संघर्ष समिति के बैनर तले बनारस के बिजलकर्मियो ने निजीकरण के विरुद्ध और बिजलकर्मियो के यहां राज्य सरकार के साथ संघर्ष समिति के समझौते के विपरीत स्मार्ट मीटर लगाने का जमकर किया विरोध
संघर्ष समिति ने कहा कि जब निजीकरण का कोई प्रस्ताव ही नही था फिर निजीकरण के नाम पर ही निदेशक वित्त के पद पर विवादित निधि नारंग को तीन बार सेवा विस्तार देकर पावर कारपोरेशन क्यों लगाता रहा चूना ?-संघर्ष समिति
INDIA NEWS REPORT
जयचन्द
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के नाम पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलनरत बिजली कर्मियों पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने इस 13 माह में अनेक प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की और ऊर्जा निगमों का कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया। इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है ?तत्काल समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहिया हो वापस।
वाराणसी-26दिसम्बर 2025- संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले आज भी बनारस के समस्त बिजलकर्मियो ने सिगरा स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर बिजली के निजीकरण और बिजलकर्मियो के यहां स्मार्ट मीटर लगाने का जमकर विरोध करते हुये कहा कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन द्वारा 25 नवंबर, 2024 को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का एकतरफा ऐलान करने के बाद से ही लगातार 13 माह से बिजली कर्मी आंदोलनरत है। अब ठीक 13 माह के बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री माननीय श्री अरविंद कुमार शर्मा जी ने 24 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश विधानसभा में वक्तव्य दिया है कि निजीकरण का कोई निर्णय नहीं है।
वक्ताओ ने कहा कि सवाल यह है कि जब निजीकरण का कोई निर्णय ही नहीं था तो पावर कारपोरेशन के चेयरमैन ने निजीकरण का ऐलान क्यों किया ? निजीकरण के नाम पर अवैध ढंग से ट्रांजैक्शन कंसलटेंट ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति की गई। इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए खर्च हुए । इसी कंसल्टेंट द्वारा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट तैयार कराया गया । पॉवर कॉरपोरेशन ने इसी आरएफपी डॉक्यूमेंट को विद्युत नियामक आयोग को भेजा जिस पर विद्युत नियामक आयोग ने आपत्ति दर्ज करके वापस कर दिया ।
वक्ताओ ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के नाम पर ही निदेशक वित्त के पद पर विवादित निधि नारंग को तीन बार सेवा विस्तार दिया गया और पावर कारपोरेशन को चूना लगता रहा साथ ही संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के नाम पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलनरत बिजली कर्मियों पर पावर कार्पोरेशन प्रबंधन ने इस 13 माह में अनेक प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां की और ऊर्जा निगमों का कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगाड़ दिया। इन सबके लिए कौन जिम्मेदार है ?
वक्ताओ ने बताया कि अब समय आ गया है जब पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को इसे स्वीकार कर लेना चाहिए कि जब निजीकरण का कोई निर्णय नहीं है तो निजीकरण की सारी प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और निजीकरण के नाम पर शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे बिजली कर्मियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाय।माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा उत्तर प्रदेश विधानसभा में दिया गया यह वक्तव्य इतना महत्वपूर्ण है कि देश के सबसे प्रमुख अखबार इकनॉमिक टाइम्स और टाइम्स आफ इंडिया ने इसे मुख पृष्ठ पर छापा। देश की सबसे बड़ी न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इसे देश भर में प्रसारित किया और देश के कई अन्य बड़े समाचार पत्रों ने इस समाचार को प्रमुखता से छापा।
सभा को सर्वश्री ई0मायाशंकर तिवारी,राजेन्द्र ,ई0 अवधेश मिश्रा,सिंह,संदीप कुमार, राजेश सिंह,अजय मौर्य,जे0पी0एन0 सिंह,जमुना पाल, अशोक कुमार,मनोज जैसवाल आदि ने संबोधित किया।


