शशांक शेखर त्रिपाठी,अधिवक्ता एवं संयोजक, भारतीय जनता पार्टी, विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के महत्वपूर्ण सुझाव को निर्वाचन आयोग ने लिया संज्ञान

फर्जी मतदान रोकने हेतु चेहरे के मिलान की मांग पर भारत निर्वाचन आयोग ने लिया संज्ञान :डेस्क

शशांक शेखर त्रिपाठी,अधिवक्ता एवं संयोजक, भारतीय जनता पार्टी, विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के महत्वपूर्ण सुझाव को निर्वाचन आयोग ने लिया संज्ञान

INDIA NEWS REPORT:DESK

 वाराणसी: भारतीय जनता पार्टी, विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग को भेजे गए एक महत्वपूर्ण सुझाव पर आयोग ने संज्ञान लिया है।

शशांक शेखर त्रिपाठी ने आगामी बिहार विधानसभा चुनावों सहित सभी चुनावों में फर्जी मतदान (Bogus Voting) को रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर मतदाता की पहचान उनके वोटर आईडी या आधार कार्ड में लगी फोटो से चेहरे का प्रत्यक्ष मिलान करके सुनिश्चित करने की मांग की थी।

इस महत्वपूर्ण सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए, भारत निर्वाचन आयोग ने ई-मेल के माध्यम से शशांक शेखर त्रिपाठी को सूचित किया है कि "आपके बहुमूल्य सुझावों को आयोग द्वारा नोट कर लिया गया है" (Your valuable Suggestions have been noted by ECI)।

श्री त्रिपाठी ने अपने पत्र में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और निर्वाचन नियमावली, 1961 का हवाला देते हुए कहा था कि एक पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना आयोग का संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने विशेष रूप से पर्दानशीं या बुर्कानशीं महिलाओं की पहचान के लिए एक महिला मतदान अधिकारी द्वारा चेहरा देखकर सत्यापन करने का प्रस्ताव दिया था, ताकि धार्मिक आस्थाओं का सम्मान करते हुए चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनी रहे।

इस सकारात्मक प्रतिक्रिया पर श्री शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा, "यह हर्ष का विषय है कि चुनाव आयोग ने हमारे सुझाव को गंभीरता से लिया है। हमारा उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना है, ताकि प्रत्येक सही मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके और कोई भी व्यक्ति फर्जी तरीके से लोकतंत्र के इस महापर्व को दूषित न कर सके। चेहरे के मिलान की व्यवस्था लागू होने से लोकतंत्र में जनता का विश्वास और भी सुदृढ़ होगा।"

निर्वाचन आयोग द्वारा इस सुझाव को संज्ञान में लेना चुनावी सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में होने वाले चुनावों में फर्जी मतदान पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।