1 जुलाई 2024 कानून व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव,1860 में बने अंग्रेजों के समय के आईपीसी में होगा बदलाव

3 नए कानून आने के बाद 1 जुलाई से क्या क्या बदलेगा, 10 पॉइंट में समझिए 3 नए कानून आने के बाद 1 जुलाई से क्या क्या बदलेगा:जगदीश शुकला/जयचन्द

1 जुलाई 2024  कानून व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव,1860 में बने अंग्रेजों के समय के आईपीसी में होगा बदलाव
बदलेगा कानून 1 जुलाई से भारत नये इतिहास बनाने की कर चुका तैयारी

INDIA NEWS REPORT

जगदीश शुक्ला/जयचन्द

New Criminal Laws: देश में 1 जुलाई, 2024 से ब्र‍िट‍िश काल के समय के बनाए कानून खत्‍म हो जाएंगे. तीनों मौजूदा कानून न‍िर्धार‍ित तारीख से समाप्‍त हो जाएंगे. 3 नए कानून आने के बाद 1 जुलाई से क्या क्या बदलेगा, 10 पॉइंट में समझिए।

देश में लागू होंगे तीन नए आपराध‍िक कानून

Three New Criminal Laws Notify: केंद्र सरकार ने तीनों नए आपराध‍िक कानूनों को 1 जुलाई, 2024 से लागू करने का नोट‍िफ‍िकेशन जारी कर द‍िया है. 23 फरवरी को जारी क‍िए गए इस नोट‍िफ‍िकेशन के बाद अब वर्तमान में लागू ब्र‍िट‍िश काल के भारतीय दंड संहिता, आपराध‍िक प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम न‍िर्धार‍ित तारीख से खत्‍म हो जाएंगे।

केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित किए गए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम तीनों नए कानून आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से बदलने का काम करेंगे. तीनों कानूनों का खास मकसद विभिन्‍न अपराधों को परिभाषित करके उनके लिए सजा तय करके देश में आपराधिक न्याय स‍िस्‍टम को पूरी तरह से बदलना है।

सरकार ने वाहन चालक की ओर से हिट एंड रन के मामलों से संबंधित प्रावधान को लागू नहीं करने का निर्णय लिया है, जैसा कि ट्रक चालकों से वादा किया गया था. ट्रक चालकों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था. कानून के प्रावधान सामने आने के बाद ट्रक चालकों ने धारा 106 (2) के प्रावधान का विरोध किया था. इसमें उन लोगों को 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जो तेज गति और लापरवाही से वाहन चलाकर किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनते हैं और घटना के बारे में पुलिस को सूचना दिए बिना भाग जाते हैं।

आइए समझते हैं क‍ि इन कानूनों के लागू होने के बाद क‍िस तरह से आपराधिक न्याय प्रणाली में क्‍या-क्‍या बड़े बदलाव आएंगे:-

भारतीय न्‍याय संह‍िता में यह तय होगा क‍ि कौन सा कृत्‍य अपराध है और उसके ल‍िए क्‍या सजा होगी. आईपीसी कानून में 511 धाराएं थीं जबक‍ि नए बीएनएस में 358 धाराएं होंगी. नए कानून में 21 नए अपराधों को भी सम्‍मलि‍त क‍िया गया है।

सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं, जबकि भारतीय नागर‍िक सुरक्षा संह‍िता (बीएनएसएस) में 531 धाराएं होंगी. नए कानून में सीआरपीसी की 177 धाराओं को बदला गया है और 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं. नए कानून को लाते हुए 14 धाराएं समाप्‍त भी गई हैं. ग‍िरफ्तारी, जांच और मुकद्दमा चलाने आद‍ि की प्रक्र‍िया सीआरपीसी में होती है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत 170 धाराएं होंगी, जबक‍ि अभी तक इसमें 166 धाराएं हैं. मुकद्दमे के सबूतों को कैसे साबित क‍िया जाएगा, बयान कैसे दर्ज होंगे, यह सब अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत 170 धाराओं के तहत ही होगा. नए कानून लाने में 24 घाराओं में बदलाव क‍िया गया है और 2 नई धाराएं भी साक्ष्‍य अध‍िन‍ियम में जोड़ी गई हैं. नए कानून में पुरानी 6 धाराओं को समाप्‍त भी कि‍या गया है।

आतंकवाद, मॉब लींच‍िंग और राष्‍ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों के ल‍िए सजा को और सख्‍त बनाया गया।

नए कानून में 23 अपराधों में अन‍िवार्य न्‍यूनतम सजा के प्रावधान को भी शामि‍ल क‍िया गया है. 6 तरह के अपराधों में कम्‍युन‍िटी सर्व‍िस की सजा का प्रावधान भी क‍िया गया है. नये कानून में केस का निपटारा करने के ल‍ि‍ए टाइमलाइन होगी. इसमें फॉरेंसिक साइंस के इस्तेमाल का भी प्रावधान होगा।

