बनारस के बिजलिकर्मियो ने विभिन्न कार्यालयो पर बिजली के निजीकरण का जमकर विरोध किया।

निजीकरण के बाद एकाधिकार (monopoly) बन जाने पर सेवा में लापरवाही ,खराब रखरखाव ,उपभोक्ता शिकायतों पर ध्यान न देना जैसी समस्याएँ उभोक्ता झेलने को होंगे मजबूर :जयचन्द की रिपोर्ट

बनारस के बिजलिकर्मियो ने विभिन्न कार्यालयो पर बिजली के निजीकरण का जमकर विरोध किया।
निजीकरण का विरोध
बनारस के बिजलिकर्मियो ने विभिन्न कार्यालयो पर बिजली के निजीकरण का जमकर विरोध किया।

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द

वाराणसी-04अक्टूबर। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले आज बनारस के बिजलिकर्मियो ने विभिन्न कार्यालयो पर बिजली के निजीकरण का जमकर विरोध किया।

वक्ताओ ने बताया कि सरकारी संस्थाएँ आम तौर पर “सेवा” को प्राथमिकता देती हैं, जबकि निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना होता है जिसके परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं से निजी कम्पनियां अधिक बिजली दर वसूलेंगी जिससे गरीब या ग्रामीण उपभोक्ताओं को वापस लालटेन युग मे जाना पड़ जायेगा साथ ही एकमुश्त समाधान योजना या आसान क़िस्त योजना जो आम उपभोक्ताओं के लिए सरकारी विभाग समय समय पर लाता रहता है वो योजनाएँ खत्म हो जाएगी ।

वक्ताओ ने बताया कि निजीकरण के पश्चात सब्सिडी कम या समाप्त हो सकती है जिससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की उपेक्षा सरकारी कंपनियाँ सामाजिक दायित्व निभाने के लिए दूर-दराज़ इलाकों में भी सेवाएँ देती हैं, लेकिन निजी कंपनियाँ केवल लाभ वाले क्षेत्रों में निवेश करना पसंद करती हैं जिससे ग्रामीण या पहाड़ी इलाकों में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

वक्ताओ ने बताया कि सेवा गुणवत्ता में असमानता जिसके तहत शुरुआत में निजी कंपनियाँ अच्छी सेवा देती हैं ताकि छवि बने,लेकिन बाद में एकाधिकार (monopoly) बन जाने पर सेवा में लापरवाही खराब रखरखाव उपभोक्ता शिकायतों पर ध्यान न देना जैसी समस्याएँ उत्पन्न होंगी।

वक्ताओ ने बताया कि नियंत्रण और पारदर्शिता की कमी जिसके तहत सरकारी कंपनियाँ जनता और संसद के प्रति जवाबदेह होती हैं,जबकि निजी कंपनियों में पारदर्शिता कम होती है। इससे भ्रष्टाचार, मनमानी दरें और अनुचित अनुबंध जैसे खतरे बढ़ते हैं। कर्मचारियों की छँटनी ठेका प्रणाली वेतन और लाभों में कटौती देखी जाती है, जिसका असर अप्रत्यक्ष रूप से सेवा गुणवत्ता और उपभोक्ता अनुभव पर पड़ता है।सरकारी क्षेत्र दीर्घकालिक निवेश (जैसे नवीकरणीय ऊर्जा या पर्यावरण संरक्षण) पर ध्यान देता है, जबकि निजी कंपनियाँ त्वरित मुनाफ़े के लिए इन बातों की उपेक्षा करती हैं।

सभा को सर्वश्री अंकुर पाण्डेय,अभिषेक सिंह,अभिषेक शुक्ला,बृजेश कुमार,प्रवीण कुमार, ब्रिज सोनकर,अनुराग, अरुण कुमार, रमेश कुमार,धनपाल सिंह, बृजेश यादव,योगेंद्र कुमार, आदि ने संबोधित किया।