दूरसंचार (प्रयोक्ता पहचान) नियम, 2026 अधिसूचित, 24 अगस्त से देशभर में 9 सिम की लिमिट सख्ती से लागू
22 हजार करोड़ के साइबर फ्रॉड के बाद सरकार सख्त, लाया नया User Identification कानून
INDIA NEWS REPORT
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026
रिपोर्ट :-कुलदीप बरनवाल
केंद्र सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में फर्जीवाड़े और साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत के राजपत्र में असाधारण अधिसूचना सं. सा.का.नि. 750(अ) के जरिए दूरसंचार (प्रयोक्ता पहचान) नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से ही प्रभावी हो गए हैं।
यह अधिसूचना 21 अगस्त 2026 को जारी की गई है। इससे पहले इस नियम का ड्राफ्ट 19 सितंबर 2025 को अधिसूचना 691(अ) के द्वारा प्रकाशित कर जनता से आपत्तियाँ और सुझाव मांगे गए थे। सरकार का कहना है कि प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम नियम बनाए गए हैं।
क्या है नया नियम?
1. नया नाम और पहचान: अब इन्हें आधिकारिक तौर पर दूरसंचार (प्रयोक्ता पहचान) नियम, 2026 कहा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य मोबाइल नंबर के असली मालिक की पहचान पक्की करना है।
2. MNV प्लेटफॉर्म: सरकार एक Mobile Number Validation (MNV) प्लेटफॉर्म बना रही है। इसके जरिए बैंक, फिनटेक, बीमा कंपनियां और दूसरी संस्थाएं जो मोबाइल नंबर से ग्राहक की पहचान करती हैं, वो सीधे टेलीकॉम कंपनियों से वेरीफाई कर सकेंगी कि नंबर वाकई उसी व्यक्ति का है या नहीं।
3. 9 सिम की सीमा सख्त: DoT ने अलग सर्कुलर में सभी टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया है कि 24 अगस्त, 2026 से किसी भी एक व्यक्ति को 9 से ज्यादा सिम न दिया जाए। जम्मू-कश्मीर, असम और नॉर्थ-ईस्ट में यह सीमा 6 सिम की होगी। कंपनियों को इसके लिए तकनीकी जांच करनी होगी और ग्राहक से पहले से मौजूद सिमों का घोषणा-पत्र (Declaration) लेना होगा। DoT के Digital Intelligence Platform (DIP) पर पहले से ही 9 से ज्यादा सिम रखने वालों की फोटो उपलब्ध कराई जाएगी।
4. TIUE की नई परिभाषा: नियम में Telecom Identifier User Entity (TIUE) नाम की नई श्रेणी बनाई गई है। इसमें वो सभी कंपनियां आएंगी जो सर्विस देने के लिए मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करती हैं, जैसे - WhatsApp, PhonePe, Paytm, Zomato, Swiggy, Ola-Uber जैसी ऐप्स।
5. सेकेंड हैंड फोन की जांच: चोरी और क्लोन IMEI वाले फोन की बिक्री रोकने के लिए अब सेकेंड हैंड या रीफर्बिश्ड फोन बेचने वालों को हर फोन का IMEI सेंट्रल ब्लैकलिस्ट डेटाबेस में चेक करना अनिवार्य होगा।
सरकार के मुताबिक 2023 में जहां साइबर फ्रॉड से 7,465 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 22,845 करोड़ रुपये हो गया है। इसी को देखते हुए ये नए नियम लाए गए हैं। टेलीकॉम कंपनियों के लिए इस प्लेटफॉर्म से जुड़ना अनिवार्य होगा, जबकि बाकी कंपनियों के लिए यह फिलहाल स्वैच्छिक होगा।


