संघर्ष समिति उ0प्र0के आह्वान पर बिजली के निजीकरण के विरुध प्रदेश के समस्त जनपदों की भांति ही बनारस के बिजलकर्मियो ने आज आंदोलन के 380वें दिन भी जमकर विरोध प्रदर्शन किया

नया टेंडर करके मनमाने ढंग से हजारों संविदा कर्मियों की छटनी से पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में बिजली कर्मियों में आक्रोश : वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर बिजली व्यवस्था डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी देने की तैयारी : एस्मा लगाए जाने का संघर्ष समिति ने किया विरोध -जयचन्द

संघर्ष समिति उ0प्र0के आह्वान पर बिजली के निजीकरण के विरुध प्रदेश के समस्त जनपदों की भांति ही बनारस के बिजलकर्मियो ने आज आंदोलन के 380वें दिन भी जमकर विरोध प्रदर्शन किया
निजीकरण का विरोध

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द

 वाराणसी-12दिसम्बर 2025 - संघर्ष समिति के आह्वान पर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज लगातार 380 वें दिन बनारस के बिजली कर्मियों ने समस्त जनपदों की भांति ही बनारस में भी व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने आज यहां जारी बयान में बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में संविदा कर्मियों का नया टेंडर कर मनमाने ढंग से हजारों संविदा कर्मियों को रोज निकाला जा रहा है जिससे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में कार्य का वातावरण पूरी तरह बिगड़ गया है और बिजली कर्मियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से निवेदन किया है कि वह इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर संविदा कर्मियों की छटनी रोकने का निर्देश देने की कृपा करें। संघर्ष समिति ने बताया कि मई 2017 के आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्र में प्रत्येक विद्युत उपकेंद्र पर 36 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्र में 20 कर्मचारी होनी चाहिए। अब नए टेंडर के अनुसार इस आदेश के सर्वथा उल्लंघन में 48% तक संविदा कर्मचारी हटाए जा रहे हैं।

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग का प्रयोग विफल हो जाने के बावजूद विद्युत वितरण निगमों में अन्य शहरों में इसे लागू करने का मुख्य मकसद इन शहरों की बिजली व्यवस्था डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी को सौंपने की तैयारी है।

संघर्ष समिति ने बताया कि भदोही, मिर्जापुर, आजमगढ़, मऊ, और फतेहपुर के अलावा अब सीतापुर, रायबरेली, उन्नाव और हरदोई में भी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग कर बड़े पैमाने पर पदों को समाप्त करने की तैयारी हो रही है। संघर्ष समिति ने कहा कि पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन निजीकरण के नाम पर प्रदेश की बिजली व्यवस्था पटरी से उतारने पर आमादा है।

संविदा कर्मियों की लगातार हो रही छटनी के आंकड़े देते हुए संघर्ष समिति ने बताया की वाराणसी में 417, कुशीनगर में 450, बस्ती में 453, गोरखपुर में 326, भदोही में 429, सोनभद्र में 535, प्रयागराज में 526 और कौशांबी में 569 अत्यंत अल्प वेतन भोगी संविदा कर्मियों को नया टेंडर कर नौकरी से हटाया जा चुका है। इस प्रकार पिछले कुछ दिनों में लगभग 3705 संविदा कर्मियों की पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में छटनी की जा चुकी है। इससे बिजली कर्मी आंदोलित हैं।

संघर्ष समिति ने अति आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1966 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सरकार द्वारा हड़ताल पर प्रतिबंध लगाने हेतु एस्मा लगाए जाने का प्रबल विरोध किया है । संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली सेक्टर में पिछले 25 साल से लगातार एस्मा लगा हुआ है। अब बिजली कर्मचारियों का समर्थन करने वाले राज्य कर्मचारियों, स्थानीय निकाय और निगमों के कर्मचारियों पर भी एस्मा लगा दिया गया है जो लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।

सभा को सर्वश्री ई0 एस0के0सिंह,ई0विजय सिंह, अंकुर पाण्डेय,विनय सिंह,मनोज यादव,राजेश सिंह,संदीप सिंह, राजेश पटेल, धनपाल सिंह,हेमन्त श्रीवास्तव, अभिषेक सिंह,अभिषेक शुक्ला,रंजीत कुमार, आदि ने संबोधित किया।