उत्तर प्रदेश में डेंगू के साथ चिकनगुनिया का कहर प्रयागराज, सहारनपुर, कानपुर में मरीजों की संख्या ने शतक पार किया
उत्तर प्रदेश में डेंगू,चिकनगुनिया का कहर पीड़ितों की संख्या के सरकारी आंकड़ों के अनुसार वाराणसी चौथे नंबर पर लेकिन स्तिथि है गंभीर:जगदीश शुक्ला
जगदीश शुक्ला
यूपी में डेंगू के अलावा चिकनगुनिया कहर बरपा रहा है। पहले नंबर पर प्रयागराज (196 मामले), दूसरे नंबर पर सहारनपुर (112 मामले) और तीसरे नंबर पर कानपुर (110 मामले) है।
पीड़ितों की संख्या के मामले में बनारस का प्रदेश में चौथा स्थान है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों अनुसार यहां बीमारी के कुल 70 मामले सामने आए हैं। पिछले छह वर्षों में इस बार केस सबसे ज्यादा हैं।
ये सब सरकारी आंकड़ों के रूप में बताया गया है लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों ,जिला व मंडलीय अस्पताल का आंकड़ा देखा जाये तो भी स्तिथि स्प्ष्ट नही हो पायेगी क्योंकि तब भी निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, चिकित्सको से आंकड़े लेना मुमकिन ही नही है वाराणसी में हर घर मे लगभग बीमारी ने अपना घर बना लिया है।
वाराणसी में बीते दो वर्षों में चिकनगुनिया का एक भी मरीज नहीं मिला था। इससे पहले वर्ष 2018 में सबसे अधिक चार मरीज मिले थे। इस समय शासकीय अस्पतालों की ओपीडी में प्रतिदिन दो हजार से अधिक बुखार के मरीज परामर्श के लिए आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें में से आधे से ज्यादा मरीजों में चिकनगुनिया के लक्षण हैं। हालांकि सरकारी आंकड़ें में चिकनगुनिया के 70 मरीज हैं, लेकिन निजी अस्पतालों और क्लीनिक की संख्या जोड़ दी जाएं तो यह अधिक हो जाएगी। यह स्थिति तब है जब स्वास्थ्य विभाग की सीमित ने जिले में जांच की है। अगर जांच का दायरा बढ़ता तो इसकी संख्या और ज्यादा होती।
6.20 फीसदी है डेंगू का संक्रमण दर
जिला मलेरिया अधिकारी शरतचंद्र पांडेय ने बताया कि जिले में अब तक डेंगू के 288 मरीज मिल चुके हैं। इस समय डेंगू का संक्रमण दर 6.20 फीसदी है। यानी हर सौ सैंपल में 6 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ रही है। हालांकि पिछले साल से अभी डेंगू के मरीज कम है। पिछले साल 562 मरीज मिले थे।
लंबे समय बाद बढ़े हैं चिकनगुनिया के मरीज
बीएचूय के मेडिसिन विभाग के प्रो. धीरज किशोर ने चिकनगुनिया के मरीज पहले भी मिलते थे, लेकिन इस बार संख्या कुछ ज्यादा है। उन्होंने कहा कि बीमारी से ग्रस्त होने पर मरीज को शरीर में दर्द के साथ लाल चकत्ते पड़ना, चक्कर आना, बीपी कम होने जैसी शिकायतें भी आ रही है। बुखार उतरने के बाद भी तीन से चार सप्ताह तक जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द हो रहा है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. पीके सिंह ने बताया कि जोड़ों में दर्द होने पर गर्म पानी से सिकाई करें।
वायरस में हो रहा म्यूटेशन
नई दिल्ली स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर सेंटर फॉर बायोमिडकल रिसर्च के निदेशक एवं बीएचयू के मॉलिक्यूलर विभाग के प्रो. सुनीत सिंह ने बताया कि वायरस में म्यूटेशन हो रहा है। पहले चिकनगुनिया एल्बोपिक्टस मच्छर से होता था। लेकिन म्यूटेशन के कारण डेंगू के लिए कारक माने जाने वाले मच्छर एडीज एजिप्टाआई मच्छर से चिकनगुनिया हो रहा है। इसका एक साइकिल होता है। हर तीन या चार साल में मौसम में बदलाव के कारण चिकनगुनिया या डेंगू का असर ज्यादा होता है।
