दिल्ली पुलिस के मनोबल को लेकर अधिवक्ता की चिट्ठी पर कार्रवाई, प्रकरण CP दिल्ली को भेजा गया

वाराणसी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी की शिकायत पर दिल्ली सरकार ने लिया संज्ञान। दिल्ली पुलिस के मनोबल और कानून-व्यवस्था को लेकर भेजा गया पत्र अब दिल्ली पुलिस आयुक्त के पास पहुंचा।

दिल्ली पुलिस के मनोबल को लेकर अधिवक्ता की चिट्ठी पर कार्रवाई, प्रकरण CP दिल्ली को भेजा गया

वाराणसी, 10 अगस्त 2026 |  दिल्ली में कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों के मनोबल को लेकर वाराणसी के अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी की शिकायत पर दिल्ली सरकार ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय से शुरू हुआ यह प्रकरण अब दिल्ली पुलिस आयुक्त के कार्यालय तक पहुंच गया है।

क्या है पूरा मामला?

भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक और दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी ने 06 अगस्त 2026 की रात 9:39 बजे दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को ई-मेल के माध्यम से प्रार्थना-पत्र भेजा था। इसकी प्रतिलिपि उपराज्यपाल को भी भेजी गई।

पत्र में उन्होंने दिल्ली पुलिस का मनोबल बढ़ाने, ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त करने, तथा हिंसा, षड्यंत्र और कानून-व्यवस्था भंग करने में शामिल दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की थी।

कैसे आगे बढ़ा प्रकरण?

1. 07 अगस्त सुबह 8:56 बजे: मुख्यमंत्री कार्यालय ने पत्र को मंत्री आशीष सूद के कार्यालय को अग्रेषित किया।

2. 07 अगस्त सुबह 10:54 बजे: मामला OSD to HLG के कार्यालय भेजा गया।

3. 10 अगस्त शाम 4:02 बजे: OSD कार्यालय से पत्र Deputy Secretary, LGS को गया।

4. 10 अगस्त शाम 4:51 बजे: Deputy Secretary LGS ने पूरे प्रकरण को दिल्ली पुलिस आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया। इस ई-मेल में शशांक शेखर त्रिपाठी को भी CC में रखा गया।

शशांक शेखर त्रिपाठी ने क्या कहा?

उन्होंने कहा कि "मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर पुलिस आयुक्त तक मामला पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि शिकायत को गंभीरता से लिया गया है। अब उम्मीद है कि दिल्ली पुलिस तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करेगी। किसी भी दोषी को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि "पुलिसकर्मियों का मनोबल बनाए रखना सिर्फ प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि कानून के शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता है। ड्यूटी के दौरान कठिन परिस्थितियों से गुजरने वाले जवानों और उनके परिवारों को सरकार और समाज का नैतिक समर्थन मिलना चाहिए।"

अब क्या?

वर्तमान में उपलब्ध ई-मेल रिकॉर्ड के अनुसार प्रकरण दिल्ली पुलिस आयुक्त के कार्यालय में आवश्यक कार्रवाई के लिए लंबित/विचाराधीन है। अभी तक FIR या जांच के आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।