दिल्ली प्रोटेस्ट हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिवार का छलका दर्द, न्याय की मांग, बेटी ने बताई पिता की दशा ,CJP और विपक्ष के उड़े होश
कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस, संसद में भी उठे मुद्दे, राहुल गांधी से पत्रकार का सवाल राहुल ने कहा आप "BJP के हो"
INDIA NEWS REPORT
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली, 31 जुलाई 2026: 20 जुलाई 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा में घायल हुए दिल्ली पुलिस के जवानों के परिवार 11 दिन बाद सू और हाथ में वर्दी के खून लगे कपड़े दिखाते हुए न्याय की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातें
1. भीड़ द्वारा बेरहमी से पिटाई एक सब-इंस्पेक्टर की बेटी ने बताया, "भीड़ ने मेरे पिता को खींचकर पीटा। वे 4 घंटे तक बेहोश रहे। जब घर आए तो उनकी वर्दी पूरी तरह खून से सनी थी।"
2. घरों में गहरा मानसिक आघात ACP कैलाश सिंह बिष्ट की पत्नी ने कहा कि अपने पति को उस हालत में देखना उनके और उनकी 2 साल की बेटी के लिए "भयानक अनुभव" था। कई परिजनों ने कहा कि रात-रात भर नींद नहीं आ रही है।
3. सोशल मीडिया पर गलत चित्रण का आरोप परिवारों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बावजूद सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों को ही "दोषी और क्रूर" बताया जा रहा है। "हमारी ड्यूटी थी, लेकिन हमें ही विलेन बना दिया गया" - एक परिजन।
4. असामाजिक तत्वों पर शक परिजनों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में कुछ उपद्रवी तत्व शामिल हो गए थे। इन्होंने जानबूझकर सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाकर पथराव किया।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद घायल 4 पुलिसकर्मियों के परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में Intervention Application दायर की है। घायलों में ACP कैलाश सिंह बिष्ट, ASI संदीप, कांस्टेबल धीरज और ASI हेमेंद्र राठी शामिल हैं।
याचिका में 2 मुख्य मांगें रखीद गई हैं:
- ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए कड़े दिशानिर्देश बनाए जाएं
- - कानून लागू करने वाले जवानों पर हमला करने वाले हिंसक तत्वों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई हो
किस प्रदर्शन में हुई थी हिंसा? यह झड़प 20 जुलाई 2026 को 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई थी। प्रदर्शन पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर था। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए थे। सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद यह धरना खत्म हो गया था।
संसद परिसर में क्या हुआ? परिवारों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटे बाद ही यह मुद्दा संसद तक पहुंच गया।
एक पत्रकार ने जब राहुल गांधी से मकर द्वार के पास पूछा कि "क्या विपक्ष संसद में इन घायल पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की मांगों को उठाएगा?", तो राहुल गांधी ने सीधा जवाब देने के बजाय मुस्कुराते हुए पूछा, "भैया, आप BJP से हो क्या?"
पत्रकार ने स्पष्ट किया कि यह सवाल किसी दल का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों का है। इसके बाद उन्होंने दोबारा आवाज दी, लेकिन राहुल गांधी बिना जवाब दिए विपक्षी सांसदों के धरने में शामिल होने चले गए।
परिजनों ने मांग की है कि संसद में केवल प्रदर्शनकारियों की बात न हो, बल्कि घायल पुलिसकर्मियों की चिंताओं और उन पर हुए हमलों का मुद्दा भी गंभीरता से उठाया जाए।
देखे VIDEO https://youtube.com/shorts/_wqsHDTTGng?si=pOO6NlrXo2wFEkLw


