निजीकरण के विरोध में आंदोलन के 383वें दिन भी बनारस के बिजलकर्मियो ने जमकर प्रदर्शन करते हुये मानक के अनुरूप संविदाकर्मियों को नियुक्त करने का किया मांग
संघर्ष समिति ने कहा कि संविदाकर्मियों की छटनी से ओ0टी0एस0 से वंचित हो रहे उपभोक्ता, उपभोक्ताओं तक ओ0टी0एस0की सही जानकारी पहुचने में हो रही कठिनाइयां,संविदाकर्मियों की छटनी का बुरा असर बिजली आपूर्ति पर भी भी पड़ना निश्चित :जयचन्द की रिपोर्ट
बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संयुक्त किसान मोर्चा एवं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर निजीकरण एवं विद्युत (संशोधन) बिल के खिलाफ राष्ट्रव्यापी संयुक्त आंदोलन शुरू करेंगे : परमाणु ऊर्जा संशोधन बिल का भी विरोध किया जाएगा : 18 मार्च को दिल्ली में विशाल रैली
INDIA NEWS REPORT
जयचन्द
वाराणासी-15दिसम्बर2025 विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के बैनर तले निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 383 वें दिन आज बनारस के बिजली कर्मियों ने प्रदेश भर में समस्त जनपदों की भांति बनारस में भी व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
वक्ताओ ने बताया कि बनारस सहित 8 मंडलो के लगभग 1200 संविदाकर्मियों के छटनी से जहाँ एक ओर राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही अतिमहत्वपूर्ण योजना ओ0टी0एस0 की प्रगति बुरी तरह प्रभावित हो रही है क्योंकि स्टाफ की कमी के कारण अधिकारी उपभोक्ताओं तक पहुच नही पा रहे है वही दूसरी ओर बिजली व्यवस्था भी चौपट होने वाली है ।
संघर्ष समिति ने मांग किया है कि मानक के अनुसार संविदाकर्मियों की अविलम्ब तैनाती कराकर माननीय मुख्यमंत्री जी के संकल्पों को पूरा करे ये ऊर्जा प्रबन्धन।
वक्ताओ ने बताया कि एक ऐतिहासिक बैठक में, बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियर्स की राष्ट्रीय समन्वय समिति नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई), केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच तथा संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के राष्ट्रीय नेतृत्व की बैठक 14 दिसंबर 2025 को बी.टी. रणदीवे भवन, नई दिल्ली में आयोजित हुई।
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) के चेयरमैन एवं संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि चर्चा का मुख्य फोकस बिजली के निजीकरण, प्रीपेड स्मार्ट मीटरिंग तथा ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) बिल, 2025 पर केंद्रित रहा। नेताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के एक साल से चल रहे प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
यह भी ध्यान में लाया गया कि सरकार संसद के वर्तमान सत्र में परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम में संशोधन बिल प्रस्तुत कर सकती है।
बैठक में केंद्र सरकार के समक्ष सर्वसम्मति से निम्नलिखित मांगें रखी गईं:
- ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) बिल, 2025 की तत्काल वापसी।
- परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों की तत्काल वापसी।
- प्रीपेड स्मार्ट मीटरों की स्थापना को तत्काल रोकना।
- उत्पादन, पारेषण तथा वितरण में मौजूदा सभी निजीकरण या फ्रैंचाइजी मॉडलों की वापसी, अर्थात चंडीगढ़, दिल्ली तथा ओडिशा में।
- उत्तर प्रदेश में पीवीवीएनएल तथा डीवीवीएनएल के निजीकरण के प्रयासों को तत्काल रोकना।
- क्रॉस-सब्सिडी तथा सार्वभौमिक सेवा दायित्व को बनाए रखना; किसानों तथा सभी अन्य उपभोक्ता वर्गों के लिए बिजली के अधिकार की रक्षा।
- देश भर में बिजली टैरिफ को कम करने के लिए ठोस कदम सुनिश्चित करना।
एनसीसीओईईई, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच तथा एसकेएम ने निर्णय लिया है कि यदि परमाणु ऊर्जा अधिनियम तथा नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम में संशोधन संसद के समक्ष रखे जाते हैं, तो देश भर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
बिजली के निजीकरण तथा ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) बिल, 2025 के खिलाफ एनसीसीओईईई, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच तथा एसकेएम द्वारा जनवरी एवं फरवरी 2026 के महीनों में देश भर में विशाल सम्मेलनों एवं रैलियों के साथ संयुक्त अभियान चलाया जाएगा।
शैलेंद्र दुबे ने कहा कि इन सभी कार्रवाइयों के बावजूद यदि केंद्र एवं राज्य सरकारें उत्तर प्रदेश में निजीकरण के प्रयासों को वापस नहीं लेतीं तथा ड्राफ्ट विद्युत (संशोधन) बिल, 2025 को वापस नहीं लेतीं, तो बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स राष्ट्रव्यापी सेक्टरल हड़ताल की कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे।
सभा को सर्वश्री ई0 इंद्रेश राय, अंकुर पाण्डेय,संदीप कुमार, हेमन्त श्रीवास्तव, राजेश सिंह,मनोज जैसवाल,कांता सिंह,मनोज यादव,आशुतोष पाण्डेय, उमेश यादव,कृपाल सिंह आदि ने संबोधित किया।


