निजीकरण का विरोध: "भारत छोड़ो" आंदोलन की पूर्व संध्या पर 08 अगस्त को बिजली कर्मी "कॉर्पोरेट घरानों- सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो" अभियान चलायेंगे विधुतकर्मी

बिजली व्यवस्था बेपटरी होने का मुख्य कारण निर्दोष संविदाकर्मियों को निकालना ,भीषण गर्मी और बरसात में हजारो बिजलिकर्मियो का ट्रांसफर और निजीकरण के प्रस्ताव से बिजलिकर्मियो में उत्साह की कमी है। - जयचन्द की रिपोर्ट

निजीकरण का विरोध: "भारत छोड़ो" आंदोलन की पूर्व संध्या पर 08 अगस्त को बिजली कर्मी "कॉर्पोरेट घरानों- सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो" अभियान चलायेंगे विधुतकर्मी
निजीकरण का विरोध: "भारत छोड़ो" आंदोलन की पूर्व संध्या पर 08 अगस्त को बिजली कर्मी "कॉर्पोरेट घरानों- सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो" अभियान चलायेंगे विधुतकर्मी
निजीकरण का विरोध: "भारत छोड़ो" आंदोलन की पूर्व संध्या पर 08 अगस्त को बिजली कर्मी "कॉर्पोरेट घरानों- सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो" अभियान चलायेंगे विधुतकर्मी
निजीकरण का विरोध: "भारत छोड़ो" आंदोलन की पूर्व संध्या पर 08 अगस्त को बिजली कर्मी "कॉर्पोरेट घरानों- सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो" अभियान चलायेंगे विधुतकर्मी

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द की रिपोर्ट

 आज दूसरे दिन भी बनारस के समस्त कार्यालयों पर एक साथ बिजलिकर्मियो ने संघर्ष समिति के बैनर तले उत्पीड़नात्मक कार्यवाही एवं बिजली के निजीकरण के विरुद्ध किया विरोध प्रदर्शन,कल भी जारी रहेगा।

बिजली व्यवस्था बेपटरी होने का मुख्य कारण निर्दोष संविदाकर्मियों को निकालना ,भीषण गर्मी और बरसात में हजारो बिजलिकर्मियो का ट्रांसफर और निजीकरण के प्रस्ताव से बिजलिकर्मियो में उत्साह की कमी है।

जल्द ही समस्त जनप्रतिनिधियों को बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को जनहित में निरस्त कराने हेतु ज्ञापन देने का अभियान होगा शुरू

वाराणासी-6अगस्त। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज दूसरे दिन भी बनारस के समस्त कार्यालयों पर एक साथ शाम-5बजे कार्यालय अवकाश के बाद बिजलिकर्मियो ने बिजली के निजीकरण एवं उत्पीड़नात्मक कार्यवाही के विरुद्ध किया जबरदस्त विरोध प्रदर्शन और कल भी शाम-5बजे सभी बिजलकर्मी अपने -अपने कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

वक्ताओ ने बताया कि शीर्ष ऊर्जा प्रबन्धन केवल भारी कमीशन के चक्कर मे पूरे प्रदेश के निर्दोष जनता को महंगी बिजली के दंश झेलने को मजबूर करने का प्रयास कर रहा है क्योंकि यदि निजी कम्पनी के आने विधुत व्यवस्था में सुधार होने की बात करने वाले ये क्यों नही बता रहे कि रीडिंग से लेकर मीटर लगाने तक कि कम्पनी प्राइवेट है फिर भी उपभोक्ताओं की शिकायतें क्यों कम नही हो रही है ? यदि निजी कम्पनी अच्छी व्यवस्था कम दाम पर दें सकती है तो मध्यप्रदेश,बिहार और हिमाचल सरकार ने क्यों बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को निरस्त कर दिया? क्या उनको अपने प्रदेश की बिजली व्यवस्था अच्छी नही करनी है ?

वक्ताओ ने बताया कि ये सभी राज्य सरकारे जानती है कि यदि उस प्रदेश का मुख्यमंत्री अपने क्षेत्राधिन विभागों को बेहतर नही कर सकती तो निजी कम्पनियां कैसे बेहतर कर पाएंगी क्योंकि निजी कम्पनी तो खुद ही सरकार के इन्वेस्टमेंट से चलती है यदि किसी भी कम्पनी में सरकार का इन्वेस्टमेंट होता है तो उसका शेयर बढ़ जाता है ये स्पष्ट दिखाता है कि सरकार के नेतृत्वकर्ता से बडा कोई नही है और जिस प्रदेश के नेतृत्वकर्ता माननीय मुख्यमंत्री हमारे महाराज जी जैसा हो वहाँ के समस्त विभाग तो ऐसे ही बढ़िया काम करने लगेंगे।

