वाराणसी भाजपा विधि प्रकोष्ठ के संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर की शिकायत को निर्वाचन आयोग ने संज्ञान में लिया

वाराणसी भाजपा विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग को दी गई गंभीर शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले को संबंधित अधिकारियों को जांच एवं कार्यवाही हेतु अग्रेषित कर दिया है। Desk

वाराणसी भाजपा विधि प्रकोष्ठ के संयोजक अधिवक्ता शशांक शेखर की शिकायत को निर्वाचन आयोग ने संज्ञान में लिया

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वाराणसी मंगलवार: 23 सितम्बर 2025 वाराणसी भाजपा विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक एवं अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा भारत निर्वाचन आयोग को दी गई गंभीर शिकायत पर निर्वाचन आयोग ने तत्काल संज्ञान लेते हुए मामले को संबंधित अधिकारियों को जांच एवं कार्यवाही हेतु अग्रेषित कर दिया है।

शिकायत का संदर्भ आईडी [NGS04N220925343686] है।

 शशांक शेखर त्रिपाठी ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया कि महुआ विधानसभा क्षेत्र में आयोजित राजद नेता तेजस्वी यादव की रैली के दौरान मंच से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की माताजी के विरुद्ध अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया। यह न केवल प्रधानमंत्री जी और उनके परिवार का अपमान है, बल्कि सम्पूर्ण भारत की मातृशक्ति का भी घोर अपमान है।यह घटना राजद की निचले स्तर की राजनीति और हताशा भरे सोच को उजागर करती है। चुनावी पराजय सामने देख कर विपक्ष अब तथ्यों और मुद्दों पर बहस करने के बजाय अभद्र भाषा और व्यक्तिगत हमलों का सहारा ले रहा है।श्री त्रिपाठी ने कहा –

"तेजस्वी यादव की मौजूदगी में मंच से प्रधानमंत्री जी की माता जी के विरुद्ध अपशब्द कहना सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण देश की सभ्यता और संस्कृति का अपमान है। राजद और उसके नेता जनता को गुमराह करने के लिए चुनावी मंचों को नफरत और गाली-गलौज का अड्डा बना रहे हैं। यह लोकतंत्र की मर्यादा का खुला उल्लंघन है और चुनाव आयोग को चाहिए कि दोषियों पर कठोरतम कार्रवाई की जाए।"उन्होंने विपक्ष पर सीधा वार करते हुए कहा कि –

"जो लोग गरीबों की बात करने का दावा करते हैं, वही लोग आज गरीब की मां का अपमान करते हैं। इससे बड़ा पाखंड और क्या हो सकता है? जनता ऐसे नेताओं को बख्शेगी नहीं और लोकतंत्र में इनकी यही गिरावट इनकी राजनीतिक समाप्ति का कारण बनेगी।

"भाजपा विधि प्रकोष्ठ"ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री पर निजी हमले और परिवारजनों पर गालियां देना विपक्ष की हताशा, कुंठा और जनसमर्थन की कमी का प्रमाण है। देशवासियों की आस्था और लोकतंत्र की मर्यादा की रक्षा हेतु आयोग की कड़ी कार्यवाही अनिवार्य है।