निजीकरण के विरोध ने फिर पकड़ा सुर: बनारस के बिजलीकर्मियों ने बिजली के निजीकरण के विरोध में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के क्रम में भिखारीपुर में किया जोरदार प्रदर्शन
संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर परिषद के पदाधिकारियों ने कहा जिस दिन बिजलीकर्मी जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे उसी दिन से प्रदेश के समस्त जिलो से किसान भी जेलों को भरना शुरू कर देंगे किन्तु बिजली का निजीकरण कतई स्वीकार नही करेंगे-पूर्वांचल विधुतकर्मी
INDIA NEWS REPORT
जयचन्द
दिनांक 9जुलाई को बिजलीकर्मी, किसान ,रेलकर्मी, एल0आई0सी0 सहित तमाम यूनियन बिजली के निजीकरण के विरोध में करेंगे एक दिन का देशव्यापी हड़ताल।
वाराणासी-2जुलाई। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले बिजली के निजीकरण के विरोध में चल रहे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के क्रम में बनारस के बिजलिकर्मियो ने भी भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर किया जोरदार प्रदर्शन जिसमे शामिल हुए संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारीगण।
सभा को संबोधित करते हुए आरपके0वाही ने बताया कि आज पूरे देश मे बिजली के निजीकरण के विरोध में विरोध प्रदर्शन जारी रहा जिसके तारतम्य में बनारस में भी बिजलिकर्मियो ने भारी भीड़ के बीच विरोध सभा के माध्यम से निजीकरण का विरोध किया जिसमें वक्ताओ ने बताया कि बिजली, पानी,सड़क,शिक्षा,स्वास्थ्य, और सुरक्षा हमेशा से आमजनमानस की मूलभूत आवश्यकताये है जिसका सरकारीकरण ही रहना चाहिए क्योंकि कोई भी निजी कम्पनी वेलफेयर के उद्देश्य से बिजली कम्पनियों नही खरीदेगी वो मुनाफे के लिए खरीदने को तैयार बैठी है।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता अफलातून और किसान मजदूर परिषद के अध्यक्ष चौधरी राजेन्द्र जी ने कहा कि पुर्वांचल विधुत वितरण निगम द्वारा 25लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर खरीद चुकी है जिसको उपभोक्ताओं के यहां लगाकर निजी कम्पनियों को मुनाफे कमाने का रास्ता पहले ही खोल दिया है किंतु जिस तरह उड़ीसा में टाटा पावर के दफ्तर के सामने किसानों ने अपना मीटर उखाड़कर ढेर लगा दिया और बिजली के निजीकरण को नकार दिया उसी तरह उ0प्र0 का किसान भी बिजली के निजीकरण को नकार दिया है और संघर्ष समिति के हर आंदोलन में कंधे से कंधे मिलाकर उ0प्र0 का समस्त किसान साथ देगा और बिजली के निजीकरण की हर लड़ाई को साथ लड़ने का निर्णय लिया है और साथ ही यह भी कहा कि संघर्ष समिति ने जो निर्णय लिया है कि जिस दिन बिजली के निजीकरण का टेंडर निकला उसी दिन बिना किसी नोटिस के सभी बिजलीकर्मी कार्यबहिष्कार पर चले जायेंगे और जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे तो प्रदेश के समस्त जिलो की भांति बनारस के किसान भी जेलों को भरना शुरू कर देंगे।
सभा को संबोधित करते हुये ई0 नीरज बिंद ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने विद्युत वितरण निगमों में घाटे के भ्रामक आंकड़ों देकर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय लिया है जिससे उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी विगत 07 माह से लगातार आंदोलन कर रहे हैं किंतु अत्यंत खेद का विषय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने आज तक एक बार भी उनसे वार्ता नहीं की।
ई0 एस0के0सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गलत पावर परचेज एग्रीमेंट के चलते विद्युत वितरण निगमों को निजी बिजली उत्पादन कंपनियों को बिना एक भी यूनिट बिजली खरीदे 6761 करोड रुपए का सालाना भुगतान करना पड़ रहा है । इसके अतिरिक्त निजी घरानों से बहुत महंगी दरों पर बिजली खरीदने के कारण लगभग 10000 करोड रुपए प्रतिवर्ष का अतिरिक्त भार आ रहा है। उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागो पर 14400 करोड रुपए का बिजली राजस्व का बकाया है। उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अनुसार किसानों को मुफ्त बिजली दी जाती है, गरीबी रेखा से नीचे के बिजली उपभोक्ताओं को 03 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जाती है जबकि बिजली की लागत रुपए 07.85 पैसे प्रति यूनिट है। बुनकरों आदि को भी सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी की धनराशि ही लगभग 22000 करोड रुपए है। उत्तर प्रदेश सरकार इन सबको घाटा बताती है और इसी आधार पर निजीकरण का निर्णय लिया गया है।
राजेश सिंह ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और शासन के कुछ बड़े अधिकारियों की कुछ चुनिंदा निजी घरानों के साथ मिली भगत है। वे लाखों करोड़ रुपए की बिजली की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल निजी घरानों को बेचना चाहते हैं। पूर्वांचल में प्रदेश की सबसे गरीब जनता रहती है। दक्षिणांचल में बुंदेलखंड के क्षेत्र में बेहद गरीब लोग रहते हैं जहां पीने के पानी की भी समस्या है। निजीकरण होने के बाद यहां के उपभोक्ताओं की सब्सिडी समाप्त होने का अर्थ होगा कि उपभोक्ताओं को 10 से 12 रुपए प्रति यूनिट की दर पर बिजली खरीदनी पड़ेगी जो वे नहीं कर पाएंगे। इस प्रकार उत्तर प्रदेश की गरीब जनता को लालटेन युग में धकेला जा रहा है।
मदन श्रीवास्तव ने बताया कि उत्तर प्रदेश में किए जा रहे बिजली के निजीकरण के विरोध में आज देशभर में 27 लाख बिजली कर्मचारियों ने सभी जनपदों और परियोजनाओं पर भोजन अवकाश के दौरान सड़क पर उतरकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया और उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई। बिजली कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों का कोई भी उत्पीड़न करने की कोशिश की गई तो देश के तमाम 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शन नहीं रहेंगे और सड़क पर उतर कर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।
सभा की अध्यक्षता ई0 मायाशंकर तिवारी ने एवं संचालन विजय नारायण हिटलर ने किया। सभा को सर्वश्री ओ0पी0 सिंह,रविन्द्र यादव, ई0 विजय सिंह,प्रमोद कुमार,रामकुमार झा,धर्मेन्द्र यादव, पंकज यादव,रंजीत कुमार,ई0 अमित श्रीवास्तव, उदयभान दुबे,मनोज सोनकर, नवीन कुमार, कृष्णमोहन, रंजीत पटेल, जयप्रकाश, आदि ने संबोधित किया।
https://youtu.be/HuXgXTFPfmQ?si=vjsIVtgTBZxahuii


