आखिर क्यों लगता है ?स्थानों के आगे -बाद,पुर और गंज जाने रहस्य
आइये जानते है कुछ रोचक तथ्य स्थानों और जगहों के नाम के आगे "पुर", "बाद", "गंज आखिर क्यों लगता है :अनुराग पांडेय व जगदीश शुक्ला की विशेष रिपोर्ट
INDIA NEWS REPORT
अनुराग पांडेय/जगदीश शुक्ला
कानपुर, नागपुर, उदयपुर, जयपुर, जोधपुर, जबलपुर,रायपुर यह सारे हमारे देश के बड़े शहरों के नाम है इसमें एक चीज कॉमन है "पुर" अभी रुकिए एक और लिस्ट बताता हूं आपको इलाहाबाद, गाजियाबाद, हैदराबाद,फरुखाबाद, मुरादाबाद, अहमदाबाद, फिरोजाबाद इन शहरों के नामों में भी आपको एक चीज कॉमन मिलेगी यह चीज है बाद या आबाद जैसे अहमद+आबाद =अहमदाबाद ,इलाह+आबाद =इलाहाबाद आदि ऐसे सैकड़ों शहर हैं जिनमें इन दोनों सफिक्स या प्रत्यय का इस्तेमाल आप ने नोटिस किया होगा लेकिन क्या आपको इन दोनों का ही मतलब पता है आज हम आप सभी के लेकर आये हैं एक ऐसा लेख जो आपने शायद ना सुना होगा ना पढा होगा मैं आपको इन दोनों शब्दों या दोनों सफिक्स (प्रत्यय) का मतलब तो बताऊंगा ही साथ ही एक और शब्द का मतलब बताऊंगा लेख के अंत में जो आपके लिए एक सरप्राइज फैक्ट होगा या यूं समझ लीजिए कि एक बोनस फैक्ट होगा।
इस लेख को आप पूरा पढियेगा और बीच मे मत छोड़ियेगा क्योंकि अपना इतिहास नही जानेंगे तो खुद को कैसे पहचानेंगें।
तो अब लेख की और जानकारी को शुरू करते हैं।
अपने पहले वर्ड से यानी कि "पुर" से पुर दरअसल एक संस्कृत शब्द है जिसका मतलब होता है किला इस शब्द का जिक्र हमें मिलता है ऋगवेद से जिसे भारत का सबसे प्राचीन ग्रंथ माना जाता है ऋग्वेद में पुर शब्द उन जगहों के लिए इस्तेमाल होता था जो या तो कोई शहर थे या फिर कोई किला अब सोचिए कि यह शब्द कितना पुराना है ऋग्वेद को माना जाता है कि करीब 1500 ईसा पूर्व का ग्रंथ है ये यानी कि आज से करीब 3500 साल पुराना ग्रंथ। आगे चलकर हमारे देश के कई शहरों का नाम ऐसे ही पड़ गया प्राचीन काल में ऐसे कई शहर थे जिनके नाम में पुर लिखा होता था उदाहरण के लिए महाभारत काल में हस्तिनापुर इस शहर में पुर शब्द का इस्तेमाल किया गया था अब समय भले ही बीत गया हो लेकिन यह परंपरा आज भी इसका पालन हो रहा है।
इसी कड़ी में आगे जब हम मिडिवल इंडिया में देखते हैं तो जब किसी राजा को कोई शहर बसाना होता था तो अपने नाम के आगे अक्सर पुर लगा देते थे जैसे राजस्थान के जयपुर को राजा जयसिंह ने बसाया तो उसका नाम पड़ा जयपुर, कानपुर का नाम भी ऐसे ही सचेंदी के राजा हिंदू सिंह ने कानपुर रखा था क्योंकि वह खुद को भगवान कृष्ण यानी कान्हा का वंशज मानते थे तो दोस्तों अब आपको पता चल गया होगा कि पुर शब्द का इस्तेमाल कैसे शुरू हुआ और हमारे शहरों में कैसे आया अगर आपके शहर के नाम में भी पुर सफिक्स आता है।
अब आते हैं दोस्तों इस सवाल पर कि शहरों के नाम के पीछे आबाद क्यों लगा होता है जैसे कि इलाहाबाद मुरादाबाद, फरुखाबाद, हैदराबाद वगैरह वगैरह यहां तक कि पाकिस्तान में इस्लामाबाद और बांग्लादेश में जलालाबाद भी है तो दोस्तों आपको बताऊं कि दरअसल इन शहरों के पीछे जो आबाद लिखा होता है वह असल में एक फारसी वर्ड है इस वर्ड में आब का मतलब होता है पानी अगर इस पूरे वर्ड का मतलब निकाला जाए तो इसका मतलब होता था एक ऐसी जगह जहां पर आसपास पानी मौजूद हो इस पानी की मौजूदगी से फसल उगाई जा सके यानी खेती की