भारतीय वायुसेना को मिला अपना नया ध्वज, प्रयागराज में वायुसेना दिवस कार्यक्रम में हुआ अनावरण

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी प्रयागराज में वायु सेना के नए ध्वज का अनावरण किया। इस मौके पर वायुसेना के 110 से अधिक विमानों ने फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया:शिव विशाल की खास रिपोर्ट

भारतीय वायुसेना को मिला अपना नया ध्वज, प्रयागराज में वायुसेना दिवस कार्यक्रम में हुआ अनावरण
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी प्रयागराज में वायु सेना के नए ध्वज का अनावरण किया।
भारतीय वायुसेना को मिला अपना नया ध्वज, प्रयागराज में वायुसेना दिवस कार्यक्रम में हुआ अनावरण
भारतीय वायुसेना को मिला अपना नया ध्वज, प्रयागराज में वायुसेना दिवस कार्यक्रम में हुआ अनावरण
भारतीय वायुसेना को मिला अपना नया ध्वज, प्रयागराज में वायुसेना दिवस कार्यक्रम में हुआ अनावरण

शिव विशाल (विशेष संवाददाता)

प्रयागराज

शौर्य, अदम्य साहस का प्रतीक भारतीय वायुसेना स्थापना के 91वे वर्ष पर भव्य एयर शो प्रयागराज में ,8 अक्टूबर प्रयागराज की आसमां में वायु सेना का अद्भुत प्रदर्शन

आधुनिक भारतीय वायुसेना की पूर्वपीठिका 8 अक्तूबर 1932 को ब्रिटिश-भारत सरकार द्वारा गठित की गई 'रॉयल इंडियन एयरफोर्स' से तैयार हुई थी। इसलिये 8 अक्तूबर को प्रतिवर्ष 'भारतीय वायुसेना दिवस' मनाया जाता है। इस दिन न सिर्फ भारतीय वायुसेना के गौरवमयी इतिहास को याद किया जाता है बल्कि इसके सुनहरे भविष्य के लिए रणनीतियों पर भी विचार किया जाता है। एशिया के सबसे बड़े एयरफोर्स स्टेशन हिंडन एयरबेस पर इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। भारतीय वायुसेना का वार्षिकोत्सव भारत के कुछ चुनिंदा कार्मिक उत्सवों में से एक है जहाँ लैंगिक समानता का वास्तविक व्यवहार देखने को मिलता है। इस दिन भारतीय वायुसेना के प्रमुख यानी एयर चीफ मार्शल द्वारा विभिन्न सैन्यकर्मियों को सम्मानित भी किया जाता है। यह दिवस भारतीय वायुसेना के सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू विमानों के दमदार प्रदर्शन का साक्षी भी बनता है। 'नभ: स्पृशं दीप्तम्' भारतीय वायुसेना का ध्येयवाक्य है। भारतीय वायुसेना के करतब दिखाते विमान इसी ध्येयवाक्य को साकार करते हुए गर्व के साथ आकाश को स्पर्श करते है। 'नभ: स्पृशं दीप्तम्' का उल्लेख भगवत गीता के 11वें अध्याय में मिलता है।

अगर भारतीय वायुसेना के गौरवमयी इतिहास पर नज़र डालें तो इस सिलसिले की शुरुआत 1939-1945 तक चले द्वितीय विश्वयुद्ध से शुरू होती है। इस युद्ध में रॉयल इंडियन एयरफोर्स द्वारा प्रदर्शित किए गए शानदार युद्धकौशल को ब्रिट्रेन के राजा किंग जॉर्ज (छठे) द्वारा रॉयल प्रीफिक्स से सम्मानित भी किया गया। हालांकि स्वतंत्रता के बाद भारतीय वायुसेना से इस प्रीफिक्स शब्द को हटा लिया गया। इसके साथ ही गणतांत्रिक भारत में रॉयल इंडियन फोर्स का नाम बदलकर भारतीय वायुसेना कर दिया गया।

स्वतंत्रता के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़े गए 4 युद्धों 1948, 1965, 1971 और 1999 में शानदार प्रदर्शन किया। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय वायुसेना के एयर चीफ मार्शल अर्जन सिंह की असाधारण नेतृत्व क्षमता की वजह से पाकिस्तान को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा। वे भारतीय वायुसेना के इकलौते अफसर थे जिनको फील्ड मार्शल के बराबर फाइव स्टार रैंक मिली थी। पाकिस्तान से हुए युद्धों के अलावा 1962 में हुए भारत-चीन के युद्ध में भी भारतीय वायुसेना ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय वायुसेना की इन शानदार उपलब्धियों के साथ ही इसके समक्ष अनेक चुनौतियाँ भी हैं। चूँकि भारत की अपने आसन्न पड़ोसियों चीन और पाकिस्तान से सीमा पर तनाव की स्थिति व्याप्त रहती है। इसलिए युद्ध के खतरे की धारणा बनी रहती है और इस स्थिति में भारतीय वायुसेना का उन्नतीकरण जरुरी है। भारतीय वायुसेना में उन्नत लड़ाकू विमानों की जरुरत तो है ही इसके साथ ही फोर्स मल्टीप्लायर जैसे हवा में ईंधन भरने वाले विमानों की एक बड़ी खेप, अत्याधुनिक संचार नेटवर्कों की भी आवश्यकता है। इसके अलावा भारतीय लड़ाकू जेट विमानों का इंडक्शन रेट, रिटायरमेंट रेट से काफी धीमा है। इस स्थिति को भी बदले जाने की आवश्यकता है।

