12 साल पहले हुई थी वारदात: पिता-पुत्र की हत्या में तीन-तीन सगे भाइयों समेत सात को उम्रकैद
विनय सिंह सोनभद्र संवाददाता
यूपी के सोनभद्र जिले के बागेसोती गांव में 12 साल पूर्व के पिता-पुत्र की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट एहसानुल्लाह खान ने सात दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दोषियों में तीन-तीन सगे भाई शामिल हैं। प्रत्येक दोषी पर 22-22 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि में से डेढ़ लाख रुपये मृतकों के आश्रितों को समान रूप से दी जाएगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, बागेसोती गांव निवासी कमलेश भुइयां ने वर्ष 2011 में कोन थाने में तहरीर देकर पिता गजाधर भुइयां और अपने भाई अखिलेश की हत्या का आरोप लगाया था। वादी के मुताबिक, जमीन के विवाद में गांव के ही गोपाल जायसवाल, नेपाल जायसवाल, सुनील जायसवाल पुत्रगण विशंभर, लक्ष्मण उर्फ बिगन साव, नंदकिशोर, श्याम किशोर पुत्रगण शिवनारायण और देव कुमार जायसवाल पुत्र विश्वनाथ ने गोलबंद होकर हमला कर दिया था।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया था। विवेचना के बाद पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कोर्ट ने सभी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन पर विभिन्न धाराओं में में कुल 22-22 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
युवक की हत्या में दो दोषियों को उम्रकैद, एक साल के अंदर फैसला
म्योरपुर थाना क्षेत्र में एक साल पहले मानसिक रूप से कमजोर युवक की लाठी-डंडे से पीटकर हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम खलीकुज्ज्मा की अदालत ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोनों पर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अभियोजन के मुताबिक, दुद्धी कोतवाली के ग्राम नौडिहा निवासी धनसिंह ने सात सितंबर 2022 को म्योपुर थाने में प्रार्थना पत्र देकर अपने पुत्र इंद्रदेव की हत्या का आरोप लगाया था। बताया कि इंद्रदेव मानसिक रूप से कमजोर था। वह पांच सितंबर को घर से कहीं चला गया। उसकी खोजबीन की जा रही थी। इस बीच सात सितंबर को उसका शव म्योरपुर के कुदरी गांव में पलाश के पेड़ पर फंदे से लटकता मिला।
छानबीन में पता चला कि गांव के विनोद अगरिया और रामसूरत ने लाठी-डंडे से पीटकर उसकी हत्या कर दी थी। घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे से लटका दिया। केस दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल किया। दोनों पक्षों के गवाहों को सुनने और पत्रावलियों के अवलोकन के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।


