वाराणसी में जाने कहाँ दहन होगा सबसे बड़ा रावण, तीन पीढ़ियों से मुस्लिम परिवार बना रहा पुतला
दशहरा पर्व :शारदीय नवरात्र के 10 वे दिन किया जाता है रावण का दहन,बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है रावण का पुतला दहन ,जाने वाराणसी में कहाँ होता है पूर्वांचल का सबसे बड़ा रावण का पुतला दहन :जयचन्द की रिपोर्ट
जयचन्द
वाराणसी सहित पूरे देश में दशहरा के अवसर पर रावण दहन को लेकर तैयारी जोर-जोर से चल रही है।कई दशकों से वाराणसी के बीएलडब्लू में पूर्वांचल का सबसे बड़ा रावण ,कुंभकरण और मेघनाद का पुतला दहन किया जाता है। इस दौरान लाखों की संख्या में लोग बीएलडब्लू के मैदान में इस दृश्य को देखने के लिए उमड़ते हैं।
वाराणसी में दशहरा पर दहन होने वाले रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले को शमशाद खान और उनके परिवार द्वारा तैयार किया जाता है जो पिछले तीन पीढ़ियों से बीएलडब्लू मैदान के लिए पुतला बनाते आ रहे हैं।
75 फुट के रावण के पुतले का किया जाएगा दहन
शमसाद खान ने बातचीत में बताया, ''हमारे परिवार के सदस्य पिछले तीन पीढ़ियों से बीएलडब्लू सहित अन्य जगहों के लिए पुतला बनाते हैं। हमारे नाना ने सबसे पहले इसको बनाने का काम शुरू किया था और इस बार भी विजयादशमी के लिए हम इन तीनों पात्रों का पुतला बना रहे हैं। जिसमें रावण का 75 फीट, कुंभकरण का 70 फीट और मेघनाद के पुतले के लिए 65 फीट की ऊंचाई निर्धारित है।
बीएलडब्लू में पूर्वांचल का सबसे बड़ा रावण, कुंभकरण और मेघनाद का पुतला रखा जाता है जिसके दहन को देखने के लिए लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।"
प्रभु राम के व्यक्तित्व से प्रभावित हैं शमशाद
रावण सहित अन्य पात्रों का पुतला बना रहे शमशाद ने कहा कि ''विजयदशमी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और हम सभी यह मानते हैं कि समाज से कई बुराइयों को दूर करने की आवश्यकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम सभी प्रभु श्री राम के व्यक्तित्व का अनुसरण करें, उनके बताए हुए मार्गों पर चलने का प्रयास करें।''


