297वें दिन संघर्ष समिति विधुतकर्मियो का आंदोलन रहा जारी,मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से निजीकरण का प्रस्ताव निरस्त करने की अपील किया गया।
संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज 297वें दिन भी बनारस के बिजलिकर्मियो ने बिजली के निजीकरण का जमकर विरोध करते हुये माननीय मुख्यमंत्री जी से अपील किया कि बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव जनहित में तत्काल निरस्त कराने का आदेश जारी कराये: जयचन्द की रिपोर्ट
INDIA NEWS REPORT
जयचन्द की रिपोर्ट
त्योहारों के पूर्व उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां समाप्त करने तथा फेसियल अटेंडेंस के नाम पर रोका गया वेतन तत्काल जारी करने की मांग: दशहरा और दीपावली पर्व के दौरान आंदोलन के साथ निर्बाध बिजली आपूर्ति की जायेगी: निजीकरण की प्रक्रिया वापस लेकर कार्य का अच्छा वातावरण बनाने की मांग
वाराणासी-20 सितम्बर:विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के बैनर तले आज 297वें दिन भी बनारस के बिजलिकर्मियो ने बिजली के निजीकरण का जमकर विरोध करते हुये माननीय मुख्यमंत्री जी से अपील किया कि बिजली के निजीकरण का प्रस्ताव जनहित में ततकाल निरस्त कराने का आदेश जारी कराये क्योंकि आपके नेतृत्व में अब तक ऊर्जा विभाग के बिजलिकर्मियो ने अपने दिन-रात के मेहनत से रिकॉर्ड बिजली आम उपभोक्ताओं तक पहुचाया है और आगे भी निरन्तर इस कार्य मे लगे हुए है।
वक्ताओ ने बताया कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि सबसे बड़े पर्व दशहरा और दीपावली के पूर्व बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लिया जाय और निजीकरण की प्रक्रिया को निरस्त कर त्योहारों के पूर्व ऊर्जा निगमों में कार्य का अच्छा वातावरण बनाया जाय।
संघर्ष समिति ने बिजली कर्मियों से अपील की है कि त्योहारों के मद्देनजर बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध के साथ-साथ उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति का कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता पर सुनिश्चित करें।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में बिजली कर्मी विगत दस माह से आंदोलन रत हैं किंतु इस दौरान बिजली कर्मियों ने उपभोक्ताओं को कोई तकलीफ नहीं होने दी है। संघर्ष समिति ने कहा कि इस दौरान बिजली कर्मियों ने महाकुंभ की बिजली व्यवस्था में अतुलिनीय कार्य करके दिखाया। मई , जून की भीषण गर्मी में बिजली कर्मी आंदोलन रत भी रहे और देश में सर्वाधिक बिजली आपूर्ति का रिकॉर्ड भी बनाया। उपभोक्ताओं को कोई तकलीफ नहीं होने दी।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन को बिजली कर्मियों के योगदान को देखते हुए नवरात्र के पहले समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 की हड़ताल के दौरान और डाउनसाइजिंग के नाम पर हटाए गए अत्यंत अल्प वेतन भोगी सभी संविदा कर्मियों को तत्काल कार्य में वापस लिया जाय। फेशियल अटेंडेंस के नाम पर जिन हजारों कर्मचारियों का वेतन रोका गया है उन्हें त्यौहार के पहले तत्काल वेतन दिया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि कार्य का अच्छा वातावरण बनाने के लिए यह आवश्यक है कि मार्च 2023 और चल रहे आंदोलन के दौरान की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां तो वापस ली ही जाय, साथ ही पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का निर्णय भी वापस लिया जाय।
संघर्ष समिति ने कहा कि निजीकरण के विरोध में आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता। त्योहारों के दौरान आंदोलन भी चलेगा और निर्बाध बिजली आपूर्ति भी प्रदान की जाएगी।
सभा को सर्वश्री अंकुर पाण्डेय, एस0के0भूषण,रंजीत पटेल, धनपाल सिंह,गुलजार अहमद,विशाल सिंह,योगेंद्र कुमार,भैयालाल,नन्हेलाल, मिथिलेश कुमार, आदि ने संबोधित किया।
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