वाराणसी में अजब चुनाव की गजब कहानी पीएम मोदी के सामने चुनाव लड़ने आ रहे है अजीबो गरीब प्रत्याशी

वाराणसी में अजब चुनाव की गजब कहानी पीएम मोदी के सामने चुनाव लड़ने आ रहे है अजीबो गरीब प्रत्याशी यह खबर अभी ब्रेकिंग न्यूज है. इसके अपडेट आ रहे हैं. जैसे-जैसे अपडेट आते जाएंगे हम आप तक पहुंचाएंगे:जगदीश शुक्ला

वाराणसी में अजब चुनाव की गजब कहानी पीएम मोदी के सामने चुनाव लड़ने आ रहे है अजीबो गरीब प्रत्याशी

INDIA NEWS REPORT

-जगदीश शुक्ला 

 लोकसभा चुनाव 2024 : वाराणसी लोकसभा चुनाव सीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार वाराणसी से ही चुनाव लड़ने जा रहे हैं ऐसे में ये सीट देश की सबसे बड़ी हॉट सीट बनी है ख़ास बात तो ये की पीएम मोदी के समाने चुनाव लड़ने के लिए अजब गजब प्रत्याशियों की होड़ लग गई है। कोई अपने आप को कागज में जिन्दा रखने के लिए लड़ रहा है तो कोई घोड़े पर चढ़कर नामांकन करने आ रहा है तो कोई रोटी प्याज खाते पीएम मोदी को टक्कर देने की बात कर रहा. आखिर क्या है वाराणसी से चुनाव लड़ने की कहानी. दरअसल, लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि कोई भी किसी के विरोध में चुनाव लड़ सकता है इसी का नायब नमूना काशी में नामांकन के दौरान देखने को मिला. सबसे पहले पीडीएम यानी पिछड़ा दलित मुसलमान पार्टी कहती है कि हमारी चुनौती है हमारे साथ ओवैसी है. हम मुद्दों के आधार पर चुनाव लडेंगे इनका अपना ही दवा है. चुनाव लड़ने पर कहचे हैं हमें तो विश्वास है कि हम ही चुनाव जीतेंगे।

 दूसरी तरह घोड़े पर होकर पहुंचे नामांकन करने विनोद कुमार यादव इनका कहना है कि सरकार जो भी आती है जनता को ध्यान में नहीं रखती. इसलिए हम उनका ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं घोड़े पर इसलिए आए की पेट्रोल का दाम बढ़ गया है।

 कागजों में मुर्दा घोषित हूं.. लेकिन चुनाव लड़कर जिंदा साबित करना चाहता हूं- प्रत्याशी एक प्रत्याशी तख्ती अपने गले में लटकाया हुआ पहुंचा, जिसमें लिखा था मैं जिंदा हूं इनका नाम संतोष सिंह मूरत है जो अपने जिंदा होने के अस्तित्व के लिए लगातार 20 वर्षो से लड़ रहे है। इनका कहना है की कागजों में हम मुर्दा घोषित हो चुके हैं चुनाव इसलिए लड़ना चाहते हैं ताकि हमे जिंदा होने का प्रमाण मिल सके. इसके बाद हमें नजर आया एक शख्स प्याज रोटी खाने में लगा था. जमीन पर बैठकर दरअसल ये महोदय पूर्वांचल महापंचायत पार्टी से है इनका नाम है मिंटू इनका आरोप है की इन्हें नामांकन ही नहीं करने दिया जा रहा है. पेशे से ये खेती किसानी करते हैं किसी तरह अपनी रोजी रोटी चलाते हैं पर जनता के दर्द को दूर करने के लिए चुनाव लड़ रहे है। वही टीवी पर दिखने वाले और स्टेज शो में नरेंद्र मोदी की मिमिक्री करने वाले श्याम रंगीला भी बनारस से ही चुनाव लड़ रहे है लेकिन विडम्बना ये है कि लोग सिर्फ उनको टीवी पर ही देख कर पसन्द करते है हँसने के लिए वाराणसी में नामांकन के लिए 10 प्रस्तावक तक श्याम रंगीला को अब तक नही मिल पाये।

 राजस्थान, मध्य प्रदेश से भी उम्मीदवार पीएम के खिलाफ मैदान में उतरे

 इसके बाद एक उम्मीदवार के गले में कई मेडल लटकाए हुए मनीष यादव हैं, जो पिछले कई सालों से अपने समाजसेवा के काम को दर्शाते हैं ये मानवीय भारत पार्टी से चुनाव मैदान में है समाज के उत्थान के लिए चुनाव लड़ने का दावा करते हैं. इतना ही नहीं पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों की लिस्ट सिर्फ वाराणसी या उत्तर प्रदेश तक की ही सीमित नहीं है. बल्कि राजस्थान, सतना से भी कई उम्मीदवार मोदी के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

बहरहाल देश के प्रधानमंत्री के सामने चुनाव लड़ने वालो की होड़ सी लगी है. ताकि वो भी सुर्खियों में आ सकते साल 2014 में पीएम के खिलाफ 40 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे तो 2019 में 26 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा अब इस बार 80 से अधिक लोग नामांकन पत्र ले चुके हैं उम्मीद में इनमें से शायद ही किसी की जमानत बच पाए पर चर्चा में जरूर रहेंगे।