विधुत संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज 295वें दिन भी बनारस के बिजलिकर्मियो ने समस्त कार्यालयो पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के साथ पांच शहरों के निजीकरण की भी तैयारी : निजीकरण के विरोध में प्रांत व्यापी आंदोलन जारी जयचन्द वाराणसी

विधुत संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज 295वें दिन भी बनारस के बिजलिकर्मियो ने समस्त कार्यालयो पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
निजीकरण का विरोध 295 वे दिन जारी
विधुत संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज 295वें दिन भी बनारस के बिजलिकर्मियो ने समस्त कार्यालयो पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

INDIA NEWS REPORT

 जयचन्द

वाराणासी-18सितम्बर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज 295वें दिन भी बनारस के बिजलिकर्मियो ने समस्त कार्यालयो पर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

वक्ताओ ने आरोप लगाया है कि पांच शहरों की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के समानांतर इन शहरों के निजीकरण की भी तैयारी चल रही है। निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के 295 वें दिन आज बिजली कर्मियों ने प्रदेश के समस्त जनपदों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि विदित हुआ है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के आरएफपी डॉक्यूमेंट पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा लगाई गई आपत्तियों का जवाब तैयार कर लिया गया है और आरएफपी डॉक्यूमेंट के अनुमोदन के लिए पावर कॉरपोरेशन किसी भी समय विद्युत नियामक आयोग में जा सकता है जिससे निजीकरण की प्रक्रिया तीव्र गति से आगे बढ़ाई जा सके।

संघर्ष समिति ने विद्युत नियम आयोग के अध्यक्ष श्री अरविंद कुमार से अपील की है कि यदि पावर कारपोरेशन का निजीकरण का आरएफपी डॉक्यूमेंट अनुदान के लिए आता है तो पहले तो उसे अस्वीकृत कर दिया जाए और अगर उस पर चर्चा भी की जाती है तो उसके पहले विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाए क्योंकि निजीकरण से बिजली कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय होने जा रहा है।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के समानांतर उत्तर प्रदेश के पांच अन्य शहरों के निजीकरण की तैयारी भी अंदर-अंदर की जा रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ शहर की बिजली व्यवस्था का ऊर्ध्वाधर पुनर्गठन (वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग) करने के पीछे मुख्य उद्देश्य इन शहरों की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जाना है।

संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर आशीष गोयल जो ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन के महामंत्री के रूप में काम करने में अधिक रुचि ले रहे हैं, उन्होंने आल इंडिया डिस्कॉम एसोशिएशन की वेबसाइट पर निजीकरण पर अपनी उपलब्धियां गिनाने के क्रम में स्वयं एक नया पॉइंट जोड़ा है जिसमें इस बात को लिखा है कि पूर्वांचल विद्युत निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ सुधार हेतु कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बरेली और लखनऊ की बिजली व्यवस्था की वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की जा रही है। इससे बिल्कुल साफ हो जाता है कि इन शहरों के निजीकरण की साथ-साथ तैयारी चल रही है।

संघर्ष समिति ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में रहते हुए देश के जिन शहरों में भी बिजली व्यवस्था में सर्वाधिक सुधार किया गया उनमें से किसी भी शहर में इस प्रकार तुगलकी फरमान जारी कर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग जैसी विचित्र व्यवस्था नहीं लागू की गई। संघर्ष समिति ने उदाहरण देकर कहा बेंगलुरु, पटियाला, पुणे, हैदराबाद, विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम, गुड़गांव, हिसार आदि ऐसे कई शहर है जहां बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार किया गया है और यह सब सरकारी क्षेत्र में चल रही व्यवस्था के अंतर्गत ही किए गए हैं।

सभा को सर्वश्री ई0 अभिषेक कुमार,अंकुर पाण्डेय, सतवंत कुमार,मिथिलेश कुमार, अनुनय पाण्डेय,योगेश कुमार,कौशलेंद्र सिंह,अखिलेश कुमार,मनोज यादव,रंजीत कुमार, योगेंद्र कुमार,नन्हेलाल,अरुण कुमार, रमेश सिंह,काफी ने संबोधित किया।

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