वक्ताओ ने बताया कि जबसे उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ जी प्रदेश की कमान संभाले है तब से यही ऊर्जा मंत्री जी कहते नही थकते की उ0प्र0 के बिजलिकर्मियो के अथक प्रयास से हमने सबसे ज्यादा 31000मेगावाट विधुत की सप्लाई का रिकॉर्ड बनाया है हर जगह अच्छी बिजली मिल रही है ,नये ट्रांसफार्मर लग रहे है , पुराने ट्रांसफार्मर की क्षमताबृद्धि हो रही है ,और हजारो किलोमीटर नई लाइने हर साल बनाई जा रही है फिर अचानक इतनी व्यवस्था चरमरा कैसे गयी? इसका मुख्य कारण निर्दोष संविदाकर्मियों को निकालना ,भीषण गर्मी और बरसात में हजारो बिजलिकर्मियो का ट्रांसफर और निजीकरण के प्रस्ताव से बिजलिकर्मियो में उत्साह की कमी है अन्यथा इतनी बिजली व्यवस्था बेपटरी नही होती।

वक्ताओ ने बताया कि जल्द ही बनारस के समस्त जनप्रतिनिधि से मिलकर संघर्ष समिति वाराणासी के पदाधिकारी बिजली के निजीकरण के प्रस्ताव को जल्द से जल्द जनहित में निरस्त कराने हेतु ज्ञापन के माध्यम से मानसून सत्र में निरस्त कराने की अपील करेंगे क्योंकि यदि निजी कम्पनियां आयी तो निश्चित तौर पे हमारे जनप्रतिनिधि का भी अधिकार उनपर नही रहेगा और वो मुनाफे के लिए उपभोक्ताओं का शोषण करना शुरू कर देंगी वो किसी भी प्रकार के विधुत बिलो में सरचार्ज माफी या बिजली का दर को कम नही करेंगी।

वक्ताओ ने बताया कि निजीकरण प्रदेश के किसानों, गरीब और माध्यम वर्गीय उपभोक्ताओं के लिये अंधेरे का संदेश लेकर आयेगा।

अतः इससे निजात पाने के लिये "अंग्रेजों भारत छोड़ो" की तर्ज पर "कार्पोरेट घरानों - सार्वजनिक क्षेत्र में पॉवर सेक्टर छोड़ो" अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। इस अभियान के अंतर्गत 08 अगस्त से 15 अगस्त तक बिजली कर्मी प्रतिदिन तिरंगा लेकर व्यापक जनसंपर्क कर आम लोगों को बिजली के निजीकरण से होने वाले नुकसान से अवगत कराएंगे।

संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से आज पुनः अपील की है कि वे निजीकरण के पीछे हो रहे घोटाले में मुख्य भूमिका निभाने वाले पॉवर कारपोरेशन के निदेशक वित्त श्री निधि नारंग को तीसरी बार सेवा विस्तार न दें।

उल्लेखनीय है कि श्री निधि नारंग का सेवा विस्तार के बाद कार्यकाल 17 अगस्त को समाप्त हो रहा है। श्री निधि नारंग की सेवा विस्तार के लिए 14 जुलाई को पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजा था। उत्तर प्रदेश शासन ने 30 जुलाई को पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि श्री निधि नारंग को और सेवा विस्तार देने का अब कोई औचित्य नहीं है। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल ने पुनः शासन को पत्र भेजकर श्री निधि नारंग का 06 महीने के लिए और सेवा विस्तार करने की अनुशंसा की है।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि श्री निधि नारंग ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट ग्रांट थॉर्टन के साथ मिलकर कुछ चुनिंदा कॉर्पोरेट घरानों को गोपनीय दस्तावेज दे रहे हैं। यह बहुत गम्भीर बात है। ऐसी स्थिति में श्री निधि नारंग का कार्यालय तत्काल सील किया जाना चाहिए और उन्हें किसी भी परिस्थिति में सेवा विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए।

आज का समस्त कार्यालयों पर विरोध प्रदर्शन ई0 एस0के0 सिंह,ई0 विजय सिह,ओ0पी0सिंह, राजेन्द्र सिंह,जिउतलाल,अंकुर पाण्डेय, तपन चटर्जी,रमाकांत,राजेश सिंह,हेमंत श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह, पंकज यादव,रमेश यादव, अमित कुमार,राजेश सिंह,मनोज जैसवाल,रंजीत पटेल,जयप्रकाश, उदयभान ज्योतिप्रकाश भाष्कर, अनुनय पाण्डेय, जितेंद्र कुमार,धनपाल सिंह ,मनोज यादव,उमेश यादव, आदित्य पाण्डेय,रमेश,अम्बरेश,देवेंद्र , आदि के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।