बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 317वें दिन भी बिजली के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि अपने वर्षो के पढ़ाई लिखाई को बर्बाद नही होने देंगे मरते दम तक निजीकरण का विरोध करते रहेंगे

भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा विद्युत वितरण के निजीकरण हेतु ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 जारी : बिल का प्रबल विरोध किया जाएगा : निजीकरण के नये ड्राफ्ट को देखते हुए पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लिया जाय विधुत संघर्ष समिति- विशाल की रिपोर्ट

बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 317वें दिन भी बिजली के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि अपने वर्षो के पढ़ाई लिखाई को बर्बाद नही होने देंगे मरते दम तक निजीकरण का विरोध करते रहेंगे
निजीकरण का विरोध
बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 317वें दिन भी बिजली के निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि अपने वर्षो के पढ़ाई लिखाई को बर्बाद नही होने देंगे मरते दम तक निजीकरण का विरोध करते रहेंगे

INDIA NEWS REPORT

विशाल केसरवानी

वाराणासी-10 अक्टूबर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज बनारस के बिजलिकर्मियो ने निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के 317वें दिन भी विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए कहा कि अपने वर्षो की कड़ी मेहनत से पढ़ाई लिखाई करने के बाद मिली इस नौकरी को बर्बाद नही होने देंगे ,मरते दम तक निजीकरण का विरोध करेंगे ।

              वक्ताओ ने भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा सम्पूर्ण विद्युत वितरण क्षेत्र के निजीकरण हेतु कल जारी किये गए ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का विरोध करते हुए उप्र के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि निजीकरण हेतु भारत सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट बिल को देखते हुए उप्र सरकार को पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय तत्काल निरस्त करना चाहिए जो इस ड्राफ्ट बिल के प्राविधान के अनुसार सरकारी क्षेत्र में विद्युत वितरण निगमों को बनाए रखने की नीति का विरोधाभाषी है । संघर्ष समिति इस सम्बन्ध में मुख्यमंत्री जी को अलग से पत्र भेजेगी।

                  वक्ताओ ने आज यहां बताया कि यद्यपि कि ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 का भी बिजली कर्मी पुरजोर विरोध करेंगे किन्तु इस ड्राफ्ट बिल के प्राविधानों को देखते हुए उप्र सरकार को पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय वापस लेना चाहिए।

           संघर्ष समिति ने कहा कि उ0प्र0 सरकार के वर्तमान निर्णय के अनुसार पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के अन्तर्गत आने वाले सभी सभी 42 जनपदों का निजीकरण कर उन्हें किसी निजी कंपनी को सौंपा जाएगा जिसका तात्पर्य यह होगा कि इन सभी जनपदों में विद्युत वितरण में निजी घरानों की मनॉपली हो जाएगी ।

                  इसके विपरीत ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 में यह प्राविधान है कि सरकारी क्षेत्र में काम कर रहे विद्युत वितरण निगमों को काम करने दिया जाएगा साथ ही निजी कंपनियों को सरकारी विद्युत वितरण निगमों के मौजूदा नेटवर्क को इस्तेमाल कर विद्युत वितरण हेतु विद्युत वितरण के लाइसेंस दिए जा सकेंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी विद्युत वितरण निगमों के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की निजी घरानों को अनुमति देने का यह प्राविधान भी जनहित में नहीं है जिस पर संघर्ष समिति केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय को शीघ्र ही अपना प्रतिवेदन भेजेगी और इस पर अलग से प्रेस वक्तव्य भेजा जाएगा ।

किन्तु जब भारत सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के अनुसार सरकारी क्षेत्र में विद्युत वितरण निगमों को बनाए रखने का प्राविधान है तो उप्र में इसके विपरीत प्रदेश के 42 जनपदों के निजीकरण का निर्णय लेकर सरकारी क्षेत्र में विद्युत वितरण निगमों को पूरी तरह समाप्त करना भारत सरकार की इस ड्राफ्ट बिल की नीति से विरोधाभाषी है। अतः इस सन्दर्भ में भी निजीकरण के इस निर्णय को तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

सभा को सर्वश्री ई0 मायाशंकर तिवारी, अंकुर पाण्डेय,पंकज कुमार, बृजेश कुमार,विकास ठाकुर, दिनेश कुमार, समीर पाल, अरुण कुमार,आशुतोष राय, जितेंद्र कुमार,नागेंद्र कुमार,छोटेलाल आदि ने संबोधित किया।