बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 275वे दिन भी बिजली के निजीकरण के विरुद्ध समस्त कार्यालयो पर किया जोरदार विरोध प्रदर्शन

संघर्ष समिति ने पूछा कि प्रबन्ध निदेशक पुर्वांचल ये बताये की 21लाख 80हजार रुपये का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन क्यों किया गया?

बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 275वे दिन भी बिजली के निजीकरण के विरुद्ध समस्त कार्यालयो पर  किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
निजीकरण का विरोध
बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 275वे दिन भी बिजली के निजीकरण के विरुद्ध समस्त कार्यालयो पर  किया जोरदार विरोध प्रदर्शन
बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 275वे दिन भी बिजली के निजीकरण के विरुद्ध समस्त कार्यालयो पर  किया जोरदार विरोध प्रदर्शन

INDIA NEWS REPORT

 जयचन्द

 बिजनेस प्लान और आरडीएसएस स्कीम में अरबों रुपए खर्च करने के बाद पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का कोई औचित्य नहीं: निजीकरण के विरोध में प्रांतव्यापी प्रदर्शन जारी

वाराणासी-29अगस्त। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति , उत्तर प्रदेश के बैनर तले बनारस के बिजलिकर्मियो ने आज 275वे दिन भी बिजली के निजीकरण के विरुद्ध समस्त कार्यालयो पर किया जोरदार विरोध प्रदर्शन साथ ही बिजलिकर्मियो ने पूछा कि प्रबन्ध निदेशक पुर्वांचल ये बताये की 21लाख 80हजार रुपये का भुगतान ऑल इंडिया डिस्कॉम एसोसिएशन को क्यों किया गया ? जहाँ आज पुर्वांचल विधुत वितरण निगम में हजारो संविदाकर्मियों के छटनी से इस वर्ष गर्मी में प्रचंड गर्मी पड़ने के कारण ,नई लाइनो के बनाये जाने, हजारो ट्रांसफॉर्मरों के क्षमताबृद्धि होने के साथ ही हजारो नये ट्रांसफॉर्मर लगाए जाने के उपरांत बिजलीकर्मीओ की कमी के कारण बिजली कटौती से उपभोक्ताओं के रोष का सामना मौजूदा बिजलिकर्मियो को करनी पड़ी साथ ही सरकार और ऊर्जा प्रबन्धन की भी क्षवि धूमिल हुई वही संविदाकर्मियों के तनख्वाह के लाले पड़े डिस्कॉम द्वारा इतनी बड़ी राशि का चंदा दिया जा रहा है।

वक्ताओ ने बताया कि आज बनारस के समस्त बिजलिकर्मियो ने अपने-अपने कार्यालयो पर बिजली के निजीकरण का पुरजोर विरोध किया और कहा कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में आरडीएसएस स्कीम और बिजनेस प्लान के तहत अरबो रुपए की योजनाएं स्वीकृत करने के बाद इन निगमों को निजी घरानों को मात्र 6500 करोड रुपए की रिजर्व प्राइस पर सौंपने का क्या औचित्य है । संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि जितनी धनराशि सुधार के लिए खर्च की जा रही है उससे कहीं कम धनराशि की रिजर्व प्राइस पर इन विद्युत वितरण निगमों को बेचा जा रहा है।

संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कार्पोरेशन प्रबंधन निजी घरानों के साथ मिली भगत में उत्तर प्रदेश सरकार सरकार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को अंधेरे में रखकर एक लाख करोड रुपए की परिसंपत्तियों को कौड़ियों के मोल बेचना चाहते है।

वक्ताओ ने बताया कि हाल ही में उप्र पॉवर कॉरपोरेशन ने बिजनेस प्लान के तहत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 824.65 करोड रुपए बिजनेस प्लान में स्वीकृत किया है। बिजनेस प्लान के तहत पुर्वांचल विद्युत वितरण निगम में बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु कार्य किया जाना है। संघर्ष समिति ने कहा की पुर्वांचल और दक्षिणांचल विधुत वितरण निगमों में बिजनेस प्लान के तहत 16.43 अरब रुपए खर्च करने के बाद इन निगमों को निजी घरानों को कौड़ियों के मोल बेचना कदापि स्वीकार्य नहीं है।

आरडीएसएस योजना के अंतर्गत पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 3842 करोड रुपए और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के लिए 3247 करोड रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

संघर्ष समिति ने बताया कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा निजीकरण हेतु तैयार किए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट के तहत इन विद्युत वितरण निगमों को बेचने की रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड़ पर रखी गई है जबकि इनकी परिसंपत्तियों लगभग एक लाख करोड रुपए की हैं।

संघर्ष समिति ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि बेचने के लिए जो रिजर्व प्राइस रखी गई है उससे अधिक की धनराशि इन विद्युत वितरण निगमों के सुधार में खर्च की जा रही है। यह कौन सा रिफॉर्म है जिसमें सरकारी धन से सुधार कर इसे निजी घरानों को कौड़ियों के मोल बेचा जा रहा है ?

सभा को सर्वश्री ई0 मायाशंकर तिवारी,ई0 ओ0पी0 सिंह,ई0 नीरज बिंद, अंकुर पाण्डेय,धर्मेन्द्र यादव,अलका कुमारी, पूजा कुमारी,सत्यम सिंह,पंकज यादव,रोहित कुमार,सन्नी कुमार,प्रशांत कुमार,कृष्णा सिंह,विवेक कुमार, संजय गौतम,आदि ने संबोधित किया।

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