9 वर्षीय बच्ची के बलात्कार और हत्या के आरोपी को उच्च न्यायालय ने 16 वर्ष बाद किया रिहा
गाज़ियाबाद 9 वर्ष की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म कर हत्या के आरोपी जो कि आजीवन कारावास की सज़ा काट रहा था उच्च न्यायालय ने सोलह वर्ष किया रिहा।
INDIA NEWS REPORT
उच्च न्यायालय खबर
अधिवक्ता:कौस्तुभ त्रिपाठी (उ0न्यायालय)
मामला गाजियाबाद जिले के निवाड़ी थाना क्षेत्र का है, जहाँ 25 अप्रैल 2009 को सहारनपुर निवासी रियाज ने एक प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रियाज ने आरोप लगाया था कि उसकी 9 साल की बेटी 22 अप्रैल 2009 की दोपहर से लापता है, जिसका शव नरेश और प्रेमवीर के गन्ने के खेत में मिला था उसने यह भी आरोप लगाया कि उसकी पुत्री को अंतिम बार आरोपी के पोते जावेद ने आरोपी के साथ देखा था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ बलात्कार और गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई। मामले की जाँच के बाद पुलिस ने आरोपी सलीम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302/376/201 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया।
विद्वान अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या 11 ने आरोपों को सही पाते हुए 31 जनवरी 2014 को आरोपी सलीम को धारा 376 आईपीसी में 10 वर्ष का कठोर कारावास और 5000 रुपये का जुर्माना, तथा धारा 302 आईपीसी में आजीवन कारावास और 5000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया था।
आरोपी ने इस आदेश के खिलाफ 2014 में अपील दायर की थी, लेकिन आरोपी की ओर से किसी वकील के अदालत में उपस्थित न होने पर उच्च न्यायालय ने 24 मई 2022 को जयंत कुमार (अधिवक्ता) को अपीलकर्ता का वकील नियुक्त किया था।
मामले की अंतिम सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति एस. डी. सिंह और डॉ. गौतम चौधरी की पीठ में हुई। उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता के अधिवक्ता जयंत कुमार के इस तर्क से सहमति जताई कि अपीलकर्ता के खिलाफ 6 वर्ष के एक बच्चे के अंतिम देखे जाने के साक्ष्य के अलावा कोई सबूत नहीं है, जो मामले की परिस्थितियों में विश्वसनीय नहीं है, और अपीलकर्ता को बरी करने का आदेश दिया।


