ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण वाराणसी की जिला अदालत ने दिया ASI सर्वे का आदेश अगली सुनवाई की तारीख 4 अगस्त

ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण वाराणसी की जिला अदालत ने दिया ASI सर्वे का आदेश अगली सुनवाई की तारीख 4 अगस्त
ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण वाराणसी की जिला अदालत ने दिया ASI सर्वे का आदेश अगली सुनवाई की तारीख 4 अगस्त

साभार : PNN 24 News (तारिक़ आज़मी)

 वाराणसी डेस्क:अनुराग पाण्डेय

वाराणसी: वाराणसी की जिला जज अदालत ने आज ज्ञानवापी मस्जिद प्रकरण में वादिनी मुकदमा से तरफ से दाखिल एएसआई सर्वे की मांग को मंज़ूर करते हुवे परिसर का एएसआई सर्वे करने का हुक्म दिया है। अदालत ने कहा है कि बिना किसी चीज़ को छुए अथवा नुक्सान पहुचाये यह सर्वे मुकम्मल हो।

साथ ही अदालत ने हुक्म जारी किया है कि इस सर्वे की रिपोर्ट 4 अगस्त तक पेश किया जाये। अदालत ने मामले में सुनवाई की अगली तारीख 4 अगस्त मुकर्रर किया है। अदालत ने इस आदेश के बाद परिसर के एएसआई सर्वे का रास्ता साफ़ होने से जहा वादिनी मुकदमा पक्ष ने ख़ुशी ज़ाहिर किया है। कहा है कि यह उनकी जीत की पहली सीढ़ी है।

वही दूसरी तरफ अंजुमन मसाजिद इंतेजामिया कमेटी ने कहा है कि हमने अभी पूरा आदेश नही देखा है। हमारे कानूनी सलाहकार इस आदेश पर अध्यन कर रहे है। अगर ये हमारे मुखालिफत में है तो हम उपरी अदालत में इसके खिलाफ जायेगे।

ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ मंदिर मामले में वाराणसी जिला कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनया है कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की दलील को खारिज करते हुए परिसर का एएसआई सर्वे कराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि एएसआई सर्वे के दौरान परिसर में नमाज होती रहेगी।

सर्वे के इस काम को 3-6 महीने के भीतर पूरा करना होगा. हालांकि, कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि वो अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देगा।

पिछली तारीखों की कार्रवाई पर गौर करें तो 12 और 14 जुलाई 2023 को हुई बहस में मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यदि ज्ञानवापी परिसर का पुरातत्व सर्वेक्षण होता है, तो ऐसी स्थिति में उत्खनन आदि से ज्ञानवापी के ढांचे को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है. ऐसे में किसी भी प्रकार से ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर का पुरातात्विक सर्वे नहीं होना चाहिए और इस मामले में हिन्दू पक्ष के द्वारा साक्ष्य संकलन किया जा रहा है, जो कि विधि सम्मत नहीं है।

इसी विषय पर गत सुनवाई पर हिंदू पक्ष के अधिवक्ताओं के द्वारा विस्तारपूर्वक जिला न्यायालय के समक्ष हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और कई केस लॉ को रखते हुए जनपद न्यायाधीश से निवेदन किया गया था कि ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराना अपरिहार्य है, इससे हिन्दूओं में तनावपूर्ण माहौल व्याप्त है. ज्ञानवापी प्रकरण को लेकर उपजे हुए तनाव का सौहार्दपूर्ण समाधान हो जाए और ज्ञानवापी परिसर के वैज्ञानिक तथ्य सबके सामने आ सके।

ज्ञानवापी परिसर में किस काल खंड में कौन सी संरचना से मंदिर बना था, इस विषय पर आर्कोलॉजी के विशेषज्ञ- राडार पेनिट्रेटिंग, एक्सरे पद्धति, राडार मैपिंग, स्टाइलिस्ट डेटिंग आदि पद्धति का प्रयोग कर सकते हैं. स्टाइलिस्ट डेटिंग में किसी संरचना के निर्माण शैली से उसके सदियों पुराने स्थिति का आंकलन कर पुरातत्व के विशेषज्ञ स्पष्ट व प्रमाणित कर देते हैं कि उस संरचना का कौन सा काल खण्ड है।

वाराणसी के जनपद न्यायाधीश के द्वारा ज्ञानवापी प्रकरण से संबंधित मुकदमों को कल्ब किये गए आठ केसों में पांच वादिनी महिलाओं के केस को कोर्ट ने ‘अग्र-वाद’ लीडिंग केस बनाया था,इसके फैसले के लिए आज की तारीख तय की गई थी।