राजद्रोह को अब अपराध नहीं माना जाएगा. नए कानून की धारा 150 के तहत एक नया अपराध जोड़ा गया है. इसके तहत भारत से अलग होने, पृथकावादी भावना रखने या भारत की एकता एवं संप्रभुता को खतरा पहुँचाने को अपराध बताया गया है. यह देशद्रोह का अपराध होगा।

नए कानूनों में मॉब लिंचिंग, यानी जब 5 या इससे ज्‍यादा लोगों का एक समूह मिलकर जाति या समुदाय आदि के आधार पर हत्या करता है, तो ग्रुप के हर सदस्य को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी।

नए कानूनों में नाबाल‍िग से दुष्‍कर्म करने के दोष‍ियों को अब फांसी की सजा दी जा सकेगी. गैंगरेप के मामलों में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा नाबालिग के साथ गैंगरेप को नए अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

नए कानून में आतंकवादी कृत्य, जो पहले गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम जैसे खास कानूनों का हिस्सा थे, इसे अब भारतीय न्याय संहिता में शामिल किया गया है. नए कानूनों के तहत जो भी शख्स देश को नुकसान पहुंचाने के लिए डायनामाइट या जहरीली गैस जैसे खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें आतंकवादी माना जाएगा।

पॉकेटमारी जैसे छोटे संगठित अपराधों पर भी नकेल कसने का प्रावधान नए कानूनों में क‍िया गया है. इस तरह के संगठित अपराधों से निपटने के लिए राज्यों के अपने कानून थे।

भारत में तीन नए आपराधिक कानून (New Criminal Lawa) लागू होने वाले हैं। एक जुलाई से पूरे देश में तीन नए कानून (भारतीय न्याय संहिता 2023 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 व भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023) लागू हो जाएंगे। नए कानूनों में ऐसे कई प्रविधान किए गए हैं जो न्याय की अवधारणा को मजबूत करते हैं।

1 जुलाई से बन जाएगा इतिहास, क्या फिर लगाई जा सकेंगी IPC और CrPC की धाराएं?

भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम के बदले तीन नए क्रिमिनल कानून- भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) 1 जुलाई से लागू होंगे. इसके बाद क्या ये पुराने कानून लागू होंगे? आइए यहां जानें-

ब्रिटिश काल से देश में लागू तीन आपराधिक कानून एक जुलाई से इतिहास बन जाएंगे. नए मुकदमे और प्रक्रिया भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू होंगे. इसके बावजूद इतिहास बन चुके कानून कुछ हफ्तों या महीनों तक उन लोगों का पीछा नहीं छोड़ेंगे, जिनके खिलाफ अपराध एक जुलाई से पहले यानी 30 जून की रात 12 बजे से कुछ पल पहले हुआ होगा. ऐसे में मुकदमा और प्रक्रिया भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (आईईए) के तहत लागू किए जाएंगे।

नए आपराधिक कानून लागू होने के बावजूद पुराने में मामला दर्ज होने के पीछे की वजह यह है कि आपराधिक कानून पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) लागू नहीं होते. यह पुलिस, प्रशासन और अदालत के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, जब देशभर में तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए हों।

अगर निर्धारित एक जुलाई की तिथि से पहले कोई भी अपराध हुआ है तो कानून लागू करने वाली सभी एजेंसियों को यह ख्याल रखना होगा कि मामला और प्रक्रिया पुराने कानूनों के तहत चले. ऐसा नहीं होने की स्थिति में पीड़ित को अदालती प्रक्रिया में नुकसान होगा और प्राधिकार की गलती का खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा।

कई अपराधों के लिए सख्त सजा का प्रावधान

मसलन नए कानून में आतंकवाद, मॉब लिंचिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने वाले अपराधों के लिए सजा को सख्त बनाया गया है, लेकिन घटना कानून लागू होने की तिथि से पहले की होगी और अगर गलती से भी नए कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया तो अदालत उसे रद्द कर देगी. पूरी प्रक्रिया फिर से निभानी होगी और पीड़ित को न्याय मिलने में बेवजह की देरी का सामना करना पड़ेगा. जबकि तमाम लोग इसी भ्रम में होंगे कि नए कानून में इसका प्रावधान है तो मुकदमा पुरानी घटना पर भी मुकदमा दर्ज हो जाएगा, तो यह समझ लीजे कि ऐसा बिल्कुल नहीं होगा. अव्वल तो पुलिस मुकदमा पुराने कानून में दर्ज करेगी और गलती से नए कानून में दर्ज कर ली तो अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक में सुनवाई के दौरान जिसने भी गौर कर लिया कि घटना पुरानी है तो एफआईआर रद्द कर दी जाएगी. नए सिरे से एफआईआर पुराने कानून में दर्ज होगी।

