एक्शन में नीतीश : अचानक जदयू दफ्तर पहुंचे, बोले- वीडियो कॉल लगाइए उनको... ललन बाबू किधर हैं
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी दलों की मुंबई में होने वाली बैठक और लोकसभा चुनावों से पहले शुक्रवार को एक्शन में नजर आए। वह सुबह बिना सूचना दिए ही जदयू के कार्यालय पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने पदाधिकारियों के दफ्तर में मौजूद नहीं रहने को लेकर सवाल किए। सीएम के सवालों से सब हैरान थे।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार औचक निरीक्षण के अंदाज में शुक्रवार की सुबह जदयू दफ्तर पहुंच गए। साढ़े ग्यारह बजे वह जदयू दफ्तर पहुंचे। उनके आने की कोई सूचना नहीं थी।
पार्टी के पदाधिकारी जदयू दफ्तर में किस तरह से सक्रिय हैं इसका भी हाल भी मुख्यमंत्री ने अपने अंदाज में ही लिया।
प्रदेश अध्यक्ष सामने आए तो पूछा कि आप अपने चैंबर में क्यों नहीं थे
औचक निरीक्षण के क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने जब जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा सामने आए तो उनसे मुख्यमंत्री ने पूछा आप कहां थे? आप तो चैंबर में थे नहीं?
इस पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि वह अपने चैंबर में ही बैठे थे। आपके आने की खबर सुनी तो गेट पर रिसीव करने आ गए थे। उनके साथ भगवान सिंह कुशवाहा और संतोष कुशवाहा भी थे।
संजय गांधी क्यों नहीं हैं, फोन लगाइए उनको
मुख्यमंत्री ने जदयू विधान पार्षद व पार्टी के पदाधिकारी संजय कुमार सिंह उर्फ संजय गांधी की भी खोज खबर ली। उन्होंने पूछा कि संजय गांधी क्यों नहीं हैं?
इस पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें बताया कि पंद्रह मिनट में आ जाएंगे, अभी घर पर पूजा कर रहे हैं। इस पर उन्होंने संजय गांधी को फोन लगाने को कहा और वीडियो कॉल से स्थिति की जानकारी ली।
ललन बाबू किधर हैं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के बारे में भी पूछा। कहा- ललन बाबू कहां हैं? बताया गया कि बस आ ही रहे।
मुख्यमंत्री जदयू दफ्तर से निकलने के लिए गाड़ी में बैठ चुके थे तब ललन सिंह पहुंच गए। इसके बाद मुख्यमंत्री को वह दफ्तर में ले गए।
जन सुनवाई कार्यक्रम के बारे में भी पूछा
मुख्यमंत्री ने जदयू प्रदेश अध्यक्ष से पार्टी दफ्तर में चलने वाले जन सुनवाई कार्यक्रम के बारे में पूछा। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अभी बीपी मंडल की तस्वीर पर माल्यार्पण का कार्यक्रम है।
इसलिए समस्या के साथ आए लोगों को अलग बिठा दिया गया है। मुख्यमंत्री ने तब कहा कि चलिए हम भी माल्यार्पण कर लेते हैं। करीब आधे घंटे तक जदयू दफ्तर में रहने के बाद मुख्यमंत्री वहां से निकले।


