ऐतिहासिक चीजों,धरोहर को संभालने के लिये नही है उत्तर प्रदेश के पास कोई स्थान,ऐतिहासिक नगाड़ा हो रहा उपेक्षा का शिकार

काशी नरेश द्वारा दिया गया ऐतिहासिक नगाड़ा हो रहा उपेक्षा का शिकार:जयचन्द

ऐतिहासिक चीजों,धरोहर को संभालने के लिये नही है उत्तर प्रदेश के पास कोई स्थान,ऐतिहासिक नगाड़ा हो रहा उपेक्षा का शिकार
काशी नरेश द्वारा दिया गया विंध्य मंदिर का ऐतिहासिक नगाड़ा

जयचन्द

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर में ऐतिहासिक नगाड़ा उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. काशी नरेश प्रदत्त ऐतिहासिक नगाड़ा मंदिर प्रांगण के छत पर लावारिस अवस्था में पड़ा हुआ है।

मां विंध्यवासिनी मंदिर के ठीक सामने नौबत खाना काशी नरेश ने इसका निर्माण कराया था. मां विंध्यवासिनी मंदिर में आरती के चारों प्रहर में श्रृंगार के दौरान नगाड़ा को बजाया जाता था, लेकिन अब इसका उपेक्षा हो रहा है. राजा के राजवाड़े से चली आ रही यह परंपरा टूट गई है।

मां विंध्यवासिनी मंदिर में श्रृंगार के वक्त काशी नरेश प्रदत्त ऐतिहासिक दो नगाडे व शहनाई बजाई जाती थी. राजा- रजवाड़े के समय से ही इसका खर्चा काशी नरेश ही उठाया करते थे, लेकिन जब राजा काराजतंत्रात्मक शासन समाप्त हुआ तो येपरंपरा भी टूट गई. उनके द्वारा प्रदत्त ऐतिहासिक दो नगाड़े में एक गायब हो गया, जहां दूसरा उपेक्षा का शिकार बना हुआ है. मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट विंध्य कॉरिडोर का निर्माण शुरू होने के बाद ऐतिहासिक नगाड़े की अपेक्षा की गई है. हालत् यह हैं कि नगाड़े की डफली टूट गई है और इसका प्रयोग कूड़ेदान के रूप में किया जा रहा है. मौजूदा समय में गड़े को मंदिर परिसर के छत पर रख दिया गया है, जहां इस पर किसी का ध्यान से ही जा रहा है।

ऐतिहासिक धरोहरों के लिये नही है जगह:

मां विंध्यवासिनी मंदिर को भव्य बनाने के लिए भले ही विंध्य कॉरिडोर का निर्माण कराया जा रहा हो, लेकिन ऐतिहासिक चीजों को संजोने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है. ऐतिहासिक परंपरा व ऐतिहासिक धरोहरों को समझने के लिए भी जिला प्रशासन कोई काम नहीं कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विंध्य कॉरिडोर का निर्माण कार्य बेहतर हो रहा है, लेकिन ऐतिहासिक चीजों की जमकर उपेक्षा हो रही है।

विंध्य पंडा समाज के पूर्व अध्यक्ष राजन पाठक ने बताया कि विंध्य कॉरिडोर बनने के बाद सारी पुरानी व्यवस्था को बदल दिया गया है. मां विंध्यवासिनी मंदिर के सामने काशी नरेश का नोबत खाना था, जिसे विंध्य कॉरिडोर के निर्माण के समय तोड़ दिया गया. नगाड़ा बजना तो काफी पहले ही बंद हो गया था।