निजीकरण के विरोध का 385वां दिन-बैठक कर संविदाकर्मियों के छटनी व उपभोक्ताओं के साथ प्रबंधन द्वारा उलंघन कर प्रताड़ित करने आदि लेकर संघर्ष समिति की बनाई गई रणनीति ,उपभोक्ता हित के लिए देश के संसद द्वारा बनाया गया कानून है इसका उल्लंघन ठीक नही-संघर्ष समिति

बैठक में वक्ताओ ने बताया कि ऊर्जा प्रबन्धन लगातार जहाँ एक ओर उभोक्ताओ के अधिकटो का हनन कर जबरन स्मार्ट मीटर लगाकर पोस्टपेड संयोजन को प्रीपेड में बदल रहा है और नए संयोजन पर स्मार्ट मीटर का चार्ज वसूल रहा है जबकि कॉस्ट डाटा बुक में इसका प्रावधान ही नही है जबकि संसद में माननीय केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री जी द्वारा भी पोस्टपेड संयोजन को ही डिफॉल्ट मोड़ बताया गया है उसके बाद भी ऊर्जा प्रबन्धन लगातार उभोक्ताओ से साथ तानाशाही कर रहा है वही दूसरी ओर पूर्वांचल सहित अन्य डिस्कॉम का AT&C लॉस में लगभग 10प्रतिशत कमी के वावजूद संविदाकर्मियों की छटनी कर बिजली व्यवस्था बेपटरी कर उपभोक्ताओं की नजर में बिजलकर्मियो को नकारा साबित कर निजीकरण को बढ़ावा देने पर आमादा है ।: जयचन्द की रिपोर्ट

निजीकरण के विरोध का  385वां दिन-बैठक कर संविदाकर्मियों के छटनी व उपभोक्ताओं के साथ प्रबंधन द्वारा उलंघन कर प्रताड़ित करने आदि लेकर संघर्ष समिति की बनाई गई रणनीति ,उपभोक्ता हित के लिए देश के संसद द्वारा बनाया गया कानून है इसका उल्लंघन ठीक नही-संघर्ष समिति
निजीकरण का विरोध
निजीकरण के विरोध का  385वां दिन-बैठक कर संविदाकर्मियों के छटनी व उपभोक्ताओं के साथ प्रबंधन द्वारा उलंघन कर प्रताड़ित करने आदि लेकर संघर्ष समिति की बनाई गई रणनीति ,उपभोक्ता हित के लिए देश के संसद द्वारा बनाया गया कानून है इसका उल्लंघन ठीक नही-संघर्ष समिति

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द वाराणसी

वाराणसी के बिजलकर्मियो ने निजीकरण के विरुद्ध आंदोलन के 385वें दिन आज बैठक कर निजीकरण का विरोध करते हुये संविदाकर्मियों के छटनी और उभोक्ताओ के साथ विधुत कानूनों का ऊर्जा प्रबन्धन द्वारा उलंघन कर प्रताड़ित करने आदि को लेकर रणनीति भी बनाई*संघर्ष समिति ने कहा बिजली बोर्ड कानून से ही चलेगा उपभोक्ता हित के लिए देश के सम्मानित संसद द्वारा बनाया गया कानून इसका उलंघन ठीक नही

ओबरा और अनपरा में ज्वाइंट वेंचर समाप्त कर उत्पादन निगम को परियोजनायें देने की मांग : ढाई साल बाद भी जॉइंट वेंचर में कार्य न शुरू होना चिंताजनक : उत्पादन निगम को परियोजना देने से 35-40 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती मिलेगी बिजली

वाराणसी-17दिसम्बर2025।पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में लगातार चल रहे आंदोलन के आज 385वें दिन बनारस के बिजली कर्मियों ने एक बैठक भिखारीपुर स्थित यूनियन कार्यालय में आहूत कर निजीकरण के साथ ही संविदाकर्मियों के छटनी को लेकर अपनी रणनीति बनाई।

संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्यमंत्री मा० योगी आदित्यनाथ जी से मांग की है कि व्यापक जनहित में बिजली की निजीकरण का परास्त निरस्त कराने के साथ ही मध्य प्रदेश सरकार की तरह ही ओबरा और अनपरा में लग रही नई बिजली इकाइयों को ज्वाइंट वेंचर के स्थान पर प्रदेश के व्यापक हित में राज्य विद्युत उत्पादन निगम को देकर प्रदेश की बिजली व्यवस्था सुदृढ़ बनाकर उपभोक्ताओं और बिजलकर्मियो कि नजर में अपनी छवि को निखारने के काम करें।

