुंची शिकायत

नई दिल्ली/वाराणसी, 2 सितंबर 2026 दिल्ली में 30 अगस्त और 1 सितंबर को हुई दो कथित घटनाओं को लेकर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी की शिकायत पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। उपराज्यपाल सचिवालय ने शिकायत को दिल्ली पुलिस आयुक्त को अग्रेषित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिल्ली के उपराज्यपाल को प्रार्थना-पत्र देकर आरोप लगाया था कि 30 अगस्त 2026 को झंडेवालान स्थित RSS मुख्यालय के सामने मनुस्मृति की प्रतियां जलाई गईं और 1 सितंबर 2026 को RSS की प्रतीकात्मक ड्रेस जलाई गई।

शिकायत में इन घटनाओं पर FIR दर्ज करने, साक्ष्य संरक्षण और कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत का सफर: LG सचिवालय से पुलिस आयुक्त तक

ई-मेल रिकॉर्ड के अनुसार शिकायत का आधिकारिक क्रम इस प्रकार रहा:

1 सितंबर, शाम 5:04 बजे: शशांक शेखर त्रिपाठी (adshashank2@gmail.com) द्वारा Secretary LG (seclg@nic.in) को मेल।

1 सितंबर, शाम 6:06 बजे: Secretary LG ने शिकायत को OSD to Hon'ble LG को भेजा।

2 सितंबर, दोपहर 12:18 बजे: OSD to LG ने Deputy Secretary LGS को अग्रेषित किया।

2 सितंबर, दोपहर 12:28 बजे: Deputy Secretary LGS ने शिकायत को दिल्ली पुलिस आयुक्त (cpdelhi@delhipolice.gov.in) को भेज दिया।

शिकायत में मुख्य मांगें:

दोनों घटनाओं में तत्काल FIR दर्ज हो। उदय भानु चिब, उदित राज व अन्य की भूमिका की जांच हो।

CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और न्यूज चैनलों के मूल वीडियो को सुरक्षित कर फॉरेंसिक जांच हो।

जांच में कानूनी आधार मिलने पर गिरफ्तारी सहित वैधानिक कार्रवाई हो।

अब आगे क्या?

अब शिकायत दिल्ली पुलिस आयुक्त के पास पहुंच चुकी है। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेगी। यदि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है तो FIR दर्ज कर विवेचना आगे बढ़ाई जाएगी।

शिकायतकर्ता ने FIR संख्या, धाराएं और जांच अधिकारी का नाम लिखित में उपलब्ध कराने की मांग भी की है।

शिकायतकर्ता का पक्ष

शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को रोकना नहीं, बल्कि यदि विरोध के दौरान कानून का उल्लंघन हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराना है।

नोट: यह दस्तावेज केवल शिकायत के अग्रेषित होने की पुष्टि करता है। FIR दर्ज होने या गिरफ्तारी की पुष्टि इससे नहीं होती।