वाराणसी: रंगभरी एकादशी महंत आवास से पालकी में विदा कर गौरा को विश्वनाथ धाम पहुंचे महादेव

काशी कहे बनारस कहे या वाराणसी यहाँ की रंग भरी एकादशी विश्व प्रसिद्ध है माता गौरी को महंत आवास पर विदा कर महादेव पहुंचे विश्वनाथ धाम आइये जाने पौराणिक मान्यताये व वाराणसी में होली का महत्व व कुछ उपाय जयचन्द की विशेष रिपोर्ट

वाराणसी: रंगभरी एकादशी महंत आवास से पालकी में विदा कर गौरा को विश्वनाथ धाम  पहुंचे महादेव
रंगभरी एकादशी विशेष
वाराणसी: रंगभरी एकादशी महंत आवास से पालकी में विदा कर गौरा को विश्वनाथ धाम  पहुंचे महादेव
वाराणसी: रंगभरी एकादशी महंत आवास से पालकी में विदा कर गौरा को विश्वनाथ धाम  पहुंचे महादेव
वाराणसी: रंगभरी एकादशी महंत आवास से पालकी में विदा कर गौरा को विश्वनाथ धाम  पहुंचे महादेव

INDIA NEWS REPORT

जयचन्द

 वाराणसी,10 मार्च सोमवार रंगभरी एकादशी के मौके पर सोमवार को काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ और माता पार्वती (गौरा) का गौना परंपरागत तरीके से हर्षाेल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। इस दिन का खास महत्व है, जब मां गौरा को ससुराल से विश्वनाथ धाम लाया जाता है।

सुख, शांति और समृद्धि की कामना के साथ, माता गौरा की पालकी महंत आवास टेढ़ीनीम से लोकाचार के बाद कॉरिडोर पहुंची। पालकी सुबह 9.30 बजे डमरूवादन और शंखनाद के साथ मंदिर प्रांगण लाई गई। यहां पर संजीव रत्न मिश्र ने बाबा का श्रृंगार किया, जबकि महंत वाचस्पति तिवारी ने आरती की। इसके बाद काशीवासियों ने बाबा विश्वनाथ के पंचबदन रजत प्रतिमा और गौरा के साथ भगवान गणेश की प्रतिमा का दर्शन एवं पूजन किया।

काशीवासियों ने बाबा के प्रतिमा पर अबीर-गुलाल अर्पित कर उनसे होली खेलने की अनुमति मांगी। महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए इस बार महंत आवास टेढ़ीनीम पर होने वाले लोकाचार को मंदिर प्रांगण में, पूर्व महंत आवास वाले स्थान पर किया गया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में प्रतिमा का पूजन 5 वैदिक ब्राह्मणों ने षोडशोपचार विधि से किया गया। इसके बाद महंत परिवार की महिलाओं ने माता गौरा के विदाई के लोकाचार को पूरा किया और भोलेनाथ और माता पार्वती की चल प्रतिमा मंदिर भेजी गई। जहां इसे काशी विश्वनाथ धाम के शंकराचार्य चौक पर स्थापित किया जाएगा। इस बीच श्रद्धालुओं ने पुलिस प्रशासन के दबाव में बाबा के रजत पालकी की शोभायात्रा सुबह निकालने पर नाराजगी जताई। परंपरागत रूप से यह शाेभायात्रा अपरान्ह में निकाली जाती रही है। इस बदलाव पर परंपरा ताेड़ने का आरोप लगाया। इसके अलावा, पालकी में सवार शिव परिवार के विग्रह को लाल कपड़े से ढक कर ले जाने पर भी सोशल मीडिया के जरिए लोग आक्रोश जताते रहे। रजत प्रतिमा पालकी में विराजित कर मंदिर भेजी गई, लेकिन इसे एक कपड़े से ढक कर ले जाया गया, जबकि भारी संख्या में पुलिस फोर्स की मौजूदगी में यह यात्रा टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास से मंदिर के लिए रवाना की गई।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती से विवाह के बाद पहली बार अपनी प्रिय काशी नगरी आए थे। इस दिन शिव जी के गण और जनता पर रंग, अबीर, और गुलाल उड़ाते हुए खुशी का माहौल बनाते हैं। इसे आमलकी एकादशी भी कहा जाता है।

वाराणसी में होली की शुरुआत

रंगभरी एकादशी से ही वाराणसी में होली खेलने का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो लगातार 6 दिन तक चलता है। जबकि ब्रज में होली का पर्व होलाष्टक से शुरू होता है, वहीं वाराणसी में यह रंगभरी एकादशी से प्रारंभ होता है। इस वर्ष रंगभरी एकादशी 10 मार्च, सोमवार को मनाई जा रही हैं।

रंगभरी एकादशी के विशेष उपाय

रंगभरी एकादशी के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं, जो जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता लाने में मददगार होते हैं। सफलता प्राप्ति के लिए

रंगभरी एकादशी के दिन 1 या 21 ताजे पीले फूलों की माला बनाकर श्री हरि विष्णु को अर्पित करें। इसके साथ ही भगवान को खीर में तुलसी डालकर भोग लगाएं। ऐसा करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिलती है।

सुख-समृद्धि के लिए

अगर आप जीवन में सुख और समृद्धि प्राप्त करना चाहते हैं तो इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें। पूजा के बाद भगवान विष्णु को आंवला अर्पित करें। कार्यक्षेत्र में तरक्की के लिए

अगर आप कार्यक्षेत्र में तरक्की चाहते हैं या आपकी स्थिति विपरीत हो, तो इस दिन आंवले के पेड़ में जल चढ़ाएं और आंवले की जड़ की थोड़ी-सी मिट्टी माथे पर तिलक के रूप में लगाएं।

रंगभरी एकादशी पूजन विधि

रंगभरी एकादशी के दिन सुबह उठकर भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प करें। स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा के दौरान आंवले का फल भगवान विष्णु को प्रसाद के रूप में अर्पित करें और आंवले के वृक्ष की पूजा करें। इसके बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराएं।

अगले दिन स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें और ब्राह्मण को कलश, वस्त्र और आंवला दान करें। इसके बाद भोजन ग्रहण करके व्रत खोलें। कुछ लोग इस दिन रंगभरी एकादशी को शिवजी के पूजन के रूप में मनाते हैं, ऐसे में इस दिन शिवलिंग पर लाल गुलाल अर्पित करें और माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। शिवजी और विष्णु जी के मंत्रों का जाप भी करें।