बुखार ने की अटेंडेंस आधी, शिक्षक बीमार
वाराणसी। जिले के बेसिक और निजी स्कूलों में पढ़ाई की रफ्तार इन दिनों धीमी है। कारण रहस्यमयी बुखार है। इससे स्कूलों में उपस्थिति 40 से 50 फीसदी तक कम हुई है। शिक्षक भी बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं।
जिले के 1134 परिषदीय स्कूलों में लगभग 2.5 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। 1100 मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी बच्चों की संख्या लगभग एक लाख है। जिले के परिषदीय और निजी स्कूलों में बच्चों की कुल संख्या 4.5 लाख से ऊपर है। स्कूलों में इन दिनों घटकर 60 फीसदी तक पहुंच गई है। जिले में फैले डेंगू, चिकनगुनिया के अलावा रहस्यमयी बुखार से काफी बच्चे पीड़ित हैं। सीडीओ के ‘बुलावा अभियान’ में 85 फीसदी उपस्थिति वाले वर्ग में रहे एक परिषदीय स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल में हर दिन बच्चों की संख्या गिर रही है।
सिनोबियल सेल पर असर होने से होता है दर्द
प्रो. सुनीत सिंह ने बताया कि चिकनगुनिया का वायरस जोड़ों में पाए जाने वाले सिनोबियल सेल को प्रभावित करते हैं। जिससे सूजन होता है। वायरस की संख्या धीरे-धीरे जोड़ों में बढ़ने लगती है। जिसके कारण दर्द शुरू हो जाता है। इसे कम होने समय लगता है।
होम्योपैथिक दवाओं के उपायोग की सलाह
जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. रचना श्रीवास्तव का दावा है कि बदन दर्द, उल्टी, कमजोरी होने पर रसटक्स 200, यूपेटोरियम पर्फ 200, पल्सेटिला-200, आर्निका-200 जैसे दवाओं के अच्छे परिणाम आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जोड़ों में दर्द के लिए रसटक्स, रूटा, ग्वायकम का उपयोग करना चाहिए।
464 घरों में मिला लार्वा
घर-घर दस्तक अभियान के दौरान 1136 स्थानों पर मच्छरों के स्रोत नष्ट किए गए, जबकि जिसमें 464 घरों में डेंगू का लार्वा मिला। 1086 व्यक्तियों में बुखार के लक्षण पाए गए।
महिला डॉक्टर की मौत, डेंगू की आशंका
बुखार से पीड़ित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजना गुप्ता का शुक्रवार को निधन हो गया है। परिजनों का कहना है कि उनकी मौत डेंगू से हुई है। जबकि स्वास्थ्य विभाग ने इससे इनकार किया है। मैदागिन स्थित मेडविन अस्पताल के निदेशक डॉ मनमोहन श्याम की पत्नी डॉ0 अंजना गुप्ता कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। उन्हें गंभीर अवस्था में बीएचयू में भर्ती कराया गया था। जहां शुक्रवार को उनकी मौत हो गई है। उधर जांच में डेंगू के पांच नए रोग मिले। सामने घाट, नई बस्ती पांडेयपुर, लेढूपुर में एक-एक और रामनगर में दो लोग शामिल हैं।
जोड़ों में दर्द के लिए आयुर्वेदिक काढ़ा पीएं
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रजनीश कुमार यादव का दावा है कि तेज बुखार में आयुष 64, महामृत्युंजय रस, महाजवारंकुश रस गिलोय स्वरस के साथ, त्रिभुवनकीर्ति रस महासुदर्शन चूर्ण उपयोगी है। प्लेटलेट कम होने पर पपीते की पत्ती का रस, छोटी इलायची, नारियल पानी, कीवी, पेय पदार्थों का प्रयोग ज्यादा करे।


