बिहार में बाहर किए गए मतदाता अब आधार कार्ड से कर सकते हैं दावा, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में बाहर किए गए मतदाताओं के लिए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं को बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर किया गया है, वे आधार कार्ड को पहचान दस्तावेज़ के रूप में उपयोग कर ऑनलाइन अपनी मांग दायर कर सकते हैं। इससे पहले चुनाव आयोग 11 अन्य दस्तावेज़ों को मान्यता देता था, लेकिन अब आधार कार्ड की भी पहचान स्वीकार की गई है।
कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मतदाता, जिनके नाम चुनाव से पहले विकल्पों से बाहर रह गए हैं, वे 1 सितंबर 2025 तक अपने आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। इसके लिए फिजिकल दस्तावेज़ जमा करना जरूरी नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के राजनीतिक दलों से भी कहा है कि वे बूथ स्तर के एजेंटों को सक्रिय करें जो लोगों की मदद कर सकें।
चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई सूची में लगभग 35 लाख मतदाता पहले बाहर कर दिए गए थे, जिनमें से मृतक और दोहरे नाम हटा जाने के बाद यह आंकड़ा निकाला गया। सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक पार्टियों के रवैये पर भी नाराजगी जताई क्योंकि वे इस मामले में ज्यादा सक्रिय नहीं दिखे।
यह आदेश बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों के मतदान के अधिकार को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे लाखों मतदाता अपने अधिकारों की रक्षा कर सकेंगे और वोटर लिस्ट में वापस जुड़ने का मौका पाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह सभी भारतीयों के लिए चुनाव प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाए, जिससे कोई भी नागरिक वोटर लिस्ट से अनजाने में बाहर न रहे।


