सुलगते बांग्लादेश के लिए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की उदारता ,पासआउट छात्र हालात स्थिर होने तक रह सकेंगे हॉस्टलमें
एक तरफ जहां देश में तख्ता पलट होने के बाद जहां शेख हसीना ने भारत की शरण ली और भारत सरकार ने उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करते हुए बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने बांग्लादेशी छात्रों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. जयचन्द वाराणसी
INDIA NEWS REPORT
Author: Jaychand
बांग्लादेशी छात्रों के लिए बीएचयू की उदारता:बांग्लादेश में भारी विरोध प्रदर्शन और अराजकता के बीच शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. कल, 5 अगस्त को उन्होंने देश छोड़ना पड़ा।
एक तरफ जहां देश में तख्ता पलट होने के बाद जहां शेख हसीना ने भारत की शरण ली और भारत सरकार ने उनकी सुरक्षा का पूरा इंतजाम करते हुए बांग्लादेश उच्चायोग की सुरक्षा बढ़ा दी है. वहीं दूसरी तरफ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय ने बांग्लादेशी छात्रों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है।
बांग्लादेश की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले बीएचयू ने दरियादिली दिखाई है. यूनिवर्सिटी ने पासआउट बांग्लादेशी स्टूडेंट्स को स्थिति सामान्य होने तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कैंपस हॉस्टल में ही रुकने की परमिश दे दी है. ऐसे में अब पढ़ाई पूरी कर चुके स्टूडेंट्स को इन हालातों में बांग्लादेश वापस नहीं लोटना पड़ेगा।
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यूनिवर्सिटी का कहना है कि बांग्लादेश की स्थिति पर विचार करते हुए परिसर में रहने वाले ऐसे बांग्लादेशी स्टूडेंट्स को हॉस्टल में रहने की अनुमति देने का फैसला लिया गया है, जो अपना कोर्स पूरा कर चुके हैं. यह फैसला पासआउट बांग्लादेशी छात्रों के हित में लिया गया है, क्योंकि उन्होंने पढ़ाई पूरी कर ली है और कार्यक्रम पूरा होने पर अनिवार्य रूप से विश्वविद्यालय का छात्रावास खाली करना था।
बीएचयू इंटरनेशनल सेंटर के समन्वयक प्रो. एसवीएस. राजू ने बताया कि बांग्लादेशी छात्रों को अपने देश लौटते समय जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, उसे ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने यह निर्णय लिया है. ऐसे में जो छात्र विश्वविद्यालय के छात्रावासों में रहना जारी रखना चाहते हैं, उन्हें इसकी अनुमति दी जाएगी. इसके लिए उन्हें कोई चार्ज भी नहीं देना होगा।
प्रोफेसर राजू ने कहा, "हमने छात्रों को आश्वासन दिया है कि अगर परिसर में रहने के दौरान उन्हें किसी अन्य कठिनाई का सामना करना पड़ता है तो विश्वविद्यालय उसके समाधान के लिए जरूरी कदम उठाएगा."
प्रोफेसर ने कहा, "बांग्लादेश में स्थिति सामान्य होने तक वे यहां रह सकते हैं. हर साल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय विभिन्न कार्यक्रमों में सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय छात्रों का नामांकन करता है. इनमें से बड़ी संख्या में छात्र बांग्लादेश से भी आते हैं, जिनमें से कई छात्र विश्वविद्यालय परिसर के छात्रावासों में रहते हैं."