जा सके तो इसका मतलब यह हुआ कि ये जगह रहने लायक हो उदाहरण के लिए मुरादाबाद शहर रामगंगा नदी के किनारे पड़ता है इसलिए इसके नाम में आबाद लिखा मिलता है गंगा नदी के किनारे बसे इलाहाबाद के नाम में भी इसीलिए आबाद शब्द का या आबाद सफिक्स का इस्तेमाल होता था हालांकि इतिहासकार ये भी कहते हैं कि मुगल काल में बादशाहों ने अपने नाम के साथ शहरों का नाम रखना शुरू कर दिया और इस नाम के पीछे भी आबाद लगाना शुरू शुरू कर दिया इससे एक तरफ जहां वहां के लोगों को जगह के नाम को लेकर नई पहचान मिल जाती थी वहीं मुगल छाप भी उस जगह पर रह जाती थी अगर इसका उदाहरण देखना है तो यूपी में एक जिला है फिरोजाबाद यह जो शहर है यह फिरोज शाह के नाम पर इसका नाम रखा गया था।
अब आते हैं बोनस फैक्ट पर जिसकी हमने शुरुआत में बात की थी अपने कई शहरों या कस्बों के नाम में एक और सफिक्स देखा होगा गंज जैसे कि लखनऊ में पड़ता है हजरतगंज दिल्ली में पड़ता है दरियागंज मलकागंज वगैरह वगैरह लेकिन क्या आपको पता है कि इन नामों में भी गंज जो लिखा होता है उसका मतलब क्या होता है तो दोस्तों गंज शब्द के ओरिजिन की अगर बात करें तो इंडो ईरानियन लैंग्वेज के ग्रुप में मीडियन लैंग्वेज एक आती थी उस समय में इस शब्द को लेकिन क्या आपको पता है कि इन नामों में भी गंज जो लिखा होता है उसका मतलब क्या होता है तो दोस्तों गंज लैंग्वेज एक पुरानी मीडियन भाषा में आती थी और उसके पूर्व भी संस्कृत के माध्यम से आया हुआ शब्द "गञ्ज:' है जिसका अर्थ है भंडार, रत्न कोष, अन्न कोष। तत्कालीन समय में इस शब्द को खजाना रखने वाली जगह के लिए इस्तेमाल किया जाता था फिर जैसे-जैसे टाइम बदलता गया इस वर्ड को और भी जगहों पर यूज किया जाने लगा वैसे दोस्तों संस्कृत में भी गज्ज शब्द का जिक्र मिलता है।
गंज शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर हिंदी में दो मत हैं। एक के अनुसार यह शब्द भारत-ईरानी परिवार की पुरानी मीडियन भाषा का है और फ़ारसी के माध्यम से हिंदी तक पहुंचा है। दूसरे मत के अनुसार यह हिंदी का ही संस्कृत के माध्यम से आया हुआ शब्द "गञ्ज:' है जिसका अर्थ है भंडार, रत्न कोष, अन्न कोष।
माना जाता है कि यह शब्द संस्कृत के गञ्ज: शब्द से निकला है और फिर आगे चलकर इस वर्ड के और भी नए-नए मतलब बनते चले गए इस दौरान इस शब्द का इस्तेमाल मंडी और बाजार वाली जगहों के लिए किया जाने लगा जहां खूब भीड़भाड़ हो और शोर शराब आदी पुराने समय में जिन जगहों पर बाजार लगते थे उस स्थान को फिर गंज कहा जाने लगा उदाहरण के लिए दिल्ली के दरियागंज में पहले दरिया के किनारे यानी यमुना नदी के किनारे बाजार लगता था में इसे दरियागंज कहा जाने लगा ठीक ऐसे ही दिल्ली में एक और बाजार है सदर बाजार यहां पर एक जगह पड़ती है डिप्टी गंज आज भी यहां पर बर्तनों का बाजार लगता है इस तरह कस्बों में गंज जुड़ा हुआ है वाराणसी में विशेश्वरगंज, से या फिर भीड़भाड़ वाले इलाके से जहां पर बहुत ज्यादा शोर होता हो या फिर बहुत भीड़भाड़ होती हो तो दोस्तों यह था शहरों में पुर और आबाद के लगाने का मतलब और गंज कस्बों और शहरों के नाम में क्यों लगता है यह भी हमने आपको बताया
हमरा आपको ये लेख कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताइये काफी अध्ययन व शोध करने के बाद हम और हमारी टीम ने यह लेख लिखा है।


