"ग्राहक बनकर वेश्यालय जाना अपराध नहीं" - हाईकोर्ट ने रद्द की आरोपी के खिलाफ कार्यवाही
हाईकोर्ट ने कहा- कानून में सिर्फ "व्यावसायिक शोषण" अपराध है, ग्राहक पर मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग- कौस्तुभ त्रिपाठी (एड0 इलाहाबाद उच्च न्यायालय)
INDIA NEWS REPORT
कौस्तुभ त्रिपाठी (एड0 इलाहाबाद उच्च न्यायालय)
प्रयागराज, 20 अगस्त 2026 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाना अपने आप में अपराध नहीं है। सेवाएं लेकर कीमत अदा करने वाले व्यक्ति पर अनैतिक देह व्यापार विरोधी कानून के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी कीके एकल पीठ ने इस टिप्पणी के साथ गाजियाबाद के एक आरोपी के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
क्या है पूरा मामला- गाजियाबाद के भोजपुरा चौराहे के पास डीएलएफ पुलिस चौकी के पास एक मकान में देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा था। मौके से महिलाओं और 7 पुरुषों समेत कुल 16 लोग पकड़े गए थे। इनमें याची भी शामिल था।
आरोप था कि वहां मौजूद महिलाएं देह व्यापार में शामिल थीं और अपनी कमाई का एक हिस्सा मकान मालिक को देती थीं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भी _अनैतिक देह व्यापार विरोधी अधिनियम_ के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को ट्रायल का सामना करने के लिए तलब किया था।
हाईकोर्ट में क्या दलील दी गई- याची ने हाईकोर्ट में कहा कि वह वहां केवल ग्राहक के रूप में गया था। उसके खिलाफ वेश्यालय चलाने, उसका प्रबंधन करने या देह व्यापार के व्यावसायिक शोषण में शामिल होने का कोई आरोप या साक्ष्य मौजूद नहीं है।
कोर्ट ने क्या कहा?- हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि आरोपी की भूमिका महज ग्राहक की थी।
कोर्ट ने कहा: -
- 1. कानून का मकसद: अनैतिक देह व्यापार विरोधी कानून में अपराध के लिए "व्यावसायिक शोषण" से जुड़ा तत्व होना जरूरी है।
- 2. न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग: ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
इन्हीं आधारों पर कोर्ट ने याची की याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही, आरोपपत्र और समन आदेश को निरस्त कर दिया।


