बिहार NDA में सीटों का पेंच: छोटे दलों की बड़ी मांगों से गठबंधन में दरार

बिहार NDA में सीटों का पेंच: छोटे दलों की बड़ी मांगों से गठबंधन में दरार

नई दिल्ली:** बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का ऐलान अभी भले ही न हुआ हो, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीट बंटवारे को लेकर घमासान तेज हो गया है। गठबंधन के दो बड़े दल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU), के बीच सीटों पर लगभग सहमति बन चुकी है, लेकिन छोटे सहयोगी दलों की महत्वकांक्षाओं ने मामले को उलझा दिया है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) जैसी पार्टियां अपनी-अपनी मांगों पर अड़ी हैं, जिससे सीट शेयरिंग का फॉर्मूला फाइनल नहीं हो पा रहा है।

#### **क्या है सीटों का गणित और कहां फंसा है पेंच?**

बिहार विधानसभा में कुल 243 सीटें हैं[1]. सूत्रों के मुताबिक, NDA के बड़े दल बीजेपी और जेडीयू लगभग बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमत हैं[2]. दोनों पार्टियां 101 से 102 सीटों पर चुनाव लड़ सकती हैं[3][4]. इस तरह, दोनों दलों के पास करीब 201-205 सीटें चली जाएंगी[5][6]. इसके बाद बाकी की लगभग 41-45 सीटें ही सहयोगी दलों के लिए बचती हैं[2].

 असली पेंच यहीं से शुरू होता है। एनडीए में शामिल 5 दलों के बीच सीटों का बंटवारा एक बड़ी चुनौती बन गया है[6][7]. छोटे दलों की मांगें उपलब्ध सीटों से कहीं ज़्यादा हैं:

* **चिराग पासवान (LJP-R):** चिराग पासवान की पार्टी 40 से ज़्यादा सीटों की मांग कर रही है[2]. हालांकि, बीजेपी उन्हें 20-25 सीटें देने पर विचार कर रही है[6]. चिराग पासवान ने हालिया लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के 100% स्ट्राइक रेट (5 में से 5 सीटों पर जीत) का हवाला देते हुए अपनी ताकत का एहसास कराया है, उन्होंने यह भी कहा है कि वे हर सीट पर 20,000 से 25,000 वोटों को प्रभावित कर सकते हैं

* **जीतन राम मांझी (HAM):** जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' 15 से 20 सीटों की मांग कर रही है[6]. पिछले चुनाव में 'हम' 7 सीटों पर लड़ी थी और 4 पर जीत हासिल की थी[6]. मांझी ने चेतावनी दी है कि अगर सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो उनकी पार्टी 100 सीटों पर उम्मीदवार उतार सकती है[6].

* **उपेंद्र कुशवाहा (RLM):** उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) भी 8 से 10 सीटों पर नजर गड़ाए हुए है[2].

**क्यों अहम हैं छोटे दल?**

2020 के विधानसभा चुनाव में NDA और महागठबंधन के बीच जीत-हार का अंतर बहुत कम था, जो छोटे दलों के महत्व को रेखांकित करता है[8]. चिराग पासवान की LJP का पासवान समुदाय में प्रभाव है, जो बिहार के वोटरों का लगभग 6% हिस्सा है, इसी तरह, मांझी और कुशवाहा की अपनी-अपनी जातियों में पकड़ है। बीजेपी इस बात से वाकिफ है कि इन दलों को नाराज करने से चुनाव में नुकसान हो सकता है

हालांकि, चिराग पासवान जैसे नेता कह रहे हैं कि NDA एकजुट है और 225 से ज़्यादा सीटें जीतेगी,लेकिन सीटों को लेकर उनकी और मांझी की मुखरता गठबंधन के भीतर की बेचैनी को दर्शाती है,हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच तैयारियों को लेकर चर्चा हुई,लेकिन सीट बंटवारे पर अंतिम सहमति अब भी बाकी है। यह रस्साकशी दिखाती है कि चुनाव से पहले सहयोगियों को साधना NDA के लिए एक

बड़ी चुनौती है