निजीकरण का विरोध: बनारस के बिजलिकर्मियो ने कज्जाकपुरा स्थित बिजली कार्यालय पर आज जोरदार जनजागरण सभा सम्पन्न हुई जिसमें काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे

पार्षदगण ,बुनकर नेता ,जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय जनता शामिल हुये जिन्होंने बिजली के निजीकरण को बिल्कुल जनहित में नही बताया और सब ने एक सुर में माननीय प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया कि जनहित में ऊर्जा प्रबन्धन के बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त कराये;जयचन्द

निजीकरण का विरोध: बनारस के बिजलिकर्मियो ने कज्जाकपुरा स्थित बिजली कार्यालय पर आज जोरदार जनजागरण सभा सम्पन्न हुई जिसमें काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे
निजीकरण का विरोध: बनारस के बिजलिकर्मियो ने कज्जाकपुरा स्थित बिजली कार्यालय पर आज जोरदार जनजागरण सभा सम्पन्न हुई जिसमें काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे
निजीकरण का विरोध: बनारस के बिजलिकर्मियो ने कज्जाकपुरा स्थित बिजली कार्यालय पर आज जोरदार जनजागरण सभा सम्पन्न हुई जिसमें काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द

निजीकरण का विरोध: बनारस के बिजलिकर्मियो की कज्जाकपुरा स्थित बिजली कार्यालय पर आज जोरदार जनजागरण सभा सम्पन्न हुई जिसमें काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे पार्षदगण ,बुनकर नेता ,जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय जनता शामिल हुये जिन्होंने बिजली के निजीकरण को बिल्कुल जनहित में नही बताया और सब ने एक सुर में माननीय प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया कि जनहित में ऊर्जा प्रबन्धन के बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त कराये।

निजीकरण के विरोध में 22 जून को लखनऊ में विशाल बिजली महापंचायत की तैयारी : ऊर्जा मंत्री द्वारा निजीकरण के पक्ष में दिये गये बयान से बिजली कर्मियों में रोष

वाराणासी-13जून।विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले आज कज्जाकपुरा स्थित बिजली कार्यालय में बिजलिकर्मियो ने जनजागरण सभा आयोजित किया जिसमें बड़ी संख्या में बिजलीकर्मी और जनप्रतिनिधि शामिल हुये। जिसमें काफी संख्या में पार्षदगण ,बुनकर नेता ,जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्रीय जनता शामिल हुये जिन्होंने बिजली के निजीकरण को बिल्कुल जनहित में नही बताया और सब ने एक सुर में माननीय प्रधानमंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया कि जनहित में ऊर्जा प्रबन्धन के बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त कराये।

कल छुट्टी का दिन होने के कारण जनजागरण सभा के स्थान पे संघर्ष समिति वाराणासी के पदाधिकारीगण बनारस के विभिन्न जनप्रतिनिधियों जैसे पार्षदगण एवं ग्राम प्रधान से मिलकर उनसे बिजली के निजीकरण से होने वाले हानियों को बताते हुये उनसे जनहित में बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को जनहित में निरस्त कराने हेतु अपना पत्र माननीय प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को लिखे जिससे बिजलिकर्मियो के साथ ही आमजनमानस को राहत मिल सके।

सभा को संबोधित करते हुये कोनिया के पार्षद शिवप्रकाश मौर्य ने बिजली के निजीकरण को विधुत सुधार के नाम बिल्कुल गलत बताया और कहा कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार यदि निजी कम्पनी कर सकती है तो हमारी सरकार बिल्कुल कर सकती है और ये करके अब तक दिखाया भी है जो पहले बिजली के लिए हमे धरना देना पड़ता था और अब 22-24घण्टा बिजली मिल रही है।इसलिए हमलोग इसप्रस्ताव को निरस्त कराने हेतु अपना पक्ष जरूर रखेंगे।

हाजी वोकास पार्षद जल्लीपुरा ने कहा कि बिजली के निजीकरण से आमजनमानस को बहुत परेशानी होगी क्योंकि कोई प्राइवेट कंपनी वेलफेयर का काम नही करने वाली बल्कि महंगी दर पर बिजली बेचकर आमजनमानस का शोषण करेगी।

इम्तियाजुदिन पार्षद अलईपुरा ने कहा कि हमलोगों का क्षेत्र बुनकर बाहुल्य क्षेत्र है जो भी निजी कम्पनी आएगी वो हमारे सब्सिडी को खत्म कर देगी और वो अपने व्यापार को बढ़ाने हेतु जनता का किसी भी प्रकार का दोहन करेगी साथ ही यह भी कहा कि बिजलीकर्मी जब भी आवाज देंगे हमलोग उनके समर्थन में अपने समस्त साथियों के साथ उनके हर आंदोलन में उपस्थित होकर लड़ेंगे।

सपा नेता जावेद अख्तर अंसारी ने कहा कि बिजली के निजीकरण का नुकसान हमलोग अच्छी तरह से जानते है इसलिए जनता को जागरूक करने के साथ बिजलिकर्मियो के हर आंदोलन को पूरी क्षमता के साथ लड़ेंगे।

ई0नरेंद्र वर्मा ने कहा कि निजीकरण के विरोध में आगामी 22 जून को लखनऊ में होने वाली बिजली महापंचायत में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन को बुलाने का निर्णय लिया है। महापंचायत में किसानों, आम उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों के राष्ट्रीय नेता सम्मिलित होंगे। ऊर्जा मंत्री द्वारा निजीकरण के पक्ष में कल दिये गये बयान से बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त हो रहा है। संघर्ष समिति के आह्वान पर आज लगातार 198वें दिन प्रान्तव्यापी विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