कानून संविधान के अनुच्छेद 15 पर आधारित

आपराधिक कानून के पूर्वव्यापी नहीं होने का कारण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 पर आधारित है, जो देश के किसी भी नागरिक या देश में हुए अपराध में आरोपी विदेशी नागरिक के खिलाफ मुकदमा चलाने की स्थिति में आपराधिक कानूनों को पूर्वव्यापी तौर पर लागू करने से रोकता है. दरअसल यह लंबे समय से मान्यता प्राप्त आपाधिक कानून के सिद्धांतों को दर्शाता है कि घटना के समय स्थापित कानून के अलावा अन्य में आरोपी के खिलाफ कोई प्रक्रिया नहीं चलायी जा सकती या उसे सजा नहीं दी जा सकती. यह नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय वाचा के तहत अनुच्छेद 15 में आधारित है।

ऑस्ट्रेलिया ने 1980 में इस संधि का अनुमोदन किया था. ऐसे में भारत में लागू मानवाधिकार अधिनियम में भी इस स्थिति को स्पष्ट किया गया है. अब एक जुलाई दूर नहीं है और देशभर में राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में तीनों नए कानूनों को लागू करने पर प्रशिक्षण चल रहे हैं. पुलिस, प्रशासन, एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों को कानून के महारथियों ने नए प्रावधानों से भी अवगत करा दिया है और साथ में यह भी ताकिद कर दिया है कि इतिहास बन चुके कानून अभी कुछ दिन तक अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहेंगे।

नए कानूनों को लागू करने की तैयारी जोरों पर

नए कानून लागू होने के मद्देनजर आपराधिक कानून के जानकारों ने कमर कस ली है. थाने से लेकर कचहरी तक हलचल है, क्योंकि एफआईआर से लेकर कोर्ट के निर्णय तक की सुनवाई पूरी तरह से ऑनलाइन होगी. सात साल से ज्यादा सजा वाले सभी क्राइम में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य होगी. यौन उत्पीड़ के मामले में 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट जमा करनी होगी।

सवाल बस इतना है कि ढांचागत व्यवस्था के मद्देनजर क्या हम तैयार हैं? हालांकि केंद्र सरकार पूरी तरह आश्वस्त है, तभी ताबड़तोड़ तरीके से इन कानूनों के संसद में पारित होने के बाद इन्हें एक जुलाई से लागू करने का फैसला किया गया. कानूनविदों का मानना है कि सरकार का कदम और मंशा अच्छी है, लेकिन इतनी बड़ी आबादी में इन्हें लागू किए जाने में कुछ शुरुआती जटिलताएं तो आएंगी. जरूरी ये है कि लोगों को अपराध के खिलाफ समय पर न्याय मिले और अपराध करने वालों को यह अहसास हो जाए कि नए कानून में अदालतों में मामले तय अवधि में निपटते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों नए कानूनों की जांच और लागू होने के बाद सही ढंग से काम करने की परख के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का निर्देश देने की मांग हाल ही में खारिज कर दी थी. दरअसल याचिका में कहा गया था कि बिन संसद में बिना बहस के पारित किए गए और उस वक्त ज्यादातर विपक्षी सांसद निलंबित थे। याद रहे कि लोकसभा ने 21 दिसंबर, 2023 को तीनों विधेयकों को पारित किया था. इसके बाद 25 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन विधेयकों को संस्तुति प्रदान कर दी थी।

नही मिलेगी तारीख पर तारीख

नए आपराधिक कानून के तहत तीन वर्ष के अंदर न्याय दिलाने की व्यवस्था होगी।कोर्ट में पहली सुनवाई के 60 दिनों के अंदर आरोप तय करना होगा. तो वहीं आपराधिक मामलों में सुनवाई पूरी होने के 45 दिनों के भीतर फैसला भी सुनाना होगा।

76 साल की आज़ादी के बाद, भारत में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। 1 जुलाई 2024 से, 1860 में बने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) को बदलकर तीन नए कानून लागू किए जाएंगे। ये नए कानून – भारतीय दंड संहिता, 2024, भारतीय नागरिक संहिता, 2024 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2024 – न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव लाएंगे। इन नए कानूनों की मुख्य विशेषताएं:

न्याय में तेज़ी: इन कानूनों का लक्ष्य अपराधों की जांच और मुकदमों को तेज़ी से निपटाना है, ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। सबूतों का महत्व: नए कानून में वैज्ञानिक और डिजिटल सबूतों को अधिक महत्व दिया जाएगा, ताकि अपराधों को साबित करना आसान हो सके।

पीड़ितों के अधिकार:

नए कानून पीड़ितों के अधिकारों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें बेहतर मुआवजा प्रदान करते हैं।

सजा में कठोरता:

गंभीर अपराधों के लिए सजा में कठोरता लाई जाएगी, ताकि अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।