Draft Advocates Bill 2026 पर व्यापक संवाद जरूरी: शशांक शेखर त्रिपाठी
बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने केंद्रीय विधि मंत्री को लिखा पत्र, कहा - अधिवक्ताओं की गरिमा और स्वायत्तता से कोई समझौता न हो
INDIA NEWS REPORT
वाराणसी, 27 जुलाई 2026। दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं भाजपा विधि प्रकोष्ठ काशी क्षेत्र के संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने Draft Advocates (Amendment) Bill, 2026 पर चिंता जताते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले देशभर के अधिवक्ताओं और बार संस्थाओं से व्यापक संवाद किया जाए।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि विधि व्यवसाय में पारदर्शिता और सुधार का स्वागत है, लेकिन अधिवक्ता सिर्फ एक पेशेवर वर्ग नहीं बल्कि न्यायपालिका के अभिन्न अंग हैं।
संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में अधिवक्ताओं की भूमिका को देखते हुए उनसे जुड़े किसी भी संशोधन से पहले सभी पक्षों से चर्चा आवश्यक है।
उन्होंने पत्र में कहा कि प्रस्तावित विधेयक में नामांकन शुल्क में अत्यधिक वृद्धि, अनुशासनात्मक शक्तियों के विस्तार और अन्य नियामकीय प्रावधानों को लेकर अधिवक्ता समुदाय में असंतोष है। उनके मुताबिक सुधार ऐसे होने चाहिए जो अधिवक्ताओं की गरिमा, स्वतंत्रता और पेशेवर स्वायत्तता को बनाए रखते हुए न्याय व्यवस्था को मजबूत करें।
शांक शेखर त्रिपाठी ने आग्रह किया कि विधेयक को अंतिम रूप देने से पूर्व बार काउंसिल ऑफ इंडिया, सभी राज्य बार काउंसिलों, बार एसोसिएशनों, वरिष्ठ-युवा अधिवक्ताओं और विधि विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाएं। इससे अधिनियम अधिक व्यावहारिक, न्यायसंगत और सर्वस्वीकार्य बन सकेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार अधिवक्ता समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए संतुलित और सर्वहितकारी निर्णय लेगी।


