लखनऊ में बिजलिकर्मियो की बिजली के निजीकरण के विरोध में आयोजित विशाल रैली में बनारस के हजारों बिजलिकर्मियो ने भी दिखाया दम कहा "मरते दम तक बिजली का निजीकरण नही होने देंगे"
लखनऊ में बिजलिकर्मियो की बिजली के निजीकरण के विरोध में आयोजित विशाल रैली में बनारस के हजारों बिजलिकर्मियो ने भी दिखाया दम कहा मरते दम तक बिजली का निजीकरण नही होने देंगे ,ये बिजली उधोग प्रदेश के किसानों ,आमजनमानस एवं बिजलिकर्मियो का है इसे किसी निजी कम्पनी को कैसे सौंपे:शिव विशाल की रिपोर्ट
INDIA NEWS REPORT
शिव विशाल
निजीकरण के विरोध में 29 मई से कार्य बहिष्कार का ऐलान
वाराणसी-9अप्रैल।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के बैनर तले पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में निर्णायक आन्दोलन का ऐलान आज लखनऊ में विशाल रैली में उमड़ी लाखो बिजलिकर्मियो की भीड़ के बीच पहुचे बनारस के हजारो बिजलिकर्मियो ने कर दिया।
मीडिया प्रभारी अंकुर पाण्डेय ने बताया कि आज लखनऊ में हुई बिजली कर्मचारियों की विशाल रैली जिसमे लाखो बिजलीकर्मी शामिल हुए जिसमे बनारस के हजारों निविदा/नियमित/अधिकारी एवं अवर अभियंता शामिल हुए और एक स्वर में बनारस के बिजलिकर्मियो ने कहा कि ये बिजली उधोग हमारे प्रदेश के किसानों, आमजनमानस, मेहनतकश बिजलिकर्मियो के खून पसीने से सींचा हुआ है जिसके लिए न जाने कितने नवजवान बिजलीकर्मी विधुत दुर्घटना में कालकवलित हो गए , आमजनमानस टैक्स से प्रदेश को इस उम्मीद के साथ उन्नति के रास्ते पर ले जा रही है कि एक दिन इस विभाग के प्रयास से किसानों की फसल खिलखिलायेगी,उनकी आर्थिक स्थिति सुधरेगी एवं नवजवानों को सरकारी मिलेगी जो लाखो रुपया खर्च कर अपनी पढ़ाई के साथ अपनी जवानी को तपा रहे है कि एक दिन बिजली विभाग में वो भी अपनी सेवा दे सके ।
ये सभी जानते है कि ये ऊर्जा विभाग आज की तिथि में 3 करोड़ से ज्यादा घरों को रोशन कर रहा है जिसमे एक लालच बिजलीकर्मी कार्यरत है और देश लागू आरक्षण भी इस विभाग में लागू है जो निजीकरण के बाद समाप्त हो जाएगा।।
आम सभा में प्रस्ताव पारित कर 29 मई से अनिश्चितकालीन कार्यबहिष्कार आन्दोलन का निर्णय लिया गया। इसके पूर्व 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जनजागरण अभियान चलाया जायेगा, 01 मई को बाईक रैली निकाली जायेगी, 02 मई से 09 मई तक क्रमिक अनशन होगा, 14 मई से 19 मई तक नियमानुसार कार्य आन्दोलन होगा, 20 मई को व्यापक विरोध प्रदर्शन होगा और 21 मई से 28 मई तक तीन घण्टे का कार्य बहिष्कार होगा।
बिजली कर्मचारियों की रैली अपराह्न 12.30 बजे राणा प्रताप मार्ग स्थित हाईडिल फील्ड हॉस्टल से प्रारम्भ होकर दैनिक जागरण चौराहा, सिकन्दरबाग चौराहा, अशोक मार्ग, इन्दिरा भवन, जवाहर भवन, शक्तिभवन होते हुए मीराबाई मार्ग के रास्ते वापस फील्ड हॉस्टल तक आई और फील्ड हॉस्टल पर विशाल सभा में सर्वसम्मति से इन्कलाब के नारों के बीच निजीकरण के विरोध में आन्दोलन का निर्णय लिया गया। रैली में लगभग 25 हजार बिजली कर्मी उपस्थित थे। रैली पूरे अनुशासन के साथ निकली।
आज की रैली के माध्यम से बिजलिकर्मियो ने चेतावनी दी कि यदि निजीकरण वापस न लिया गया और किसी भी बिजली कर्मी का उत्पीड़न किया गया तो देश के 27 लाख बिजली कर्मी मूक दर्शक नहीं रहेंगे और राष्ट्रव्यापी आन्दोलन प्रारम्भ करने हेतु बाध्य होंगे जिसकी सारी जिम्मेदारी उप्र सरकार की होगी।
बिजली कर्मियों की रैली के बाद आम सभा में लिये गये निर्णय के अनुसार 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक जन-जागरण पखवाड़ा चलाया जायेगा जिसके अन्तर्गत प्रदेश के समस्त सांसदों और विधायकों को निजीकरण के विरोध में ज्ञापन दिये जायेंगे तथा समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर विरोध सभा की जायेगी। 01 मई को मजदूर दिवस के दिन समस्त जनपदों और परियोजनाओं में बाईक रैली निकाली जायेगी।
02 मई से 09 मई तक शक्तिभवन मुख्यालय पर क्रमिक अनशन किया जायेगा जिसमें अलग-अलग दिन विद्युत वितरण निगमों और परियोजनाओं के बिजली कर्मी सम्मिलित होंगे। क्रमिक अनशन में उत्तरी भारत के विभिन्न प्रान्तों के बिजली कर्मी और अभियन्ता भी सम्मिलित होंगे। 14 मई से 19 मई तक नियमानुसार कार्य आन्दोलन चलाया जायेगा जिसके तहत बिजली कर्मी अपने लिये निर्धारित ड्यूटी और अपने लिये निर्धारित कार्य की अवधि के अलावा काम नहीं करेंगे। 14 मई को उत्तरी भारत के सभी प्रान्तों के बिजली कर्मी उत्तर प्रदेश में हो रहे निजीकरण के विरोध में व्यापक प्रदर्शन करेंगे।
पारित प्रस्ताव में चेतावनी दी गयी है कि यदि शान्तिपूर्ण ध्यानाकषर्ण आन्दोलन के फलस्वरूप किसी भी बिजली कर्मी पर कोई उत्पीड़नात्मक कार्यवाही की गयी तो उसी समय अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार प्रारम्भ हो जायेगा जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार की और प्रबन्धन की होगी।
आज की रैली की विशेष बात यह थी कि देश के अनेक प्रान्तों के बिजली कर्मचारी संघों और अभियन्ता संघों के शीर्ष पदाधिकारी इस रैली में सम्मिलित हुए और उन्होंने उत्तर प्रदेश के संघर्षरत बिजली कर्मियों को पुरजोर समर्थन दिया। मुख्यतया तेलंगाना, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखण्ड के पदाधिकारी और अभियन्ता बड़ी संख्या में रैली में आये। उप्र राज्य विद्युत परिषद उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों के आन्दोलन का समर्थन किया और निजीकरण तत्काल वापस लेने की मांग की।
देखे वीडियो:
https://youtu.be/gzo_UOPa9Xk?si=6B7xQdcQK1SPYqFH


