वाराणसी खुद ही सर फोड़ा फिर जा पहुंचा थाने , पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

अजब- गजब खुद ही सर फोड़ा फिर जा पहुंचा थाने , पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप :पवन जायसवाल की रिपोर्ट

वाराणसी खुद ही सर फोड़ा फिर जा पहुंचा थाने , पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

INDIA NEWS REPORT

 पवन जायसवाल की खास रिपोर्ट

 वाराणसी : आपने जमीनी विवाद के ऐसे बहुत सारे मामले देखे होंगे लेकिन ऐसा मामला शायद आप पहली बार देख रहे हो। संतोष यादव ने सुशील अग्रवाल नामक व्यक्ति से दो बार में लगभग 700 स्क्वायर फीट में बने मकान व दुकान की रजिस्ट्री कराई थी।

जमीन विक्रेता सुशील अग्रवाल उर्फ गुरु ने क्रेता संतोष यादव को 19 फरवरी 2024 को पहली रजिस्ट्री किया था। वहीं सुशील अग्रवाल ने दूसरी रजिस्ट्री संतोष यादव को 10 अप्रैल 2024 किया था। धीरे - धीरे समय बीता दाखिल खारिज भी हो गया लेकिन विक्रेता सुशील अग्रवाल ने क्रेता संतोष यादव को कब्जा नहीं दिया।

काफी समय बीत जाने के बाद जब क्रेता संतोष यादव ने विक्रेता सुशील अग्रवाल से मकान खाली करने के लिए कहा तो विक्रेता सुशील अग्रवाल आज-कल करने लगे।

क्रेता संतोष यादव ने सुशील अग्रवाल के रवैए से परेशान होकर 28 सितम्बर 2024 दिन शनिवार को जब कोतवाली थाने पहुंचे तो विक्रेता सुशील अग्रवाल ने खुद ही अपना सर दीवाल से टकराकर फोड़ लिया और वाराणसी के कुछ तथाकथित पत्रकारों को साथ लेकर कबीरचौरा हास्पिटल पहुंच गए।वही पत्रकारों ने सुशील अग्रवाल का विडियो क्लिप तैयार किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

उन तथाकथित पत्रकारों ने अलग अलग तरीके से अपने हिसाब से मनगढ़ंत खबरें बनाकर न्यूज पेपर, वेब पोर्टल एवं सोशल मीडिया,एक्स के माध्यम से कोतवाली पुलिस और एसीपी कोतवाली पर क्रेता संतोष यादव पर फर्जी मुकदमा लगाकर जेल भेजने का दबाव बनाने लगे। जबकि मामले का दूसरा पहलू हम आपको दिखाएंगे। सुशील अग्रवाल उर्फ गुरु पल भर में सच कैसे उगल देता है। वाराणसी के कोतवाली थाना प्रभारी व कोतवाली एसीपी को उन पत्रकारों ने किस तरह से निशाना बनाने का प्रयास तो किया लेकिन सफल नहीं हो पाये।

आज हम आपको दिखाएंगे वो सच जिसे देखकर लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले पत्रकारों के ऊपर से आपका भरोसा उठ जाएगा। आप भी सोचने पर मजबूर हो जायेंगे। जब हमारी India Live News 24 की टीम ने इस मामले का पोस्टमार्टम करना शुरू किया तो ऐसे ऐसे तथ्य सामने आने लगे जिसे देखकर हर कोई दंग रह जायेगा।

सुशील अग्रवाल उर्फ गुरु ने पहले अपनी जमीन को लगभग 87 लाख रुपए में संतोष यादव को बेचा और फिर जब संतोष यादव ने कब्जे के लिए सुशील अग्रवाल से कहा तो सुशील अग्रवाल आना-कानी कर वाराणसी के कुछ तथाकथित पत्रकारों को साथ लेकर उल्टा संतोष यादव को ही अपराधी बना दिया।

इस मामले में कुछ समाचार पत्रों और वेब पोर्टल चैनलों ने क्रेता संतोष यादव के साथ - साथ कोतवाली पुलिस को भी नही छोड़ा ‌। एक नामचीन समाचार पत्र ने तो इस मामले में कोतवाली पुलिस की मिलीभगत बता डाला। वही एक वेब पोर्टल चैनल ने पुलिस पर अनदेखी का आरोप लगा दिया।

एक - एक विडियो में साफ साफ नजर आ रहा है विक्रेता सुशील अग्रवाल और कुछ तथाकथित पत्रकारों ने किस तरह से वाराणसी पुलिस को बदनाम करने और उन्हें घूसखोर साबित करने का कुत्सित प्रयास किया। हमारी टीम ने मेहनत की और उनकी मेहनत रंग लाई और सुशील अग्रवाल ने सब कबूल दिया कि उसने किसके कहने पर ऐसा किया। विडियो को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आप स्वयं समझ जाएंगे।