वाराणसी 30 जून को हुये मीरघाट गोलीकांड में आया नया मोड़ : मुकदमा दर्ज करने का आदेश

30 जून को वाराणसी के मीरघाट पर हुये गोलीकांड में नया मोड़ आ गया है ,फायरिंग के सभी आरोपी सलाखों के पीछे है ,एक व्यक्ति की पिटाई कर पुलिस के हवाले किया गया था उसकी माता जी ने न्यायालय से अपील की है कि पिटाई करने वाले लोगो के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया जाये:जगदीश शुक्ला

वाराणसी 30 जून को हुये मीरघाट गोलीकांड में आया नया मोड़ : मुकदमा दर्ज करने का आदेश

रिपोर्ट जगदीश शुक्ला

 वाराणसी। मीरघाट गोलीकांड में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में एक आरोपित गोविंद यादव की मां ने अदालत में प्रार्थनापत्र देकर मीरघाट गोलीकांड मामले के वादी विजय यादव समेत 10 नामजद व अई अज्ञात के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज करने की गुहार लगायी थी। जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने दशाश्वमेध थाना प्रभारी को उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कारवाई करने का आदेश दिया है।

प्रकरण के अनुसार मीरघाट निवासिनी सुमन यादव ने अपने अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी व मयंक मिश्रा के जरिए बीएनएसएस की धारा 175 (3) के तहत कोर्ट प्रार्थनापत्र दिया था। आवेदिका का आरोप है कि 30 जून 2024 को करीब 12 बजे उसका पुत्र गोविन्द यादव, विजय यादव निवासी मीरघाट, थाना दशाश्वमेध द्वारा पूर्व के एक विवाद में पंचायत के लिए बुलाने पर उसके घर की तरफ जा रहा था कि पूर्व से की गई साजिश व षडयन्त्र के तहत गोविन्द यादव को मीरघाट की गली में देखते ही विजय यादव उसके तीनों लड़के गोलू यादव, पुन्ना यादव व सुमित यादव, उसकी पत्नी नाम अज्ञात, आज यादव पुत्र सुखदेव, चिकू पुत्र अज्ञात, आर्यन पाण्डेय पुत्र अजय पत्नी नाम अज्ञात, विजय यादव के परिवार की दो-तीन लड़कियाँ व चार-पांच अन्य लोग एकराय होकर इंट, पत्थर, लाठी, अण्डा, राड, असलहे से लैस होकर गोविन्द यादव को जान से मार डालने की नियत से उस पर जानलेवा हमला कर दिया और उसे गली में ही पटक कर राड, पटिया आदि से मारने पीटने के बाद उसे घसीट कर घर के अन्दर ले गये उसके बाद गोलू यादव, गोविन्द यादव के सिर पर राड से, पुन्ना यादव सिर पर पटिया से, विजय यादव ईंट से कान घर, सुमित यादव असलहे से फायर करने लगा, रजनी सिलबट्टा से मारने लगी, जबकि किरन गांविन्द्र की आँख फोड़ने के लिए चम्मच से दांयी आँख में वार करने लगी, आर्यन पाण्डेय व चिकू तथा विजय यादव के घर की दो-तीन लड़कियों भी लाठी व डण्डा से व लात-मुक्रा से बुरी तरह मारने-पीटने लगी, मुँह नोचने लगी, सीने के बाल नोचने लगी। गोविन्द पूरी तरह खून से लथपथ हो गया लेकिन सभी लोग उसे मार डालने की मंशा से मारते रहे। सुमित ने गोविन्द को मारने के लिए फायर भी किया। गोविन्द की जान पर खतरा देख गली के लोगों ने पुलिस को सूचना दिया जिस पर पुलिस आयी तब गोविन्द यादव की जान बच पायी। पुलिस ने गोविन्द यादव की गम्भीर स्थिति देखते हुए उसे बी. ए.पू. स्थित ट्रामा सेन्टर में भर्ती किया जहाँ गोविन्द को करीब 31 टाका लगाकर किसी तरह जान बचायी जा सकी।