विधुत संघर्ष समिति ने बिजली के सभी संविदाकर्मियों को होमगार्ड और सफाईकर्मीयो की तरह मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार विधुत दुर्घटना पर 35-40लाख रुपये देने का किया मांग

वाराणसी में हुए चिन्तन मंथन शिविर में निजीकरण का विकल्प खारिज करने का संकल्प : पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के साथ कई बड़े शहरों के फ्रेंचाइजी के समाचार से बिजली कर्मियों का गुस्सा फूटा: जयचन्द की रिपोर्ट

विधुत संघर्ष समिति ने बिजली के सभी संविदाकर्मियों को होमगार्ड और सफाईकर्मीयो की तरह मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार विधुत दुर्घटना पर 35-40लाख रुपये देने का किया मांग
विधुत संघर्ष समिति ने बिजली के सभी संविदाकर्मियों को होमगार्ड और सफाईकर्मीयो की तरह मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार विधुत दुर्घटना पर 35-40लाख रुपये देने का किया मांग
विधुत संघर्ष समिति ने बिजली के सभी संविदाकर्मियों को होमगार्ड और सफाईकर्मीयो की तरह मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार विधुत दुर्घटना पर 35-40लाख रुपये देने का किया मांग
विधुत संघर्ष समिति ने बिजली के सभी संविदाकर्मियों को होमगार्ड और सफाईकर्मीयो की तरह मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार विधुत दुर्घटना पर 35-40लाख रुपये देने का किया मांग

INDIA NEWS REPORT

वाराणसी:जयचन्द

वाराणसी-07 अक्टूबर। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0 के प्रदेश संयोजक ई0 शैलेन्द्र दुबे जी की अध्यक्षता में आज जहाँ एक ओर वाराणासी में संघर्ष समिति के समस्त घटक संगठन के पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक बिजली के निजीकरण के विरुद्ध आगामी संघर्ष को सफलतापूर्वक सफल बनाने हेतु हुई वही दूसरी ओर उ0प्र0 राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के तत्वावधान में वाराणसी में आयोजित "चिन्तन मंथन शिविर - संदर्भ निजीकरण" में अभियंताओं ने पॉवर कारपोरेशन द्वारा दिए गए निजीकरण के विकल्प को एक स्वर में खारिज कर दिया और संकल्प लिया कि निजीकरण के विरोध में आन्दोलन और तेज किया जायेगा तथा निजीकरण के विरोध में संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता।

चिन्तन मंथन शिविर में मुख्य वक्ता आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ आशीष गोयल द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के बाद दिए जाने वाले विकल्पों का विस्तार से विश्लेषण कर उसे खारिज कर दिया । उन्होंने विकल्प के तीनों बिन्दुओं निजी कंपनी की नौकरी ज्वॉइन कर लें, अन्य निगमों में वापस आ जाएं और स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले लें, का विश्लेषण करते हुए यह बताया कि तीनों ही विकल्प बिजली कर्मियों के भविष्य को बर्बाद कर देंगे अतः निजीकरण किसी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

इसके पूर्व वाराणसी में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के वाराणसी के पदाधिकारियों की कोर मीटिंग को संबोधित करते हुए शैलेन्द्र दुबे, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, माया शंकर तिवारी, अंकुर पाण्डेय, ए पी शुक्ला और अन्य वक्ताओं ने बिजली कर्मियों को निजीकरण से होने वाली क्षति से अवगत कराया और आह्वान किया कि निजीकरण का टेंडर होते ही सामूहिक जेल भरो आन्दोलन की तैयारी की जाए। यह संकल्प लिया गया कि निजीकरण के विरोध में 314 दिन से चल रहा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक निजीकरण का निर्णय वापस नहीं लिया जाता साथ ही संघर्ष समिति ने बिजली के सभी संविदाकर्मियों को होमगार्ड और सफाईकर्मीयो की तरह माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार विधुत दुर्घटना पर 35-40लाख रुपये देने का किया मांग ।

वाराणसी में शिविर के दौरान ही यह जानकारी मिलने से कि, पश्चिमांचल और मध्यांचल के बड़े शहरों में अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी होने जा रहा है, अभियंताओं में गुस्सा फूट पड़ा। शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि यह पुख्ता जानकारी मिली है कि जिन जिन शहरों में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है उन सभी शहरों के अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी का टेंडर भी पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के टेंडर के साथ ही जारी किया जाएगा।

उप्र राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ के महासचिव जितेन्द्र सिंह गुर्जर ने कहा कि चिन्तन मंथन शिविर का मुख्य उद्देश्य अभियंताओं को निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष के लिये प्रशिक्षित करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे पांच शिविर डिस्कॉम स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभियन्ता संकल्प लेकर सामने आएं तो उप्र में पॉवर सेक्टर में निजी घरानों को रोकना कोई कठिन काम नहीं है। उन्होंने कहा कि निजीकरण के विरोध में निर्णायक संघर्ष किया जाएगा।

अभियन्ता संघ के उपाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, संगठन सचिव जगदीश पटेल, सहायक सचिव पुष्पेन्द्र सिंह, क्षेत्रीय सचिव उपेन्द्र चौरसिया, पंकज कुमार, जिवेश,नन्दन ,शिवम रंजन,शशि कुमार सिंह, बीरेंद्र सिंह , नरेन्द्र वर्मा, मुख्यतया सम्मिलित थे।