निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में विधुतकर्मियो का विरोध प्रदर्शन जारी

उड़ीसा और चण्डीगढ़ में निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : जयचन्द की रिपोर्ट

निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में  विधुतकर्मियो का विरोध प्रदर्शन जारी
निजीकरण का विरोध
निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में  विधुतकर्मियो का विरोध प्रदर्शन जारी
निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में  विधुतकर्मियो का विरोध प्रदर्शन जारी

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द 

बनारस के बिजलिकर्मियो ने बिजली कार्यालयों पर किया बिजली के निजीकरण का जोरदार विरोध प्रदर्शन

उड़ीसा और चण्डीगढ़ में निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की मांग : निजीकरण के विरोध में प्रांत भर में विरोध प्रदर्शन जारी

वाराणसी-18अगस्त। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के बैनर तले आज बनारस के बिजलिकर्मियो ने बिजली कार्यालयों पर बिजली के निजीकरण के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि चण्डीगढ़ में हाल ही में किया गया बिजली का निजीकरण पूरी तरह विफल हो जाने के बाद उ.प्र. में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय निरस्त करने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने कहा कि उड़ीसा सहित देश के सभी भागों में और उ.प्र. में आगरा और ग्रेटर नोयडा में निजीकरण का प्रयोग पहले ही विफल हो चुका है। ऐसे में इस विफल प्रयोग को उ.प्र. के 42 जनपदों पर थोपने का कोई औचित्य नहीं है।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उ.प्र. के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु ट्रॉजैक्शन कंसल्टेंट के चयन के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट में निजीकरण हेतु चण्डीगढ़ को टेस्ट केस बताया गया है। चण्डीगढ़ के विद्युत विभाग को गोयनका की एमीनेंट पॉवर कंपनी लिमिटेड को 01 फरवरी 2025 को बिजली कर्मियों के प्रबल प्रतिरोध के बावजूद सौंपा गया था। चण्डीगढ़ का निजीकरण करते समय यह तर्क दिया गया था कि निजीकरण के बाद 24 घण्टे निर्बाध गुणवत्ता परक विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। उ.प्र. में निजीकरण के पीछे भी यही तर्क दिया जा रहा है।

संघर्ष समिति ने बताया कि चण्डीगढ़ में निजीकरण के बाद आए दिन 02 घण्टे से 06 घण्टे तक बिजली की कटौती की जा रही है और आम नागरिकों को भीषण गर्मी में बिना बिजली के उबलना पड़ रहा है। निजीकरण के बाद मात्र 06 महीने में ही चण्डीगढ़ में बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी से उतर गयी है। उन्होंने बताया कि चण्डीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बाबला ने कहा है कि निजीकरण के बाद आम उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है और निजी कंपनी की हेल्पलाईन भी पूरी तरह निष्क्रिय पड़ी है। चण्डीगढ़ रेजीडेंट एसोसिएशन वेलफेयर फेडरेशन के अध्यक्ष हितेश पुरी का बयान है कि घरेलू उपभोक्ताओं खास कर गरीब उपभोक्ताओं की बिजली कटौती आए दिन हो रही है, जो 06 महीने पहले सरकारी क्षेत्र में नहीं होती थी। हालात इतने खराब हो गए हैं कि मुख्य सचिव को सीधे अपने हाथ में कमान लेनी पड़ी है।

संघर्ष समिति ने कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण हेतु तैयार किये गए आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट चण्डीगढ़ के आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट के आधार पर तैयार किया गया है। चण्डीगढ़ में लगभग 22 हजार करोड़ रुपए की विद्युत विभाग की परिसम्पत्तियों को बेचने हेतु मात्र 124 करोड़ रुपए की रिजर्व प्राइस रखी गयी थी और इस डाक्यूमेंट के आधार पर चण्डीगढ़ का विद्युत विभाग मात्र 871 करोड़ रुपए में बेच दिया गया।

संघर्ष समिति ने कहा कि उ.प्र. पॉवर कार्पोरेशन के चेयरमैन और पूर्व निदेशक वित्त निधि नारंग द्वारा कार्पोरेट घरानों की मिलीभगत से पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम की 01 लाख करोड़ रुपए की परिसम्पत्तियों को बेचने हेतु चण्डीगढ़ की तर्ज पर रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड़ रुपए रखी गयी है। इस प्रकार यह आर.एफ.पी. डाक्यूमेंट लूट का दस्तावेज है, अतः इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।

संघर्ष समिति ने कहा कि उ.प्र. के 42 गरीब जनपदों में बिजली के निजीकरण का भयावह प्रयोग करने के पहले उ.प्र. में ही ग्रेटर नोयडा और आगरा के निजीकरण की समीक्षा किया जाना बहुत जरुरी है। उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोयडा में निजी कंपनी के खराब परफार्मेंस को देखते हुए उ.प्र. सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ग्रेटर नोयडा का निजीकरण का करार रद्द कराने के लिए मुकदमा लड़ रही है। इसी प्रकार आगरा में टोरेंट पॉवर कंपनी ने पॉवर कार्पोरेशन का 2200 करोड़ रुपए का बिजली राजस्व हड़प लिया है और निजी कंपनी को लागत से कम मूल्य पर बिजली देने के चलते पॉवर कार्पोरेशन को 10 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है।

विरोध सभा को सर्वश्री ई0 रामअशीष, अंकुर पाण्डेय,पंकज कुमार, अमित कुमार, मनोज यादव,रंजीत कुमार, धनपाल सिंह,अजय पाण्डेय,विनय कुमार, विकास भारती, अभिषेक सिंह,हेमंत श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया।

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