युद्ध उपकरणों को संचालित करने वालों के क्षमता निर्माण पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके साथ ही भारत को अपनी युद्ध नीति को दो मोर्चे की युद्ध नीति में बदलने सहित भारतीय वायु क्षेत्रक की चौकसी के साथ ही सुदूर अंतरिक्ष क्षेत्र में भी ध्यान देने की जरुरत है। भारतीय वायुसेना में शामिल किए जाने से पूर्व विमान की विभिन्न श्रेणियों को भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के साथ तर्कसंगत बनाए जाने की भी आवश्यकता है।

अगर भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल विमानों की बात करें तो यहाँ स्वदेश निर्मित हल्के लड़ाकू विमान जैसे तेजस, रुद्र, चेतक, ध्रुव और प्रचंड आदि शामिल होने के अलावा चिनूक जैसे भारी लिफ्ट हेलीकॉप्टर और अपाचे हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। मिसाइल के मोर्चे पर अगर बात की जाये तो भारत के पास सामरिक मिसाइलों का एक शानदार बेड़ा है। इनमें प्रमुख है- अग्नि मिसाइल, लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल और ब्रह्मोस आदि।

भारतीय वायुसेना ने अब अपने कार्मिक परिचालन के लिए स्वयं के द्वारा विकसित एक उपग्रह प्रणाली की शुरुआत भी की है। बुनियादी अवसंरचना को विस्तार देने के लिए भारतीय वायुसेना 'एयरफील्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण' नामक एक परियोजना का भी संचालन कर रही है। इस परियोजना के तहत 30 भारतीय हवाई अड्डों को हर मौसम में 24X7 उड़ान क्षमताओं में अपग्रेड किया गया है। वर्ल्ड डायरेक्टर ऑफ मॉडर्न मिलिट्री ने ग्लोबल पॉवर एयर रैंकिंग में भारतीय वायुसेना को 69.4 TvR अंक देते हुए इसे विश्व की सभी वायुसेनाओं के मध्य तीसरा स्थान दिया है जो भारतीय वायुसेना के शानदार कौशल व क्षमता की पुष्टि करता है।

भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी प्रयागराज में वायु सेना के नए ध्वज का अनावरण किया। इस मौके पर वायुसेना के 110 से अधिक विमानों ने फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया।

इंडियन एयरफ़ोर्स को मिला अपना नया भारतीय वायुसेना अपना 91वां स्थापना दिवस माना रही है। इस मौके पर भारतीय वायुसेना में बड़ा बदलाव हुआ है। आज वायुसेना को अपनी नई पहचान मिल गई है। वायुसेना का आज से अपना झंडा बदल गया है। नए झंडे का अनावरण आज 8 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में किया गया। यहां एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने नए ध्वज का अनावरण किया। इसके साथ ही वायुसेना ने यहां दुनिया को अपनी ताकत दिखाई। कई लड़ाकू विमानों समेत सेना के बेड़े में शामिल जहाजों ने उड़ान भरके, यह दिखाया कि क्यों भारतीय वायुसेना दुनिया की सबसे बेहतरीन सेनाओं में से एक है।

पहले कैसा था वायुसेना का ध्वज?

इतिहास में पीछे जाएं, तो वायुसेना के ध्वज में ऊपरी बाएं कैंटन में यूनियन जैक और फ्लाई साइड पर आरआईएएफ राउंडेल (लाल, सफेद और नीला) शामिल था। स्वतंत्रता के बाद, निचले दाएं कैंटन में यूनियन जैक को भारतीय ट्राई कलर और आरएएफ राउंडल्स को आईएएफ ट्राई कलर राउंडेल के साथ प्रतिस्थापित करके भारतीय वायु सेना का ध्वज बनाया गया था। वहीं अब भारतीय वायु सेना के मूल्यों को बेहतर ढंग से प्रकट करने के लिए नया ध्वज बनाया गया है। अब एनसाइन के ऊपरी दाएं कोने में फ्लाई साइड की ओर वायु सेना क्रेस्ट को शामिल करने से प्रतिबिंबित होगा।

नए ध्वज में क्या किए गए बदलाव?

आईएएफ क्रेस्ट के शीर्ष पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक सिंह और उसके नीचे देवनागरी में "सत्यमेव जयते" शब्द हैं। अशोक सिंह के नीचे एक हिमालयी ईगल है जिसके पंख फैले हुए हैं, जो भारतीय वायुसेना के युद्ध के गुणों को दर्शाता है। हल्के नीले रंग का एक वलय हिमालयी ईगल को घेरे हुए है, जिस पर लिखा है "भारतीय वायु सेना"। भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य "नभः स्पृशं दीप्तम्" हिमालयी ईगल के नीचे देवनागरी के सुनहरे अक्षरों में अंकित है। आईएएफ का आदर्श वाक्य भगवद गीता के अध्याय 11 के श्लोक 24 से लिया गया है और इसका अर्थ है "वैभव के साथ आकाश को छूना"।

IAF के मिग-21 लड़ाकू विमान इस साल आखिरी बार प्रयागराज में संगम के ऊपर IAF दिवस फ्लाईपास्ट में हिस्सा लिया। फ्लाईपास्ट में लगभग 110 विमान शामिल हुआ, जिनमें IAF का नवीनतम C-295 परिवहन विमान भी शामिल है। हवाई प्रदर्शन में राफेल, सुखोई-30s, मिराज-2000s, मिग-29s, जगुआर, LCA तेजस, C-17s, C-130Js, IL-76s, AN-32s, चिनूक, अपाचे और हॉक्स शामिल रहे।