संघर्ष समिति ने मध्य प्रदेश सरकार का उदाहरण देते हुए कहा है कि मध्य प्रदेश सरकार ने अमरकंटक बिजली घर में जॉइंट वेंचर में दो साल तक कोई काम न शुरू होने के बाद जॉइंट वेंचर समाप्त कर नई बनने वाली इकाई मध्य प्रदेश के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया । यही स्थिति उप्र में भी आ गई है।

मध्य प्रदेश की तरह उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट ने 27 जुलाई 2023 को यह निर्णय लिया था कि 2×800 ओबरा डी और 2×800 अनपरा ई ताप बिजली परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर में एनटीपीसी के साथ लगाया जाएगा। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में एक बात समान थी कि राज्य के उत्पादन गृह में पहले से चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर को अनुमति दी गई थी जो विवाद का मुख्य कारण है। राज्य के उत्पादन निगम की चल रही इकाइयों के साथ ज्वाइंट वेंचर में नई परियोजना लगाने का निर्णय पूरे देश में और कहीं नहीं लिया गया है।

संघर्ष समिति ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यतः 6 बिंदुओं को आधार मानते हुए जॉइंट वेंचर का अपना दो साल से अधिक पुराना निर्णय संशोधित कर नई इकाई जॉइंट वेंचर की जगह राज्य के उत्पादन निगम को देने का निर्णय लिया है।

संघर्ष समिति ने बताया कि छह बिंदुओं में सबसे बड़ा बिंदु यह है कि राज्य का उत्पादन निगम यदि एक्सटेंशन प्रोजेक्ट बनाएगा तो परियोजना की कई कामन फैसेलिटीज को देखते हुए बिजली की उत्पादन लागत ज्वाइंट वेंचर की तुलना में 35 से 40 पैसे प्रति यूनिट कम हो जाएगी।

इसके अतिरिक्त एक ही परिसर में उत्पादन निगम और ज्वाइंट वेंचर की परियोजनाएं रहने से कई प्रकार की परिचालकीय दिक्कतें उत्पन्न होने की संभावना व्यक्ति की गई थी। एक ही परिसर में दो स्वामित्व की परियोजनाएं रहने से भविष्य में अनेक प्रकार के कानूनी विवाद खड़े होने की स्थित आ सकती है।

ऑपरेशनल डिफिकल्टीज में सबसे बड़ी समस्या रेलवे से कोल् ट्रांसपोर्टेशन की और ऐश डिस्पोजल की सामने आने वाली है। एक ही रेलवे ट्रैक होने से कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि परियोजना के लिए कोयला अनलोड करने में अनावश्यक विलंब होगा।

संघर्ष समिति ने कहा कि ओबरा डी और अनपरा ई परियोजनाओं के लिए कोयला खदान के मुहाने से (coal pit head ) कोयला लिंकेज नहीं मिल पाया है और 500 से 700 किलोमीटर दूर से कोयला लाने के कारण ज्वाइंट वेंचर में बिजली की उत्पादन लागत बहुत अधिक बढ़ने की संभावना है। राख का डिस्पोजल एक बड़ी समस्या होने जा रही है। सामान्यत: एक ही ऐश पौंड होने से बहुत ही दुरूह स्थिति उत्पन्न होने की संभावना व्यक्त की गई है।

संघर्ष समिति ने कहा कि इन मुख्य बातों को संज्ञान में लेते हुए मध्य प्रदेश की तरह उप्र में भी जॉइंट वेंचर का प्रस्ताव निरस्त कर परियोजना राज्य के उत्पादन निगम को तत्काल दी जाय।

संघर्ष समिति ने कहा कि इन स्थितियों को देखते हुए प्रदेश को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल ज्वाइंट वेंचर निरस्त करने का निर्णय लेना चाहिए अन्यथा विलंब होने से परियोजना की लागत बढ़ रही है तथा और अधिक नुकसान होने की संभावना है।

सभा को सर्वश्री ई0 मायाशंकर तिवारी,आर0के0वाही, राजेन्द्र सिंह,ओ0पी0 सिंह,संदीप कुमार, अंकुर पाण्डेय,अजित पटेल,पवन कुमार, मनोज कुमार, अरविंद कौशनन्दन,देवेन्द्र सिंह आदि ने सम्बोधित किया।