एक ऐसे लेखक का निधन जिसे नोबेल तो ना मिला, मिला तो पूरी दुनिया के पाठकों का प्रेम मिलान कुंदेरा का 94 वर्ष की आयु में निधन

एक ऐसे लेखक का निधन जिसे नोबेल तो ना मिला, मिला तो पूरी दुनिया के पाठकों का प्रेम मिलान कुंदेरा का 94 वर्ष की आयु में निधन
प्रसिद्ध चेक-फ्रेंच लेखक मिलान कुंदेरा का निधन
एक ऐसे लेखक का निधन जिसे नोबेल तो ना मिला, मिला तो पूरी दुनिया के पाठकों का प्रेम मिलान कुंदेरा का 94 वर्ष की आयु में निधन

साभार:PNN24 News

 मो0 सलीम

डेस्क- अपनी कलम के लफ्जों की कुवत से दुनिया को अपना दीवाना बनाने वाले मशहूर चेक-फ़्रेंच लेखक मिलान कुंदेरा (Milan Kundera) अब नही रहे। उनका पेरिस में 94 साल की उम्र में निधन हो गया।

 मिलान कुंदेला लाइब्रेरी ने बुधवार को कहा का कि ‘एक लंबी बीमारी के बाद मंगलवार को पेरिस के अपने घर में उनकी मौत हो गई।’

कुंदेरा का जन्म चेकोस्लोवाकिया के बर्नो शहर में एक अप्रैल 1929 को हुआ था कुंदेरा ने लेखन की ओर रुख करने से पहले अपने पिता, एक प्रसिद्ध पियानोवादक और संगीतज्ञ के साथ संगीत का अध्ययन किया और पढ़ाई प्राग में हुई। 1952 में वे प्राग की फ़िल्म अकादमी में विश्व साहित्य में व्याख्याता बने, उपन्यासकार, कवि और लेखक मिलान कुंदेरा को कम्युनिस्ट शासन से असहमति के चलते देश छोड़ फ़्रांस जाना पड़ा और 1975 से ही वो वहां निर्वासित रह रहे थे।

      कुंदेरा खुद कम्युनिस्ट थे लेकिन 1968 में जब प्राग स्प्रिंग रिफॉर्म मूवमेंट शुरू हुआ और सोवियत सेना की अगुवाई में इसे कुचल दिया गया तो मौजूदा प्रशासन के प्रति उनका विरोध बढ़ गया।

उनका सबसे मशहूर उपन्यास ‘द जोक’ है जिसमें एक नौजवान व्यक्ति की कहानी है जिसे एक साधारण से व्यंग पर यूनिवर्सिटी और कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया जाता है। यह उपन्यास 1967 में प्रकाशित हुआ था।

1968 में प्राग पर सोवियत आक्रमण के बाद चेकोस्लोवाकिया में इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसी साल सिनेमा के प्रोफेसर के तौर पर कुंदेरा ने अपनी नौकरी भी खो दी थी उनका एक और उपन्यास द बुक ऑफ़ लाफ़्टर एंड फ़ार्गेटिंग के आने के बाद 1979 में उनकी चेक नागरिकता छीन ली गई। फ़्रांस ने 1981 में स्थाई नागरिकता दे दी थी।