ई0 विजय सिंह ने कहा कि, उप्र ने ऊर्जा मंत्री श्री अरविन्द कुमार शर्मा द्वारा निजीकरण के पक्ष में दिये गये बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघर्ष समिति ने आगामी 22 जून को लखनऊ में आयोजित बिजली महापंचायत में ऊर्जा मंत्री को आमंत्रित करते हुए कहा है कि ऊर्जा मंत्री महापंचायत में आकर बिजली कर्मियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं को बिजली के निजीकरण का लाभ समझाये तो बेहतर होगा। संघर्ष समिति ने कहा कि ऊर्जा मंत्री ने कल दिये गये बयान में ग्रेटर नोएडा और आगरा में बिजली के निजीकरण की प्रशंसा करते हुए कहा है कि आगरा और ग्रेटर नोएडा में निजीकरण के बाद बहुत सुधार हुआ है।

जमुना पाल ने कहा कि आरडीएसएस योजना के अन्तर्गत 44 हजार करोड़ रूपये खर्च करने के बाद जब प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ हो गयी है तब सरकारी पैसे से बिजली व्यवस्था सुधार कर निजी घरानों को देना किस सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र में घाटे की परवाह न करते हुए किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में इस भीषण गर्मी में बिजली कर्मी रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति कर रहे हैं। ऊर्जा मंत्री आये दिन इसका श्रेय भी ले रहे हैं किन्तु वकालत निजी घरानों की कर रहे हैं।

सभा को संबोधित करते हुये प्रशांत कुमार ने कहा कि ऊर्जा मंत्री के वक्तव्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि आगरा में जब 01 अप्रैल 2010 को बिजली व्यवस्था टोरेंट पॉवर कम्पनी को सौंपी गयी थी तब पावर कारपोरेशन का 2200 करोड़ रूपये का उपभोक्ताओं पर बकाया था। इस 2200 करोड़ रूपये को टोरेंट पॉवर कम्पनी को एकत्र कर पॉवर कारपोरेशन को देना था। पॉवर कारपोरेशन इसके एवज में टोरेंट पॉवर कम्पनी को 10 प्रतिशत प्रोत्साहन धनराशि देती। आज 15 वर्ष से अधिक व्यतीत हो गया है किन्तु टोरेंट पॉवर कम्पनी ने इस 2200 करोड़ रूपये के बकाये का एक पैसा भी पॉवर कारपोरेशन को नहीं दिया है। इसके अतिरिक्त पॉवर कारपोरेशन रूपये 5.55 प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीद कर रूपये 4.36 प्रति यूनिट की दर पर टोरेंट पॉवर कम्पनी को देता है। इस प्रकार 1 वर्ष में लगभग 2300 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति करने में पॉवर कारपोरेशन को सालाना 274 करोड़ रूपये का घाटा हो रहा है। विगत 15 वर्ष में यह घाटा 2500 करोड़ रूपये से अधिक का हो चुका है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री इसे उपलब्धि मानते हैं तो उन्हें बताना चाहिए कि पूर्वांचल विद्युत वितनण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण से और कितना घाटा होने वाला है।

संघर्ष समिति ने कहा कि ग्रेटर नोएडा ने नोएडा पॉवर कम्पनी लि. 1993 से काम कर रही है। नोएडा पॉवर कम्पनी लि. के रवैये से किसान और आम उपभोक्ता काफी नाराज हैं। स्वयं उप्र सरकार नोएडा पॉवर कम्पनी लि. का लाईसेंस समाप्त कराने के लिए मा. सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा लड़ रही है। संघर्ष समिति ने ऊर्जा मंत्री से सवाल पूछा कि यदि ग्रेटर नोएडा में निजी कम्पनी इतना अच्छा काम कर रही है तो उप्र सरकार उसका लाईसेंस समाप्त कराने के लिए मा. सर्वोच्च न्यायालय में क्यों मुकदमा लड़ रही है?

संघर्ष समिति ने बताया कि आज यह विदित हुआ है कि दिल्ली में 53 लाख घरों में बिजली आपूर्ति करने वाले निजी कम्पनियों बीएसईएस राजधानी पॉवर लि. एवं बीएसईएस यमुना पॉवर लि. का लाईसेंस निरस्त कराने के लिए दिल्ली की भाजपा सरकार कार्यवाही करने जा रही है। सरकार का यह कहना है कि बीएसईएस की कम्पनियों पर सरकारी विभागों का 25 हजार करोड़ रूपये से अधिक का बकाया हो गया है जिसमें प्रगति पॉवर कारपोरेशन लि. का 15 हजार करोड़ रूपये आईपीजीसीएल का 5400 करोड़ रूपये और दिल्ली ट्रांस्को का 5000 करोड़ रूपये बकाया है। संघर्ष समिति ने कहा कि एक ओर दिल्ली की भाजपा सरकार पूर्णतया विफल रहने के बाद दिल्ली में निजी बिजली कम्पनियों का लाईसेंस निरस्त कराने जा रही है वहीं दूसरी ओर उप्र के ऊर्जा मंत्री प्रदेश के 42 जनपदों की बिजली व्यवस्था सरकारी क्षेत्र से छीनकर निजी कम्पनियां को देने की वकालत कर रहे हैं।

सभा की अध्यक्षता ई0 उपेन्द्र कुमार एवं संचालन अंकुर पाण्डेय ने किया।

सभा को सर्वश्री ई0 सतेंद्र सुमन,ई0 संजय ,प्रशांत कुमार,मनोज यादव,राजेश सिंह,पंकज यादव, बृजेश यादव,संजय कुमार,ई0 विनोद कुमार,ई0 हरिप्रसाद पाल, ई0 अमेरिका यादव,मनोज जैसवाल,रमेश यादव,अमित सिंह आदि ने संबोधित किया।

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